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गरीबों के राशन कार्ड बनाएंगे तो अनाज कैसे ठिकाने लगाएंगे

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Sat, 15 Jun 2019 02:36 AM IST
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बरेली। गरीबों के राशन कार्ड बनेंगे तो वह हर महीने उस पर अनाज भी मांगेंगे। संपन्न लोग राशन कार्ड पर अनाज नहीं मांगते, वे इन राशन कार्डों का इस्तेमाल दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ हड़पने के लिए करते हैं। शाही में लतीफ मियां की मौत के बहाने राशन कार्डों का यही खेल तकरीबन पूरे जिले में खुलकर सामने आ रहा है। दरअसल राशन वितरण की व्यवस्था पूरे जिले में माफियागर्दी की शिकार है। सरकारी सिस्टम की मेहरबानी से माफिया ने इस व्यवस्था में इतने ज्यादा छेद कर दिए हैं कि गरीबों के हिस्से का अनाज सीधे सरकारी गोदामों से पार हो जाता है, फिर भी सिस्टम बेखबर बना रहता है। कोटे की दुकानों तक पूरा अनाज पहुंचता ही नहीं, इसलिए जब राशन कार्ड धारक वहां राशन लेने पहुंचते हैं तो दबंग कोटेदार उन्हें ठेंगा दिखा देते हैं।
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शाही में लतीफ मियां का राशन कार्ड तो बाकायदा ऑनलाइन आवेदन करने और डीएम के आदेश के बाद भी नहीं बना, लेकिन ऐसे दर्जनों नाम हैं जो अच्छे-खासे संपन्न होते हुए भी अंत्योदय और पात्र गृहस्थी जैसे समाज के अंतिम छोर वाले लोगों के लिए चलाई गई योजना के राशन कार्ड हथियाए बैठे हैं। गरीबों का राशन हड़पने वाला सिस्टम कितना सशक्त है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ समय पहले शाही में तमाम अमीरों को अंत्योदय और पात्र गृहस्थी राशन कार्ड दे दिए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री के जनता दरबार में की गई, जहां से जिला प्रशासन के लिए जांच के आदेश जारी हुए लेकिन यह जांच शुरू तक नहीं हो पाई। शाही के लोगों ने अब हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है, जिस पर हाईकोर्ट ने भी आदेश कर दिया है लेकिन अभी तक इस आदेश पर भी अमल नहीं हुआ है।

70 बीघा जमीन का मालिक रिटायर्ड हेडमास्टर के परिवार को दे दिए तीन अंत्योदय राशन कार्ड
लतीफ मियां की तरह शाही में ऐसे लोगों की तादाद सैकड़ों में हैं जिन्हें पात्र होने के बावजूद राशन कार्ड नहीं दिया गया है। सिस्टम के रवैये के खिलाफ इन लोगों में काफी गुस्सा है। इन लोगों का कहना है कि अगर ठीक से जांच की जाए तो शाही ही नहीं पूरी मीरगंज तहसील के अधिकांश कस्बों और गांवों में अपात्र लोगों को राशन कार्ड दिए जाने के सैकड़ों मामलों का खुलासा हो सकता है। बताया जाता है साल भर पहले लालपुर गांव के कई लोगों ने सचिव के साथ सप्लाई ऑफिस में जाकर अंत्योदय राशन कार्ड बनाने में बड़ा घपला किए जाने शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि जूनियर हाईस्कूल के एक रिटायर्ड हेडमास्टर जो 70 बीघा जमीन का भी मालिक है, उसके परिवार में उसे, उसकी पत्नी और पुत्रवधू के नाम तीन अंत्योदय राशन कार्ड जारी कर दिए गए हैं। इन लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद ये राशन कार्ड निरस्त नहीं हुए न ही कोई जांच कराई गई।

एसडीएम ने कहा- नगर पंचायत ईओ की रिपोर्ट पर बनते हैं राशन कार्ड
एसडीएम मीरगंज रोहित यादव ने बताया कि डीएम का शाही के मामले में जांच करने का आदेश अभी उन्हें नहीं मिला है, जैसे ही आदेश मिलेगा वह जांच शुरू करा देंगे। उन्होंने बताया कि अपात्रों को राशन कार्ड जारी करने के मामले की वैसे भी जांच कराई जा रही हैं, हालांकि राशन कार्ड बनाने में सप्लाई विभाग या तहसील की ज्यादा भूमिका नहीं होती। कस्बों में राशन कार्ड नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों की रिपोर्ट पर बनाए जाते हैं। हालांकि एसडीएम ने यह भी कहा कि अगर किसी अपात्र को राशन कार्ड जारी करने की बात संज्ञान में आती है तो उसे निरस्त करने की जिम्मेदारी सप्लाई इंस्पेक्टर की होती है। बता दें कि आठ महीने पहले समाधान दिवस में पहुंचे लतीफ मियां का राशन कार्ड बनवाने का निर्देश डीएम ने एसडीएम को ही दिया था। फिर भी उनका राशन कार्ड नहीं बना।

