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सर्किट हाउस के बाहर जाम लगाकर हंगामा काटा
Updated Sun, 04 Jun 2017 09:31 PM IST
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बीटीसी प्रशिक्षुओं ने सरकिट हाउस के गेट पर रख दिया साथी युवक का शव, लाठीचार्ज
उरई का रहने वाला है ऋषि, संगम पर डूबने से हुई थी मौत
उसी वक्त निकलने वाले थे मुख्यमंत्री योगी, दस मिनट तक रुके रहे
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
मुख्यमंत्री की समीक्षा के दौरान कड़ी सुरक्षा में सेंध लगाकर बीटीसी प्रशिक्षुओं ने साथी युवक का शव सरकिट हाउस के गेट पर रख दिया। अचानक शव देखकर एसपी सिटी सहित कई पुलिस अधिकारी हड़बड़ा गए। रिजर्व पुलिस बुलाकर शव कब्जे में ले लिया और युवाओं की भीड़ को लठीचार्ज करके दौड़ा दिया। कड़ी सुरक्षा के बावजूद प्रशिक्षुओं के शव लेकर आने पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे पर जमकर बरसे।
इलाहाबाद में सीएम दो दिवसीय दौरे शनिवार को आ गए थे। उनसे सामने अपनी समस्या रखने के लिए इलाहाबाद, बांदा, बनारस, झांसी तथा कानपुर मंडलों के बीटीसी प्रशिक्षु तीन दिन पहले से पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से सीएम से मिलवाने का अनुरोध किया लेकिन अनुमति नहीं दी गई। रविवार सुबह उरई (जालौन) निवासी बीटीसी प्रशिक्षु ऋषि लोचन संगम तट पर स्नान करने गया था। वहीं पर अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। वहां मौजूद साथियों ने ऋषि को बचाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। गोताखोरों की मदद से शव निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। दोपहर में ही पोस्टमार्टम हो गया। उसके बाद दूसरे शहरों से आए बीटीसी प्रशिक्षुओं ने सीएम से मिलने के लिए गोपनीय रणनीति बनाई। तीन युवक ऋषि के शव को एंबुलेेंस में रखकर सरकिट हाउस के गेट तक ले आए। उनसे पहले बीटीसी प्रशिक्षुओं की भीड़ दो-चार के समूह में सरकिट हाउस के आसपास जमा हो गई। शाम करीब साढ़े पांच बजे एंबुलेंस के पहुंचते ही आसपास खड़े युवकों ने शव सड़क पर रख दिया। शव के साथ युवाओं की भीड़ को देखकर गेट के बाहर खड़े एसपी सिटी सहित अधिकांश पुलिस अफसर हड़बड़ा गए। यह जानकारी एसएसपी सहित सभी अफसरों को दी गई। रिजर्व पुलिस और वहां मौजूद पुलिस बल ने शव एंबुलेंस में रखकर थाना सिविल लाइंस भेज दिया। उसी समय वहां मौजूद युवाओं की भीड़ पर जमकर लाठियां बरसाईं। उन्हें दोनों ओर आधा किलोमीटर दूर तक खदेड़ दिया।
युवाओं को दौड़ाने के समय सीएम लखनऊ जाने की तैयारी में थे, लेकिन उच्च अधिकारियों ने दस मिनट तक उन्हें सरकिट हाउस में रोके रखा। बाहर सब कुछ सामान्य होने के बाद ही सीएम की गाड़ियों का काफिला पुलिस लाइन पहुंचा और वहां से वह हेलीकाप्टर से लखनऊ के लिए रवाना हुए।
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यह है बीटीसी प्रशिक्षुओं की मांग
2013 बैच के 12460 बीटीसी प्रशिक्षुओं को 16 दिसंबर 2016 को शासनादेश जारी कराके नियुुक्ति प्रक्रिया शुरू कराई गई थी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर उन्हें 31 मार्च 2017 को स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करना था लेकिन प्रदेश सरकार ने 23 मार्च को एक आदेश जारी करके अग्रिम आदेशों तक के लिए नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इस रोक को हटवाने के लिए यह बीटीसी प्रशिक्षु सीएम से मिलने के लिए इलाहाबाद में समय मांग रहे थे।
‘सीएम की समीक्षा के दौरान शव को लेकर सरकिट हाउस के गेट तक लाना और सड़क पर रखना गंभीर मामला है। जिसकी विभागीय जांच कराई जा रही है। यह गंभीर मामला है कि एंबुुलेंस से शव निकाल कर सड़क पर रख दिया गया। उस स्थान पर तैनात पुलिस बल की लापरवाही रही है, जिसकी विभागीय जांच कराई जा रही है।’ -आनंद कुलकर्णी, एसएसपी
