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लहराई अनी अखाड़ों की धर्मध्वजाएं
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योगी ने अनी अखाड़ों में लहराई धर्मध्वजा
0 सबसे पहले दिगंबर, फिर निर्वाणी अनी और अंत में निर्मोही अनी अखाड़े में पहुंचे सीएम
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को संगम की रेती पर तीनों अनी अखाड़ों पंचनिर्मोही अनी अखाड़ा, पंचनिर्वाणी अनी अखाड़ा और पंचदिगंबर अनी अखाड़े में धर्मध्वजा लहराई। सबसे पहले उन्होंने दिगंबर अनी अखाड़े में पहुंचकर पंचरंगा धर्मध्वजा, फिर निर्वाणी अनी अखाड़े में लाल रंग की धर्मध्वजा और सबसे अंत में निर्मोही अनी ने श्वेत रंग की धर्मध्वजा सहित सभी तीनों का ध्वजारोहण किया। तीनों ही धर्मध्वजाओं में शीर्ष पर मोरपंख लगे रहे।
पंचनिर्वाणी अनी अखाड़े में पुरोहित अयोध्या प्रसाद शास्त्री के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीमहंत धर्मदास और मुख्यमंत्री योगी ने गंगाजल से संकल्प और हनुमानजी का पूजन किया। फिर हनुमानजी के जयकारों के बीच डोरी खींचकर मुख्यमंत्री ने धर्मध्वजा फहराई। पंचनिर्मोही अनी में श्रीमहंत राजेंद्र दास, श्रीमहंत रामजी दास, पंचनिर्वाणी अनी अखाड़े में श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत मोहन दास और पंचदिगंबर अनी में श्रीमहंत कृष्ण दास, श्रीमहंत रामकिशोर दास ने माल्यार्पण करके उनका स्वागत किया। अखाड़े के अन्य संतों ने भी सीएम को माल्यार्पण किया। पूजन और धर्मध्वजारोहण में वैष्णव अखाड़ों के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, उपाध्यक्ष महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री सहित अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधि और खालसों के संत मौजूद थे।
पहले ही स्थापित थे ध्वजदंड
तीनों अनी अखाड़ों में मुख्यमंत्री योगी को ही धर्मध्वजा लहरानी थी, ऐसे में तीनों अनी अखाड़ों में ध्वजदंड की स्थापना पहले ही कर ली गई थी। शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन के बाद सीएम योगी ने नारियल फोड़ा और फिर डोरी खींचकर ध्वजाएं फहराईं।
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गौरवशाली है अनी अखाड़ों की परंपरा
दिगंबर अनी अखाड़े की स्थापना स्वामी बालांनद ने 15वीं सदी में की थी। अखाड़े के साधु-महात्मा राम, कृष्ण, अंबा, गणेश सूर्य आदि के उपासक हैं। वैष्णव परंपरा के प्रचार प्रसार में समर्पित दिगंबर अनी के संत कुंभ में रामनाम की अलख जगाएंगे। श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़ा की स्थापना बालानंद ने की थी। इसके इष्टदेव हनुमान जी हैं। इसमें शामिल सभी छह अखाड़े भगवान राम केनाम का गुणगान करते हैं। वहीं निर्मोही अनी अखाड़ा के संत श्रीहरि विष्णु के उपासक हैं। इनके साधक भगवान राम और कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं। इसका मुख्यालय वृंदावन में हैं।
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0 सबसे पहले दिगंबर, फिर निर्वाणी अनी और अंत में निर्मोही अनी अखाड़े में पहुंचे सीएम
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को संगम की रेती पर तीनों अनी अखाड़ों पंचनिर्मोही अनी अखाड़ा, पंचनिर्वाणी अनी अखाड़ा और पंचदिगंबर अनी अखाड़े में धर्मध्वजा लहराई। सबसे पहले उन्होंने दिगंबर अनी अखाड़े में पहुंचकर पंचरंगा धर्मध्वजा, फिर निर्वाणी अनी अखाड़े में लाल रंग की धर्मध्वजा और सबसे अंत में निर्मोही अनी ने श्वेत रंग की धर्मध्वजा सहित सभी तीनों का ध्वजारोहण किया। तीनों ही धर्मध्वजाओं में शीर्ष पर मोरपंख लगे रहे।
पंचनिर्वाणी अनी अखाड़े में पुरोहित अयोध्या प्रसाद शास्त्री के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीमहंत धर्मदास और मुख्यमंत्री योगी ने गंगाजल से संकल्प और हनुमानजी का पूजन किया। फिर हनुमानजी के जयकारों के बीच डोरी खींचकर मुख्यमंत्री ने धर्मध्वजा फहराई। पंचनिर्मोही अनी में श्रीमहंत राजेंद्र दास, श्रीमहंत रामजी दास, पंचनिर्वाणी अनी अखाड़े में श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत मोहन दास और पंचदिगंबर अनी में श्रीमहंत कृष्ण दास, श्रीमहंत रामकिशोर दास ने माल्यार्पण करके उनका स्वागत किया। अखाड़े के अन्य संतों ने भी सीएम को माल्यार्पण किया। पूजन और धर्मध्वजारोहण में वैष्णव अखाड़ों के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, उपाध्यक्ष महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री सहित अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधि और खालसों के संत मौजूद थे।
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पहले ही स्थापित थे ध्वजदंड
तीनों अनी अखाड़ों में मुख्यमंत्री योगी को ही धर्मध्वजा लहरानी थी, ऐसे में तीनों अनी अखाड़ों में ध्वजदंड की स्थापना पहले ही कर ली गई थी। शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन के बाद सीएम योगी ने नारियल फोड़ा और फिर डोरी खींचकर ध्वजाएं फहराईं।
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गौरवशाली है अनी अखाड़ों की परंपरा
दिगंबर अनी अखाड़े की स्थापना स्वामी बालांनद ने 15वीं सदी में की थी। अखाड़े के साधु-महात्मा राम, कृष्ण, अंबा, गणेश सूर्य आदि के उपासक हैं। वैष्णव परंपरा के प्रचार प्रसार में समर्पित दिगंबर अनी के संत कुंभ में रामनाम की अलख जगाएंगे। श्रीपंच निर्वाणी अनी अखाड़ा की स्थापना बालानंद ने की थी। इसके इष्टदेव हनुमान जी हैं। इसमें शामिल सभी छह अखाड़े भगवान राम केनाम का गुणगान करते हैं। वहीं निर्मोही अनी अखाड़ा के संत श्रीहरि विष्णु के उपासक हैं। इनके साधक भगवान राम और कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं। इसका मुख्यालय वृंदावन में हैं।