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प्रतिकूल प्रविष्टि के आधार पर प्रोन् ति रोकना गलत
Updated Fri, 02 Feb 2018 08:16 PM IST
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प्रतिकूल प्रविष्टि के आधार पर प्रोन्नति रोकना गलत
उपनिरीक्षक पद पर प्रोन्नत आरक्षी को प्रशिक्षण पर भेजने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने कहा है कि सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने के कारण दी गई प्रतिकूल प्रविष्टि के आधार पर किसी कर्मचारी की प्रोन्नति रोकना अनुचित है। कोर्ट ने इलाहाबाद पुलिस में तैनात आरक्षी जय सिंह यादव को राहत देते हुए उसे उपनिरीक्षक पद पर प्रोन्नति के बाद प्रशिक्षण पर भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कोई दूसरी अड़चन नहीं है तो याची को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए। जयसिंह के सर्विस रिकार्ड में सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने के आधार पर प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई है।
उपनिरीक्षक के पद पर प्रोन्नति हेतु चयनित होने के बाद उसका प्रशिक्षण इसी आधार पर रोक दिया गया। उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट का कहना था कि उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी अधीनस्थ रैंक (दंड एवं अपील ) नियमावली में सत्यनिष्ठा संदिग्ध होना दंड में शामिल नहीं है। इसलिए इसके आधार पर याची की प्रोन्नति नहीं रोकी जा सकती है। याची उपनिरीक्षक रैंकर विभागीय परीक्षा 2017 में चयनित हुआ था। भर्ती बोर्ड ने उसे सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने के आधार पर प्रशिक्षण पर भेजने से इंकार कर दिया था।
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उपनिरीक्षक पद पर प्रोन्नत आरक्षी को प्रशिक्षण पर भेजने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने कहा है कि सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने के कारण दी गई प्रतिकूल प्रविष्टि के आधार पर किसी कर्मचारी की प्रोन्नति रोकना अनुचित है। कोर्ट ने इलाहाबाद पुलिस में तैनात आरक्षी जय सिंह यादव को राहत देते हुए उसे उपनिरीक्षक पद पर प्रोन्नति के बाद प्रशिक्षण पर भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कोई दूसरी अड़चन नहीं है तो याची को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए। जयसिंह के सर्विस रिकार्ड में सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने के आधार पर प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई है।
उपनिरीक्षक के पद पर प्रोन्नति हेतु चयनित होने के बाद उसका प्रशिक्षण इसी आधार पर रोक दिया गया। उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट का कहना था कि उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी अधीनस्थ रैंक (दंड एवं अपील ) नियमावली में सत्यनिष्ठा संदिग्ध होना दंड में शामिल नहीं है। इसलिए इसके आधार पर याची की प्रोन्नति नहीं रोकी जा सकती है। याची उपनिरीक्षक रैंकर विभागीय परीक्षा 2017 में चयनित हुआ था। भर्ती बोर्ड ने उसे सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने के आधार पर प्रशिक्षण पर भेजने से इंकार कर दिया था।
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