{"_id":"5a4fac314f1c1bfe7a8b55d6","slug":"141515170865-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पॉलिसी का गलत भुगतान कराने वाले एजेंट को राहत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पॉलिसी का गलत भुगतान कराने वाले एजेंट को राहत नहीं
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:17 PM IST
विज्ञापन
पॉलिसी का गलत भुगतान कराने वाले एजेंट को राहत नहीं
मृतक व्यक्ति को स्वस्थ बताकर करा दिया बीमा राशि का भुगतान
इलाहाबाद। बीमा पॉलिसी का गलत दावा भुगतान कराने वाले बीमा एजेंट को राहत देने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है। कोर्ट ने एजेंट पर लगाए गए जुर्माने को सही करार दिया है। बीमा एजेंट पर आरोप है कि उसने गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे स्वस्थ्य बताकर बीमा राशि का भुगतान करवा दिया। कोर्ट ने कहा कि एजेंट ने समाप्त हो चुकी पॉलिसी को पुनर्जिवित कर दावा का भुगतान कराने में भूमिका निभाई है इसलिए राहत पाने का हकदार नहीं है।
एलआईसी एजेंट रामेश्वर वर्मा की याचिका पर न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति इफाकत अली खां की पीठ ने सुनवाई की। बीमा कंपनी के वकील का कहना था कि याची ने गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को मेडिकल जांच में स्वस्थ्य घोषित कराया। इस आधार पर उसकी पॉलिसी पुनर्जिवित करा ली। इसके बाद उसकी अचानक मौत दिखाकर पॉलिसी की रकम का भुगतान करा लिया। बीमा धारक गिरीश चंद्र शुक्ल को स्वस्थ्य घोषित कराने में वह स्वयं गवाह भी बना। पूर्व में पॉलिसी किश्त जमा न होने के कारण समाप्त घोषित कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि बीमा पॉलिसी के तहत एजेंट का दायित्व है कि उचित जांच करे। मगर उसने सही तरीके से काम नहीं किया। इसलिए याचिका में हस्तक्षेप का औचित्य नहीं है।
विज्ञापन
मृतक व्यक्ति को स्वस्थ बताकर करा दिया बीमा राशि का भुगतान
इलाहाबाद। बीमा पॉलिसी का गलत दावा भुगतान कराने वाले बीमा एजेंट को राहत देने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है। कोर्ट ने एजेंट पर लगाए गए जुर्माने को सही करार दिया है। बीमा एजेंट पर आरोप है कि उसने गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसे स्वस्थ्य बताकर बीमा राशि का भुगतान करवा दिया। कोर्ट ने कहा कि एजेंट ने समाप्त हो चुकी पॉलिसी को पुनर्जिवित कर दावा का भुगतान कराने में भूमिका निभाई है इसलिए राहत पाने का हकदार नहीं है।
एलआईसी एजेंट रामेश्वर वर्मा की याचिका पर न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति इफाकत अली खां की पीठ ने सुनवाई की। बीमा कंपनी के वकील का कहना था कि याची ने गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को मेडिकल जांच में स्वस्थ्य घोषित कराया। इस आधार पर उसकी पॉलिसी पुनर्जिवित करा ली। इसके बाद उसकी अचानक मौत दिखाकर पॉलिसी की रकम का भुगतान करा लिया। बीमा धारक गिरीश चंद्र शुक्ल को स्वस्थ्य घोषित कराने में वह स्वयं गवाह भी बना। पूर्व में पॉलिसी किश्त जमा न होने के कारण समाप्त घोषित कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि बीमा पॉलिसी के तहत एजेंट का दायित्व है कि उचित जांच करे। मगर उसने सही तरीके से काम नहीं किया। इसलिए याचिका में हस्तक्षेप का औचित्य नहीं है।
विज्ञापन