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जिनोमिक सेंटर के लिए इविवि को मिले 20 करोड़
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जिनोमिक सेंटर के लिए इविवि को मिले 20 करोड़
0 बायोकेमेस्ट्री विभाग में की जाएगी नए सेंटर की स्थापना
0 जीन से संबंधित अध्ययन और होंगे कई महत्वपूर्ण शोध
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि आई है। इविवि के बायोकेमेस्ट्री विभाग को जिनोमिक सेंटर की स्थापना के लिए मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी की ओर से 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। देश भर में ऐसे तीन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
भारत सरकार की स्कीम नेशनल जिनोमिक कोर के तहत उत्तर भारत में इलाहाबाद विश्वविद्यालय, पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जिनोमिक्स, कल्याणी पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत में सेंटर ऑफ डीएनए, फ्रिंगरप्रिंट एंड डायग्नोस्टिक हैदराबाद के खाते में यह उपलब्धि आई है। जिनोमिक सेंटर में पेड़-पौधों, पशु और मानव के जीन पर अध्ययन किया जाएगा। जेनेटिक बीमारी, आयु समेत जीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पढ़ाई और शोध होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बायोकेमेस्ट्री विभाग के प्रो. एसआई रिजवी को सेंटर का प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर बनाया गया है। सेंटर की सभी गतिविधियां उन्हीं की देखरेख में होंगी।
प्रो. रिजवी ओर से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित तमाम शोध पत्रों और उनके काम के आधार पर ही इविवि के खाते में यह उपलब्धि आई है। जिनोमिक सेंटर में न केवल विश्वविद्यालय के छात्र या शिक्षक, बल्कि इस क्षेत्र में काम करने वाले उत्तर भारत के अन्य राज्यों से भी लोग यहां आकर शोध कर सकेंगे। जिनोमिक सेंटर के लिए 20 करोड़ रुपये मिलने के बाद इविवि में इस पर काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही एक अन्य ग्रांट की मांग भी की गई है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो जिनोमिक सेंटर के लिए अलग से भवन का निर्माण भी कराया जाएगा।
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0 बायोकेमेस्ट्री विभाग में की जाएगी नए सेंटर की स्थापना
0 जीन से संबंधित अध्ययन और होंगे कई महत्वपूर्ण शोध
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि आई है। इविवि के बायोकेमेस्ट्री विभाग को जिनोमिक सेंटर की स्थापना के लिए मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी की ओर से 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। देश भर में ऐसे तीन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
भारत सरकार की स्कीम नेशनल जिनोमिक कोर के तहत उत्तर भारत में इलाहाबाद विश्वविद्यालय, पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जिनोमिक्स, कल्याणी पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत में सेंटर ऑफ डीएनए, फ्रिंगरप्रिंट एंड डायग्नोस्टिक हैदराबाद के खाते में यह उपलब्धि आई है। जिनोमिक सेंटर में पेड़-पौधों, पशु और मानव के जीन पर अध्ययन किया जाएगा। जेनेटिक बीमारी, आयु समेत जीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पढ़ाई और शोध होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बायोकेमेस्ट्री विभाग के प्रो. एसआई रिजवी को सेंटर का प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर बनाया गया है। सेंटर की सभी गतिविधियां उन्हीं की देखरेख में होंगी।
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प्रो. रिजवी ओर से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित तमाम शोध पत्रों और उनके काम के आधार पर ही इविवि के खाते में यह उपलब्धि आई है। जिनोमिक सेंटर में न केवल विश्वविद्यालय के छात्र या शिक्षक, बल्कि इस क्षेत्र में काम करने वाले उत्तर भारत के अन्य राज्यों से भी लोग यहां आकर शोध कर सकेंगे। जिनोमिक सेंटर के लिए 20 करोड़ रुपये मिलने के बाद इविवि में इस पर काम शुरू कर दिया गया है। साथ ही एक अन्य ग्रांट की मांग भी की गई है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो जिनोमिक सेंटर के लिए अलग से भवन का निर्माण भी कराया जाएगा।
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