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जीएसटी विजलेंस विवेचक के खिलाफ जांच को चुनौती
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गाजियाबाद के ध्यानार्थ
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जीएसटी विजलेंस विवेचक
के खिलाफ जांच को चुनौती
0 हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीएसटी विजिलेंस गाजियाबाद के विवेचक के खिलाफ विभागीय जांच करने के अधीनस्थ न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका महानिदेशक जीएसटी ने दाखिल की है। कोर्ट ने व्यापारी गौरव जिंदल को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
याचिका पर न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता सुनवाई कर रहे हैं। गाजियाबाद के व्यापारी गौरव जिंदल को बिना ट्रांजेक्शन के फर्जी इनवॉइस पर 48 करोड़ के माल सप्लाई के आरोप में 19 फरवरी 19 को गिरफ्तार किया गया। 22 अप्रैल 19 को सीजेएम ने तीन करोड़ की बैंक गारंटी और एक करोड़ नकद जमा करने की शर्त पर उसे जमानत दे दी। सीजेएम ने कहा जीएसटी कानून के तहत 60 दिन में चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए थी। विवेचक द्वारा चार्जशीट दाखिल न करने के कारण कोर्ट को आरोपी को जमानत देनी पड़ी, इसलिए विवेचक के खिलाफ जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया।
याची अधिवक्ता का कहना था कि 60 दिन में चार्जशीट दाखिल करने की बाध्यता नहीं है। 60 दिन बाद जमानत अर्जी सुनने की व्यवस्था है। जीएसटी कानून की धारा 132 में बिना प्रमुख मुख्य आयुक्त के अनुमोदन के किसी केस में चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती है। मजिस्ट्रेट का आदेश कानून के विपरीत है। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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जीएसटी विजलेंस विवेचक
के खिलाफ जांच को चुनौती
0 हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीएसटी विजिलेंस गाजियाबाद के विवेचक के खिलाफ विभागीय जांच करने के अधीनस्थ न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका महानिदेशक जीएसटी ने दाखिल की है। कोर्ट ने व्यापारी गौरव जिंदल को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
याचिका पर न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता सुनवाई कर रहे हैं। गाजियाबाद के व्यापारी गौरव जिंदल को बिना ट्रांजेक्शन के फर्जी इनवॉइस पर 48 करोड़ के माल सप्लाई के आरोप में 19 फरवरी 19 को गिरफ्तार किया गया। 22 अप्रैल 19 को सीजेएम ने तीन करोड़ की बैंक गारंटी और एक करोड़ नकद जमा करने की शर्त पर उसे जमानत दे दी। सीजेएम ने कहा जीएसटी कानून के तहत 60 दिन में चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए थी। विवेचक द्वारा चार्जशीट दाखिल न करने के कारण कोर्ट को आरोपी को जमानत देनी पड़ी, इसलिए विवेचक के खिलाफ जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया।
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याची अधिवक्ता का कहना था कि 60 दिन में चार्जशीट दाखिल करने की बाध्यता नहीं है। 60 दिन बाद जमानत अर्जी सुनने की व्यवस्था है। जीएसटी कानून की धारा 132 में बिना प्रमुख मुख्य आयुक्त के अनुमोदन के किसी केस में चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती है। मजिस्ट्रेट का आदेश कानून के विपरीत है। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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