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अब बेलनघाटी के पुरास्थलों को देख सकेगी दुनिया
Updated Sun, 12 Aug 2018 01:36 AM IST
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अब बेलनघाटी के पुरास्थलों को देख सकेगी दुनिया
क्रासर
कुंभ से पहले बेलन-गंगा घाटी की मानव सभ्यता पर कला दीर्घा बनाने की संस्कृति मंत्रालय की योजना
कोरांव के पास वर्षों पहले हुई खुदाई में मिले शस्त्रों, मूर्तियों, शैलचित्रों को दीर्घा में मिलेगी जगह
अनूप ओझा
इलाहाबाद। बेलनघाटी के पुरास्थलों महगड़ा एवं कोल्डिहवा से प्राप्त मानव सभ्यता के आरंभिक विकास क्रम के प्रमाणों को इस बार कुंभ में दुनिया देख सकेगी। बेलन नदी घाटी में कोरांव के पास वर्षों पहले हुई खुदाई में पुरातत्व विभाग को मिले दुर्लभ अवशेषों पर आधारित कला दीर्घा के निर्माण का निर्णय संस्कृति मंत्रालय ने लिया है। इलाहाबाद संग्रहालय की इस योजना को नाम दिया गया है ‘युग-युगीन वीथिका’ । संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव अरुण गोयल ने इस आर्ट गैलरी के लिए बेलन-गंगा नदी घाटी की सभ्यता से जुड़े शस्त्रों, मूर्तियों के अलावा शैलचित्रों, शैलाश्रयों का संग्रह करने का निर्देश दिया है।, ताकि कुंभ से पहले इस वीथिका का निर्माण पूरा किया जा सके।
इस वीथिका में कौशांबी, प्रयाग से इलाहाबाद तक की मानव सभ्यता की विकास-यात्रा को दर्शाने का प्रयास किया जाएगा। इलाहाबाद में कोरांव के पास से गुजरी बेलन नदी घाटी से मानव सभ्यता के अंकुरण के प्रमाण खुदाई में मिल चुके हैं। इसके अलावा पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ के दमदमा, महदहा जैसे पुरास्थलों से मानव के आवासीय प्रक्रिया के प्राचीनतम प्रमाणों को भी इस गैलरी में दर्शाने की योजना प्रस्तावित है। साथ ही विंध्य पर्वतमाला की गुफाओं से प्राप्त गुफाचित्रों (रॉक पेंटिंग), को भी इसमें जगह दी जाएगी। बिंदिया के रॉक-शेल्टर भी होंगे, जिन्हें कभी मानव ने अपना आवास बनाया था। प्राचीन वत्स महाजनपद की राजधानी कौशांबी जो छठवीं शताब्दी ईपू में प्रयाग परिमंडल का केंद्र बिंदु हुआ करती थी, वहां से प्राप्त पुरावशेषों जैसे ‘श्येनचेति’ सुरक्षा प्राचीर घोषिताराम बिहार एवं महाराज उदयन के राज्य प्रसार की छवियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा प्राचीन ‘प्रतिष्ठानपुरी’ जिसे अब झूंसी के नाम जाना जाता है, वहां स्थित ‘समुद्र कूप’ एवं ‘उल्टा किला टीला’ को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इलाहाबाद संग्रहालय के निदेशक सुनील गुप्ता बताते हैं कि प्रतिष्ठानपुरी कभी चंद्रवंशी शासक पुरुरवा की राजधानी थी, जहां की रानी ईला के नाम पर इस शहर का नाम ईलावास रखा गया था, जो बाद में परिवर्तित होकर अल्लाहाबाद और फिर इलाहाबाद हो गया।
कोट
इलाहाबाद टू द एजेज यानी ‘युग-युगीन वीथिका’ की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इसमें बेलन और गंगा नदी घाटी के अलावा विंध्य शृंखला में मिले मानव सभ्यता के प्रमाणों को प्रदर्शित किया जाएगा। कुंभ में विश्व समुदाय को इलाहाबाद के अतीत से परिचित कराने के लिए यह अपने तरह की अलग और खास गैलरी होगी। सुनील गुप्ता- निदेशक, इलाहाबाद संग्रहालय।
