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Prayagraj News: एसआरएन में युवक की पीठ से निकाला गया 15 किलो का ट्यूमर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 Nov 2024 03:02 AM IST
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15 kg tumor removed from young man's back in SRN
स्वरूप रानी अस्पताल (एसआरएन) के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में जौनपुर निवासी 20 वर्षीय युवक की पीठ से 15 किलोग्राम का ट्यूमर निकाला गया है। यह ऑपरेशन सात घंटे चला। इस दाैरान युवक को सात यूनिट ब्लड भी चढ़ाना पड़ा।
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चिकित्सकों का दावा है कि यह एसआरएन अस्पताल में निकाला गया अब तक का सबसे बड़ा ट्यूमर है। जौनपुर निवासी युवक को जन्म से ही पीठ पर लक्षण की शिकायत थी। उम्र बढ़ने के साथ यह ट्यूमर का रूप लेने लगा। 2013 में युवक जब 11 साल का था तब एसआरएन अस्पताल में ऑपरेशन करके ट्यूमर निकाला गया। मगर कम उम्र होने की वजह से पूरा ट्यूमर नहीं निकाला जा सका था।
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वाराणसी में 2018 में युवक की फिर सर्जरी हुई। यहां भी ट्यूमर निकाला गया। मगर कुछ महीनों बाद ट्यूमर फिर विकसित होने लगा। इसके बाद परिजनों ने कई जगह दिखाया। पिछले कुछ महीनों से युवक की दिक्कत बढ़ने लगी। असर रीढ़ की हड्डी पर पड़ने लगा।
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जिसके बाद सितंबर 2024 में युवक को फिर एसआरएन लाया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित जैन व उनकी टीम ने ऑपरेशन किया। चिकित्सकों के मुताबिक, इस बार ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया गया है। ऑपरेशन के बाद युवक 15 दिनाें तक अस्पताल में भर्ती रहा। ऑपरेशन के पहले युवक का वजन करीब 80 किलो था। 15 किलो ट्यूमर निकालने के बाद उसका वजन अब 65 किलो है। उसे जांच के लिए हर 15 दिन में अस्पताल आना पड़ रहा है।
डॉ. मोहित जैन ने बताया कि इसको प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफाइब्रोमा, न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस ट्यूमर कहते हैं। यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। उन्होंने इस ऑपरेशन के लिए डॉ. विनायक, डॉ. यर्शाथ, एनेस्थीसिया की विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम सिंह, डॉ. वैभव, ओटी स्टाफ सिस्टर जागृति व बिंदु को बधाई दी।


क्या है प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस ट्यूमर
प्लेक्सिफॉर्म न्यूरोफाइब्रोमा, न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1 से जुड़ा एक असामान्य ट्यूमर होता है। यह तंत्रिकाओं को ढकने वाले ऊतक में बनता है। मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर शरीर में कहीं भी हो सकता है। यह ट्यूमर कई नसों को प्रभावित करता है और चेहरे पर होने पर विकृति पैदा कर सकता है। यह तेजी से बढ़ता है।

डॉक्टर साहब मेरे लिए किसी भगवान से कम नहीं है। मेरा जीना मुश्किल हो गया था। मगर इस ऑपरेशन के बाद मुझे काफी राहत मिली है। पीड़ित युवक, जौनपुर
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