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बीटीसी प्रशिक्षुओं ने सरकिट हाउस के गेट पर रख दिया साथी युवक का शव, लाठीचार्ज
उरई का रहने वाला है ऋषि, संगम पर डूबने से हुई थी मौत
उसी वक्त निकलने वाले थे मुख्यमंत्री योगी, दस मिनट तक रुके रहे
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
मुख्यमंत्री की समीक्षा के दौरान कड़ी सुरक्षा में सेंध लगाकर बीटीसी प्रशिक्षुओं ने साथी युवक का शव सरकिट हाउस के गेट पर रख दिया। अचानक शव देखकर एसपी सिटी सहित कई पुलिस अधिकारी हड़बड़ा गए। रिजर्व पुलिस बुलाकर शव कब्जे में ले लिया और युवाओं की भीड़ को लठीचार्ज करके दौड़ा दिया। कड़ी सुरक्षा के बावजूद प्रशिक्षुओं के शव लेकर आने पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी एक-दूसरे पर जमकर बरसे।
इलाहाबाद में सीएम दो दिवसीय दौरे शनिवार को आ गए थे। उनसे सामने अपनी समस्या रखने के लिए इलाहाबाद, बांदा, बनारस, झांसी तथा कानपुर मंडलों के बीटीसी प्रशिक्षु तीन दिन पहले से पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से सीएम से मिलवाने का अनुरोध किया लेकिन अनुमति नहीं दी गई। रविवार सुबह उरई (जालौन) निवासी बीटीसी प्रशिक्षु ऋषि लोचन संगम तट पर स्नान करने गया था। वहीं पर अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। वहां मौजूद साथियों ने ऋषि को बचाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। गोताखोरों की मदद से शव निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। दोपहर में ही पोस्टमार्टम हो गया। उसके बाद दूसरे शहरों से आए बीटीसी प्रशिक्षुओं ने सीएम से मिलने के लिए गोपनीय रणनीति बनाई। तीन युवक ऋषि के शव को एंबुलेेंस में रखकर सरकिट हाउस के गेट तक ले आए। उनसे पहले बीटीसी प्रशिक्षुओं की भीड़ दो-चार के समूह में सरकिट हाउस के आसपास जमा हो गई। शाम करीब साढ़े पांच बजे एंबुलेंस के पहुंचते ही आसपास खड़े युवकों ने शव सड़क पर रख दिया। शव के साथ युवाओं की भीड़ को देखकर गेट के बाहर खड़े एसपी सिटी सहित अधिकांश पुलिस अफसर हड़बड़ा गए। यह जानकारी एसएसपी सहित सभी अफसरों को दी गई। रिजर्व पुलिस और वहां मौजूद पुलिस बल ने शव एंबुलेंस में रखकर थाना सिविल लाइंस भेज दिया। उसी समय वहां मौजूद युवाओं की भीड़ पर जमकर लाठियां बरसाईं। उन्हें दोनों ओर आधा किलोमीटर दूर तक खदेड़ दिया।
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युवाओं को दौड़ाने के समय सीएम लखनऊ जाने की तैयारी में थे, लेकिन उच्च अधिकारियों ने दस मिनट तक उन्हें सरकिट हाउस में रोके रखा। बाहर सब कुछ सामान्य होने के बाद ही सीएम की गाड़ियों का काफिला पुलिस लाइन पहुंचा और वहां से वह हेलीकाप्टर से लखनऊ के लिए रवाना हुए।
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यह है बीटीसी प्रशिक्षुओं की मांग
2013 बैच के 12460 बीटीसी प्रशिक्षुओं को 16 दिसंबर 2016 को शासनादेश जारी कराके नियुुक्ति प्रक्रिया शुरू कराई गई थी। सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर उन्हें 31 मार्च 2017 को स्कूलों में कार्यभार ग्रहण करना था लेकिन प्रदेश सरकार ने 23 मार्च को एक आदेश जारी करके अग्रिम आदेशों तक के लिए नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इस रोक को हटवाने के लिए यह बीटीसी प्रशिक्षु सीएम से मिलने के लिए इलाहाबाद में समय मांग रहे थे।
‘सीएम की समीक्षा के दौरान शव को लेकर सरकिट हाउस के गेट तक लाना और सड़क पर रखना गंभीर मामला है। जिसकी विभागीय जांच कराई जा रही है। यह गंभीर मामला है कि एंबुुलेंस से शव निकाल कर सड़क पर रख दिया गया। उस स्थान पर तैनात पुलिस बल की लापरवाही रही है, जिसकी विभागीय जांच कराई जा रही है।’ -आनंद कुलकर्णी, एसएसपी