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उर्द डिग्रियों की वैधता पर सरकार से जवाब तलब
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उर्दू डिग्रियों की वैधता पर सरकार से जवाब तलब
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 की उर्दू अध्यापक भर्ती में उर्दू डिग्रियों और डिप्लोमा की वैधता पर उठे सवालों पर राज्य सरकार से 15 मई तक जवाब मांगा है। कई बार समय दिए जाने के बाद भी जवाब दाखिल न किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि यदि जवाब दाखिल नहीं होता तो सचिव बेसिक शिक्षा कोर्ट में हाजिर हों। कोर्ट ने बीएसए एटा से भी जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 15 मई को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने एटा के अजहर अली की याचिका पर दिया है। याची ने जामिया उर्दू से अदीब ए कामिल उर्दू डिप्लोमा किया है। ऐसी ही तमाम याचिकाएं अदीब, अदीब ए कामिल, अदीब ए माहिर और मुअल्लिम डिग्री डिप्लोमा की मान्यता को लेकर दाखिल की गई हैं। कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या राज्य सरकार ने इन डिग्रियों को मान्यता दी है या क्या ये डिग्रियां नियमित इंटरमीडिएट की डिग्रियों के समकक्ष हैं। क्या एनसीटीई द्वारा इन्हें मान्यता मिली है और एनसीटीई की मान्यता के बाद राज्य सरकार पर यह बाध्यकारी है। इन सभी सवालों के जवाब सचिव बेसिक शिक्षा उप्र को देना है। संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने याचीगण की डिग्री डिप्लोमा को अमान्य करते हुए चयन में शामिल करने से इंकार कर दिया है। जिसे चुनौती दी गई है।
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 की उर्दू अध्यापक भर्ती में उर्दू डिग्रियों और डिप्लोमा की वैधता पर उठे सवालों पर राज्य सरकार से 15 मई तक जवाब मांगा है। कई बार समय दिए जाने के बाद भी जवाब दाखिल न किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि यदि जवाब दाखिल नहीं होता तो सचिव बेसिक शिक्षा कोर्ट में हाजिर हों। कोर्ट ने बीएसए एटा से भी जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 15 मई को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने एटा के अजहर अली की याचिका पर दिया है। याची ने जामिया उर्दू से अदीब ए कामिल उर्दू डिप्लोमा किया है। ऐसी ही तमाम याचिकाएं अदीब, अदीब ए कामिल, अदीब ए माहिर और मुअल्लिम डिग्री डिप्लोमा की मान्यता को लेकर दाखिल की गई हैं। कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या राज्य सरकार ने इन डिग्रियों को मान्यता दी है या क्या ये डिग्रियां नियमित इंटरमीडिएट की डिग्रियों के समकक्ष हैं। क्या एनसीटीई द्वारा इन्हें मान्यता मिली है और एनसीटीई की मान्यता के बाद राज्य सरकार पर यह बाध्यकारी है। इन सभी सवालों के जवाब सचिव बेसिक शिक्षा उप्र को देना है। संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने याचीगण की डिग्री डिप्लोमा को अमान्य करते हुए चयन में शामिल करने से इंकार कर दिया है। जिसे चुनौती दी गई है।
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