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क्रासर
कुंभ से पहले बेलन-गंगा घाटी की मानव सभ्यता पर कला दीर्घा बनाने की संस्कृति मंत्रालय की योजना
कोरांव के पास वर्षों पहले हुई खुदाई में मिले शस्त्रों, मूर्तियों, शैलचित्रों को दीर्घा में मिलेगी जगह
अनूप ओझा
इलाहाबाद। बेलनघाटी के पुरास्थलों महगड़ा एवं कोल्डिहवा से प्राप्त मानव सभ्यता के आरंभिक विकास क्रम के प्रमाणों को इस बार कुंभ में दुनिया देख सकेगी। बेलन नदी घाटी में कोरांव के पास वर्षों पहले हुई खुदाई में पुरातत्व विभाग को मिले दुर्लभ अवशेषों पर आधारित कला दीर्घा के निर्माण का निर्णय संस्कृति मंत्रालय ने लिया है। इलाहाबाद संग्रहालय की इस योजना को नाम दिया गया है ‘युग-युगीन वीथिका’ । संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव अरुण गोयल ने इस आर्ट गैलरी के लिए बेलन-गंगा नदी घाटी की सभ्यता से जुड़े शस्त्रों, मूर्तियों के अलावा शैलचित्रों, शैलाश्रयों का संग्रह करने का निर्देश दिया है।, ताकि कुंभ से पहले इस वीथिका का निर्माण पूरा किया जा सके।
इस वीथिका में कौशांबी, प्रयाग से इलाहाबाद तक की मानव सभ्यता की विकास-यात्रा को दर्शाने का प्रयास किया जाएगा। इलाहाबाद में कोरांव के पास से गुजरी बेलन नदी घाटी से मानव सभ्यता के अंकुरण के प्रमाण खुदाई में मिल चुके हैं। इसके अलावा पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ के दमदमा, महदहा जैसे पुरास्थलों से मानव के आवासीय प्रक्रिया के प्राचीनतम प्रमाणों को भी इस गैलरी में दर्शाने की योजना प्रस्तावित है। साथ ही विंध्य पर्वतमाला की गुफाओं से प्राप्त गुफाचित्रों (रॉक पेंटिंग), को भी इसमें जगह दी जाएगी। बिंदिया के रॉक-शेल्टर भी होंगे, जिन्हें कभी मानव ने अपना आवास बनाया था। प्राचीन वत्स महाजनपद की राजधानी कौशांबी जो छठवीं शताब्दी ईपू में प्रयाग परिमंडल का केंद्र बिंदु हुआ करती थी, वहां से प्राप्त पुरावशेषों जैसे ‘श्येनचेति’ सुरक्षा प्राचीर घोषिताराम बिहार एवं महाराज उदयन के राज्य प्रसार की छवियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके अलावा प्राचीन ‘प्रतिष्ठानपुरी’ जिसे अब झूंसी के नाम जाना जाता है, वहां स्थित ‘समुद्र कूप’ एवं ‘उल्टा किला टीला’ को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इलाहाबाद संग्रहालय के निदेशक सुनील गुप्ता बताते हैं कि प्रतिष्ठानपुरी कभी चंद्रवंशी शासक पुरुरवा की राजधानी थी, जहां की रानी ईला के नाम पर इस शहर का नाम ईलावास रखा गया था, जो बाद में परिवर्तित होकर अल्लाहाबाद और फिर इलाहाबाद हो गया।
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कोट
इलाहाबाद टू द एजेज यानी ‘युग-युगीन वीथिका’ की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इसमें बेलन और गंगा नदी घाटी के अलावा विंध्य शृंखला में मिले मानव सभ्यता के प्रमाणों को प्रदर्शित किया जाएगा। कुंभ में विश्व समुदाय को इलाहाबाद के अतीत से परिचित कराने के लिए यह अपने तरह की अलग और खास गैलरी होगी। सुनील गुप्ता- निदेशक, इलाहाबाद संग्रहालय।
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