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मेडिकल कचरे के निस्तारण
Updated Thu, 03 Aug 2017 08:22 PM IST
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मेडिकल कचरे के निस्तारण में ढिलाई बर्दाश्त नहीं
0 हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के ट्रीटमेंट प्लांटों का ब्यौरा मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
अस्पतालों से निकलने के वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। मुख्य सचिव द्वारा दाखिल जवाब को अपर्याप्त मानते हुए कोर्ट ने उनका हलफनामा अस्वीकार कर दिया है। पूरी जानकारी के साथ नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिलेवार ब्योरा दिया जाए कि किस जिले में कितना मेडिकल कचरा उत्सर्जित हो रहा है। उसके निस्तारण के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं। मामले की सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। अस्पताल और सरकार दोनों इसके लिए सजग नहीं हैं जबकि बायोमेडिकल कचरा जनस्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। याचिका पर कोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा था। हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश भर में 17 बायोमेडिकल निस्तारण सयंत्र लगाए गए हैं। कचरे का प्रबंधन न करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई करने का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अधिकार है। उसका कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि कुल कि तना मेडिकल कचरा उत्सर्जित होता है और उसके निस्तारण के लिए कितने प्लांट होने चाहिए। नियमानुसार मेडिकल कचरे को अलग कर माइक्रोवेव में प्री ट्रीटमेंट करने के बाद उसे कचरा निस्तारण सयंत्र में भेजा जाना चाहिए। कचरा सयंत्र तक ले जाने वाहनों में जीपीएस लगा होना चाहिए। मगर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है जबकि मेडिकल कचरा जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कोर्ट ने कचरा निस्तारण सयंत्रों की क्षमता, वाहनों की संख्या और सरकारी अस्पतालों की स्थिति से 18 अगस्त तक अवगत कराने का मुख्य सचिव को निर्देश दिया है।
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0 हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के ट्रीटमेंट प्लांटों का ब्यौरा मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
अस्पतालों से निकलने के वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। मुख्य सचिव द्वारा दाखिल जवाब को अपर्याप्त मानते हुए कोर्ट ने उनका हलफनामा अस्वीकार कर दिया है। पूरी जानकारी के साथ नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिलेवार ब्योरा दिया जाए कि किस जिले में कितना मेडिकल कचरा उत्सर्जित हो रहा है। उसके निस्तारण के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं। मामले की सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। अस्पताल और सरकार दोनों इसके लिए सजग नहीं हैं जबकि बायोमेडिकल कचरा जनस्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। याचिका पर कोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा था। हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश भर में 17 बायोमेडिकल निस्तारण सयंत्र लगाए गए हैं। कचरे का प्रबंधन न करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई करने का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अधिकार है। उसका कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि कुल कि तना मेडिकल कचरा उत्सर्जित होता है और उसके निस्तारण के लिए कितने प्लांट होने चाहिए। नियमानुसार मेडिकल कचरे को अलग कर माइक्रोवेव में प्री ट्रीटमेंट करने के बाद उसे कचरा निस्तारण सयंत्र में भेजा जाना चाहिए। कचरा सयंत्र तक ले जाने वाहनों में जीपीएस लगा होना चाहिए। मगर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है जबकि मेडिकल कचरा जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कोर्ट ने कचरा निस्तारण सयंत्रों की क्षमता, वाहनों की संख्या और सरकारी अस्पतालों की स्थिति से 18 अगस्त तक अवगत कराने का मुख्य सचिव को निर्देश दिया है।
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