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हाईकोर्ट के आदेश से बदला बार का चुनावी गणित
Updated Wed, 22 Nov 2017 02:19 AM IST
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हाईकोर्ट के आदेश से बदला बार का चुनावी गणित
0 बार एसोसिएशन की सदस्यता प्राप्त करने की तारीख से अनुभव जोड़ने पर कई की उम्मीदवारी पर ग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने इस बार के चुनाव में प्रत्याशियों और मतदाताओं के अनुभव का निर्धारण हाईकोर्ट बार की सदस्यता ग्रहण करने की तारीख से करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 14 दिसंबर को होने वाले चुनाव का गणित उलट सकता है। एसोसिएशन की सदस्यता से अनुभव जोड़ने का अर्थ है कि कई उम्मीदवार चुनावी मैदान से खुद ब खुद बाहर हो जाएंगे। हालांकि इससे पहले अनुभव की गणना बार काउंसिल में पंजीकरण से जोड़ने के कारण अनुभव के वर्ष बढ़ जाते थे।
हाईकोर्ट बार के बाईलॉज 17 के अनुसार अध्यक्ष पद का चुनाव वही अधिवक्ता लड़ सकता है जिसके पास 20 वर्ष की सदस्यता और सक्रिय वकालत का अनुभव है। इसी प्रकार से महासचिव के लिए 15 वर्ष और उपाध्यक्ष के लिए 10 वर्ष का अनुभव चाहिए। इसी प्रकार से अन्य पदों के लिए भी अलग अलग सदस्यता अनुभव चाहिए। वरिष्ठ उपाध्यक्ष और अन्य पदों पर लड़ने वाले कई उम्मीदवार सदस्यता की शर्त पूरी न करने के कारण अब मैदान से बाहर हो गए हैं। इसका लाभ उनको मिलेगा जो अर्हता पूरी करते हैं। प्रतिद्वंद्वियों की संख्या कम होने से मत विभाजन कम होगा तो जाहिर है कि उम्मीदवार को इसका लाभ मिलेगा।
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0 बार एसोसिएशन की सदस्यता प्राप्त करने की तारीख से अनुभव जोड़ने पर कई की उम्मीदवारी पर ग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने इस बार के चुनाव में प्रत्याशियों और मतदाताओं के अनुभव का निर्धारण हाईकोर्ट बार की सदस्यता ग्रहण करने की तारीख से करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 14 दिसंबर को होने वाले चुनाव का गणित उलट सकता है। एसोसिएशन की सदस्यता से अनुभव जोड़ने का अर्थ है कि कई उम्मीदवार चुनावी मैदान से खुद ब खुद बाहर हो जाएंगे। हालांकि इससे पहले अनुभव की गणना बार काउंसिल में पंजीकरण से जोड़ने के कारण अनुभव के वर्ष बढ़ जाते थे।
हाईकोर्ट बार के बाईलॉज 17 के अनुसार अध्यक्ष पद का चुनाव वही अधिवक्ता लड़ सकता है जिसके पास 20 वर्ष की सदस्यता और सक्रिय वकालत का अनुभव है। इसी प्रकार से महासचिव के लिए 15 वर्ष और उपाध्यक्ष के लिए 10 वर्ष का अनुभव चाहिए। इसी प्रकार से अन्य पदों के लिए भी अलग अलग सदस्यता अनुभव चाहिए। वरिष्ठ उपाध्यक्ष और अन्य पदों पर लड़ने वाले कई उम्मीदवार सदस्यता की शर्त पूरी न करने के कारण अब मैदान से बाहर हो गए हैं। इसका लाभ उनको मिलेगा जो अर्हता पूरी करते हैं। प्रतिद्वंद्वियों की संख्या कम होने से मत विभाजन कम होगा तो जाहिर है कि उम्मीदवार को इसका लाभ मिलेगा।
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