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दो घंटे ठप रहा इलाज, मचा हाहाकार
Updated Tue, 21 Aug 2018 02:12 AM IST
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दो घंटे ठप रहा इलाज, मचा हाहाकार
- कमला नेहरू अस्पताल में भर्ती मरीज भी हुए परेशान
- भर्ती होने आए दर्जनों मरीज गेट से ही लौटाए गए
इलाहाबाद। कमला नेहरू अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हुआ हंगामा और नर्सों संग कर्मचारियों की हड़ताल भर्ती मरीजों पर भी भारी पड़ी। दो घंटे इलाज ठप रहने से अस्पताल में हाहाकार मच गया। दूर-दूर से भर्ती होने आए दर्जनों मरीजों को गेट से ही वापस कर दिया गया। इन्हीं में शामिल मरीज थरवई के शिवचरण की भी जान चली गई। कमला नेहरू जैसे अस्पताल में कर्मचारियों की इस संवेदनहीन रवैये पर मरीजों और तीमारदारों का गुस्सा हर पल बढ़ता ही रहा।
इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने वाले मरीज के तीमारदारों का आरोप रहा कि नर्स ने बार-बार बुलाने पर भी दवा नहीं दी। कैंसर के मरीजों को दवा की खुराक अमूमन डॉक्टरों के निर्देश पर नर्सें ही देती हैं। ऐसे में तीमारदारों का आक्रोशित होना स्वाभाविक था, लेकिन मरीज की मौत के बाद मारपीट और तोड़फोड़ की घटना ने काम के बोझ से दबे अस्पताल की नर्सों और कर्मचारियों को हड़ताल का मौका दे दिया।
नर्सों के काम न करने और कर्मचारियों के अस्पताल का गेट बंद कर देने से भीतर भर्ती मरीज और बाहर इलाज कराने आए मरीज परेशान हो गए। मौके पर जुटी भीड़ का गुस्सा तब बढ़ गया, जब शहडोल से आई एक बुजुर्ग महिला रमदेई गेट पर ही दर्द से तड़पने लगी। दो बजे से शाम चार बजे तक इलाज न मिलने के कारण एक नहीं दर्जनों मरीज तुरंत उपचार न मिलने से लौट गए। इस बीच गेट बंद होने से पहले अस्पताल परिसर में पिता शिवचरण को लेकर आए बेटे मनीष की मानें तो डॉक्टरों ने उनके पिता ने देखा तक नहीं। सामने खड़े डॉक्टरों से वह और परिवार के लोग गिड़गिड़ाते रहे लेकिन वे नहीं पसीजे। इस बीच इलाज न मिलने से गंभीर हालत में शिवचरण की सांस उखड़ गई। दो घंटे तक अस्पताल में हाहाकार मचा रहा।
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- कमला नेहरू अस्पताल में भर्ती मरीज भी हुए परेशान
- भर्ती होने आए दर्जनों मरीज गेट से ही लौटाए गए
इलाहाबाद। कमला नेहरू अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हुआ हंगामा और नर्सों संग कर्मचारियों की हड़ताल भर्ती मरीजों पर भी भारी पड़ी। दो घंटे इलाज ठप रहने से अस्पताल में हाहाकार मच गया। दूर-दूर से भर्ती होने आए दर्जनों मरीजों को गेट से ही वापस कर दिया गया। इन्हीं में शामिल मरीज थरवई के शिवचरण की भी जान चली गई। कमला नेहरू जैसे अस्पताल में कर्मचारियों की इस संवेदनहीन रवैये पर मरीजों और तीमारदारों का गुस्सा हर पल बढ़ता ही रहा।
इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करने वाले मरीज के तीमारदारों का आरोप रहा कि नर्स ने बार-बार बुलाने पर भी दवा नहीं दी। कैंसर के मरीजों को दवा की खुराक अमूमन डॉक्टरों के निर्देश पर नर्सें ही देती हैं। ऐसे में तीमारदारों का आक्रोशित होना स्वाभाविक था, लेकिन मरीज की मौत के बाद मारपीट और तोड़फोड़ की घटना ने काम के बोझ से दबे अस्पताल की नर्सों और कर्मचारियों को हड़ताल का मौका दे दिया।
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नर्सों के काम न करने और कर्मचारियों के अस्पताल का गेट बंद कर देने से भीतर भर्ती मरीज और बाहर इलाज कराने आए मरीज परेशान हो गए। मौके पर जुटी भीड़ का गुस्सा तब बढ़ गया, जब शहडोल से आई एक बुजुर्ग महिला रमदेई गेट पर ही दर्द से तड़पने लगी। दो बजे से शाम चार बजे तक इलाज न मिलने के कारण एक नहीं दर्जनों मरीज तुरंत उपचार न मिलने से लौट गए। इस बीच गेट बंद होने से पहले अस्पताल परिसर में पिता शिवचरण को लेकर आए बेटे मनीष की मानें तो डॉक्टरों ने उनके पिता ने देखा तक नहीं। सामने खड़े डॉक्टरों से वह और परिवार के लोग गिड़गिड़ाते रहे लेकिन वे नहीं पसीजे। इस बीच इलाज न मिलने से गंभीर हालत में शिवचरण की सांस उखड़ गई। दो घंटे तक अस्पताल में हाहाकार मचा रहा।
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