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संशोध्ति 72 हजार की घोषणा
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72 हजार की घोषणा पर कांग्रेस को नोटिस
0 हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा, कार्रवाई का क्या है प्रावधान
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र में गरीबों को सालाना 72 हजार रुपये देने की घोषणा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और कांग्रेस पार्टी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि यदि कोई पार्टी ऐसी घोषणा करती है जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आती है और जिसे मतदाताओं को रिश्वत देना माना जाए, क्या चुनाव आयोग ऐसी घोषणाओं का प्रचार करने वाले पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव के अयोग्य ठहराने हेतु तत्काल कार्यवाही नहीं कर सकता है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा है कि यदि इस प्रकार की घोषणा किसी पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में शामिल की जाती है तो चुनाव आयोग के पास कोई तरीका या सुझाव ऐसा है कि पार्टी और उसके प्रत्याशियों को रोका या प्रतिबंधित किया जा सके। अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। कांग्रेस को भी नोटिस प्राप्त होने के दस दिन के भीतर अपना पक्ष रखना है।
याची अधिवक्ता मोहित कुमार का कहना है जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 भ्रष्ट आचरण में रिश्वत को भी शामिल किया गया है। कांग्रेस पार्टी द्वारा की गई 72 हजार रुपये सालाना देने की घोषणा और कुछ नहीं मतदाताओं को रिश्तव देने की कोशिश है जो एक्ट के तहत भ्रष्ट्र आचरण की श्रेणी में आता है। चुनाव आयोग ने पार्टियों के लिए आदर्श आचार संहिता जारी की है तथा चुनाव घोषणापत्र को लेकर सुप्रीमकोर्ट के एस सुब्रह्मण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य के केस में दी गई गाइड लाइन के आधार पर दिशा निर्देश जारी किए हैं। ऐसी कोई घोषणा नहीं की जा सकती है जिसे पूरा करना संभव न हो और यदि घोषणा की गई है तो उसे पूरा करने के स्रोतों का हवाला देना भी आवश्यक है। याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ सुनवाई कर रही है।
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72 हजार की घोषणा पर कांग्रेस को नोटिस
0 हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा, कार्रवाई का क्या है प्रावधान
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र में गरीबों को सालाना 72 हजार रुपये देने की घोषणा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और कांग्रेस पार्टी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि यदि कोई पार्टी ऐसी घोषणा करती है जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में नहीं आती है और जिसे मतदाताओं को रिश्वत देना माना जाए, क्या चुनाव आयोग ऐसी घोषणाओं का प्रचार करने वाले पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव के अयोग्य ठहराने हेतु तत्काल कार्यवाही नहीं कर सकता है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा है कि यदि इस प्रकार की घोषणा किसी पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में शामिल की जाती है तो चुनाव आयोग के पास कोई तरीका या सुझाव ऐसा है कि पार्टी और उसके प्रत्याशियों को रोका या प्रतिबंधित किया जा सके। अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। कांग्रेस को भी नोटिस प्राप्त होने के दस दिन के भीतर अपना पक्ष रखना है।
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याची अधिवक्ता मोहित कुमार का कहना है जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 भ्रष्ट आचरण में रिश्वत को भी शामिल किया गया है। कांग्रेस पार्टी द्वारा की गई 72 हजार रुपये सालाना देने की घोषणा और कुछ नहीं मतदाताओं को रिश्तव देने की कोशिश है जो एक्ट के तहत भ्रष्ट्र आचरण की श्रेणी में आता है। चुनाव आयोग ने पार्टियों के लिए आदर्श आचार संहिता जारी की है तथा चुनाव घोषणापत्र को लेकर सुप्रीमकोर्ट के एस सुब्रह्मण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य के केस में दी गई गाइड लाइन के आधार पर दिशा निर्देश जारी किए हैं। ऐसी कोई घोषणा नहीं की जा सकती है जिसे पूरा करना संभव न हो और यदि घोषणा की गई है तो उसे पूरा करने के स्रोतों का हवाला देना भी आवश्यक है। याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ सुनवाई कर रही है।
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