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पीएसी कांस्टेबलों के स् थानांतरण पर रोक से इंकार
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सभी केंद्र (मुरादाबाद के लिए खास)
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पीएसी कांस्टेबल चालकों के
स्थानांतरण पर रोक से इंकार
0 हाईकोर्ट ने कहा संबंधित अधिकारी से करें शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने पीएसी मुरादाबाद में तैनात दर्जनों पीएसी कांस्टेबल चालकों के स्थानांतरण के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सामान्यता: स्थानांतरण सेवा का अनिवार्य हिस्सा है। इसमें अदालत तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक कि किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन न किया गया हो। कोर्ट ने याचीगण को छूट दी है कि वह अपना प्रत्यावेदन संबंधित अधिकारी को दें और अधिकारी दो माह में उसका निस्तारण करें। यशवीर सिंह और 16 अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने दिया।
याचीगण का कहना था कि उनकी नियुक्ति पीएसी मेें कांस्टेबल वाहन चालक के पद पर हुई थी। पहले उनकी तैनाती प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई थी। बाद में उनकी तैनाती मुरादाबाद में कर दी गई। पांच मार्च 2019 को आईजी मुरादाबाद ने एक आदेश जारी कर याचीगण का स्थानांतरण विभिन्न जिलों के लिए कर दिया। याचिका में कहा गया कि पुलिस विभाग की स्थानांतरण नीति के अनुसार और 24 जुलाई 2015 के शासनादेश के मुताबिक 10 वर्ष की सेवा एक जिले में पूरी किए बिना स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना। अदालत का कहना था कि यह सामान्य नियम है कि स्थानांतरण सेवा का हिस्सा है। अदालतें इसमें सीमित आधार पर ही हस्तक्षेप कर सकती हैं। जबकि किसी कानूनी अधिकारी या नियम का उल्लंघन हुआ हो। इस मामले में याचीगण ऐसा कुछ साबित नहीं कर सके हैं। कोर्ट ने याचीगण को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन देने की छूट दी है।
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पीएसी कांस्टेबल चालकों के
स्थानांतरण पर रोक से इंकार
0 हाईकोर्ट ने कहा संबंधित अधिकारी से करें शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने पीएसी मुरादाबाद में तैनात दर्जनों पीएसी कांस्टेबल चालकों के स्थानांतरण के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सामान्यता: स्थानांतरण सेवा का अनिवार्य हिस्सा है। इसमें अदालत तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक कि किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन न किया गया हो। कोर्ट ने याचीगण को छूट दी है कि वह अपना प्रत्यावेदन संबंधित अधिकारी को दें और अधिकारी दो माह में उसका निस्तारण करें। यशवीर सिंह और 16 अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने दिया।
याचीगण का कहना था कि उनकी नियुक्ति पीएसी मेें कांस्टेबल वाहन चालक के पद पर हुई थी। पहले उनकी तैनाती प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई थी। बाद में उनकी तैनाती मुरादाबाद में कर दी गई। पांच मार्च 2019 को आईजी मुरादाबाद ने एक आदेश जारी कर याचीगण का स्थानांतरण विभिन्न जिलों के लिए कर दिया। याचिका में कहा गया कि पुलिस विभाग की स्थानांतरण नीति के अनुसार और 24 जुलाई 2015 के शासनादेश के मुताबिक 10 वर्ष की सेवा एक जिले में पूरी किए बिना स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है।
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कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना। अदालत का कहना था कि यह सामान्य नियम है कि स्थानांतरण सेवा का हिस्सा है। अदालतें इसमें सीमित आधार पर ही हस्तक्षेप कर सकती हैं। जबकि किसी कानूनी अधिकारी या नियम का उल्लंघन हुआ हो। इस मामले में याचीगण ऐसा कुछ साबित नहीं कर सके हैं। कोर्ट ने याचीगण को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन देने की छूट दी है।
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