राशन कार्ड से गायब कर दिए परिवार के लोगों के नाम
बहेड़ी। तमाम लोग अपने राशन कार्ड से परिवार के लोगों के नाम गायब कर दिए जाने के कारण इधर-उधर भटक रहे हैं। गुलड़िया भवानी गांव के गिरजेश दत्त पर पहले से राशन कार्ड था। नए राशन कार्ड के लिए उन्होंने छह महीने पहले ऑनलाइन आवेदन किया। नया राशन कार्ड आया तो उसमें दो यूनिट ही दर्ज थे। परिवार के छह लोगों के नाम गायब कर दिए गए। अब वह तीन महीनों से इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा है। कर्ठरा गांव के मोहम्मद आरिफ ने परिवार की मुखिया अफसर जहां के नाम से राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। राशन कार्ड आया तो पांच यूनिट गायब निकले। वह भी महीनों से सप्लाई दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। कोटेदार को कई बार आधार कार्ड और पहचान पत्र आदि दे चुके हैं। सप्लाई विभाग का स्टाफ यह कहकर टरका रहा है कि दोबारा ऑनलाइन आवेदन करो।


आधार में नाम बदला तो राशन मिलना ही बंद
फरीदपुर। आधार कार्ड में नाम बदलने के बाद तमाम लोगों को राशन मिलना ही बंद हो गया है। गांव सब्दलपुर के रामनिवास के राशन कार्ड में छह यूनिट थे। अचानक उन्हें राशन मिलना बंद हो गया। रामनिवास ने पूर्ति ऑफिस में पता किया तो बताया गया कि उसकी बीवी शांति देवी के नाम कार्ड बना हुआ है। लेकिन आधार कार्ड में नाम ऊषा देवी है, इसलिए उसका कार्ड निरस्त कर दिया गया है। अब उन्हें दोबारा ऑनलाइन आवेदन करना पड़ेगा। अब गरीब राम निवास ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी महीनों से राशन कार्ड के लिए पूर्ति कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

आखिर सप्लाई इंस्पेक्टर पर कार्रवाई
मीरगंज से हटाकर नवाबगंज भेजा

अदनों को नापकर अपनी गर्दन बचाने में जुटे अफसर
बरेली। लतीफ मियां की मौत के बाद राशन कार्ड की हेराफेरी में बुरी तरह घिरे पूर्ति विभाग ने इस मामले में लीपापोती की कोशिश शुरू कर दी है। शुक्रवार को मीरगंज के सप्लाई इंस्पेक्टर अवधेंद्र सिंह को हटाकर नवाबगंज भेज दिया गया जबकि नवाबगंज में तैनात पशुपति देव को उनकी जगह तैनात किया गया है। हालांकि अवधेंद्र सिंह की तैनाती मीरगंज में दिसंबर में ही हुई थी। पात्रों के बजाय अपात्रों के राशन कार्ड बनाए जाने के ज्यादातर मामले उनकी तैनाती से पहले के ही हैं।
लतीफ मियां ने 15 सितंबर 2018 को समाधान दिवस में डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को अपना राशन कार्ड बनाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने अपना पीठ में धंसा पेट डीएम को दिखाते हुए कहा था कि वह तहसील के चक्कर काटते-काटते परेशान हो चुके हैं। अगर अब भी वह उनका राशन कार्ड नहीं बनवा सकते तो उन्हें मार दें। डीएम ने इस पर एसडीएम रोहित यादव को प्राथमिकता के आधार पर लतीफ मियां का राशन कार्ड बनवाने का निर्देश दिया था। लेकिन इसके बावजूद आठ महीने बाद लतीफ मियां राशन कार्ड की तमन्ना दिल में लिए छह जून को चल बसे। उस दौरान मीरगंज में तरमीम अहमद सप्लाई इंस्पेक्टर थे। मगर इसके बावजूद मौजूदा सप्लाई इंस्पेक्टर अवधेंद्र सिंह को हटाकर लीपापोती कर दी गई। बताया जा रहा है कि चूंकि राशन कार्ड घोटाले की आंच ऊपर तक पहुंचने का अंदेशा है, लिहाजा अधिकारी अदने कर्मचारियों को नापकर अपनी गर्दन बचाने की कोशिशों में जुट गए हैं।

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