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बिजली विभाग कर्मी से 36 लाख की वसूली पर रोक
Updated Mon, 06 Nov 2017 09:46 PM IST
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बिजलीकर्मी से 36 लाख की वसूली पर रोक
0 हाईकोर्ट ने विभाग को नए सिरे से जांच करने की दी छूट
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने अधिशासी अभियंता पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम गाजीपुर में तैनात लिपिक बृज बाला राय के खिलाफ 36 लाख 62 हजार 243 रुपये की वसूली करने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी है। वसूली आदेश जारी करने से पूर्व विभाग ने कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया, जिसे हाईकोर्ट ने नैसर्गिक न्याय के विपरीत मानते हुए वसूली आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विभाग को छूट दी है कि वह नए सिरे से नियमानुसार मामले की जांच कर सकता है।
बृज बाला पर आरोप है कि उसे वसूली के लिए जारी 38 रसीदों पर उसके द्वारा की गई वसूली की राशि जमा नहीं की गई। याची का कहना था कि उसे कभी भी रसीद नहीं दी गई। रसीदों पर उसका फर्जी हस्ताक्षर बनाकर घपला किया गया। न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने याचिका स्वीकार करते हुए वसूली आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची को दो सप्ताह में संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। जरूरत हो तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है। याची दो सप्ताह में उसका जवाब दाखिल करेगा और जवाब मिलने के बाद विभाग चार सप्ताह में कारण सहित आदेश पारित करेगा। कोर्ट ने याची का बकाया वेतन भुगतान करने का आदेश भी दिया है।
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0 हाईकोर्ट ने विभाग को नए सिरे से जांच करने की दी छूट
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने अधिशासी अभियंता पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम गाजीपुर में तैनात लिपिक बृज बाला राय के खिलाफ 36 लाख 62 हजार 243 रुपये की वसूली करने संबंधी आदेश पर रोक लगा दी है। वसूली आदेश जारी करने से पूर्व विभाग ने कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया, जिसे हाईकोर्ट ने नैसर्गिक न्याय के विपरीत मानते हुए वसूली आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विभाग को छूट दी है कि वह नए सिरे से नियमानुसार मामले की जांच कर सकता है।
बृज बाला पर आरोप है कि उसे वसूली के लिए जारी 38 रसीदों पर उसके द्वारा की गई वसूली की राशि जमा नहीं की गई। याची का कहना था कि उसे कभी भी रसीद नहीं दी गई। रसीदों पर उसका फर्जी हस्ताक्षर बनाकर घपला किया गया। न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने याचिका स्वीकार करते हुए वसूली आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची को दो सप्ताह में संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। जरूरत हो तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है। याची दो सप्ताह में उसका जवाब दाखिल करेगा और जवाब मिलने के बाद विभाग चार सप्ताह में कारण सहित आदेश पारित करेगा। कोर्ट ने याची का बकाया वेतन भुगतान करने का आदेश भी दिया है।
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