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डीएम इलाहाबाद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही समाप्त
Updated Sat, 29 Sep 2018 08:44 PM IST
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डीएम इलाहाबाद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही समाप्त
0 अवमानना अदालत को केस की मेरिट पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इलाहाबाद के जिलाधिकारी सुहास एलवाई के लिए अवमानना अदालत द्वारा जारी आदेश रद्द करते हुए अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी है। डीएम ने अवमानना मामलों की सुनवाई कर रही एकल न्यायपीठ के आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी थी। अपील पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति डीके सिंह की पीठ ने सुनवाई की।
अवमानना कोर्ट ने 28 मई 2018 को आदेश में डीएम सुहास एलवाई से हाईकोर्ट के 17 अप्रैल 2017 के आदेश का अनुपालन न करने पर व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था। अवमानना याचिका तौलन सिंह उर्फ विजय बहादुर सिंह की ओर से दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया कि 17 अप्रैल के आदेश में हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को सरप्लस लैंड एडीए को स्थानांतरित करने के मामले में याची के प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के लिए कहा था। डीएम ने याची का प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया, जिससे कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है।
डीएम का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि हाईकोर्ट ने डीएम को प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के लिए कहा था, जिस पर उन्होंने 23 जनवरी 2018 को संबंधित रिकार्ड की अवलोकन करने के बाद प्रत्यावेदन पर निर्णय लेते हुए याची का दावा खारिज कर दिया। अवमानना कोर्ट के पुन: आदेश पर डीएम ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर संबंधित मामले पर रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी की रिपोर्ट में भी याची का दावा बेबुनियाद पाया गया। अधिवक्ता का कहना था कि डीएम ने रिट कोर्ट के आदेश का पालन कर दिया, इसलिए अवमानना की कार्यवाही का आधार नहीं है। अवमानना अदालत को केस की मेरिट देखने का क्षेत्राधिकार नहीं है। कोर्ट ने दलील स्वीकार करते हुए कहा कि अवमानना कोर्ट को केस की मेरिट पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। प्रत्यावेदन का निस्तारण कर डीएम ने आदेश का अनुपालन कर दिया है।
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0 अवमानना अदालत को केस की मेरिट पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इलाहाबाद के जिलाधिकारी सुहास एलवाई के लिए अवमानना अदालत द्वारा जारी आदेश रद्द करते हुए अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी है। डीएम ने अवमानना मामलों की सुनवाई कर रही एकल न्यायपीठ के आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी थी। अपील पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति डीके सिंह की पीठ ने सुनवाई की।
अवमानना कोर्ट ने 28 मई 2018 को आदेश में डीएम सुहास एलवाई से हाईकोर्ट के 17 अप्रैल 2017 के आदेश का अनुपालन न करने पर व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था। अवमानना याचिका तौलन सिंह उर्फ विजय बहादुर सिंह की ओर से दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया कि 17 अप्रैल के आदेश में हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को सरप्लस लैंड एडीए को स्थानांतरित करने के मामले में याची के प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के लिए कहा था। डीएम ने याची का प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया, जिससे कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है।
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डीएम का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि हाईकोर्ट ने डीएम को प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के लिए कहा था, जिस पर उन्होंने 23 जनवरी 2018 को संबंधित रिकार्ड की अवलोकन करने के बाद प्रत्यावेदन पर निर्णय लेते हुए याची का दावा खारिज कर दिया। अवमानना कोर्ट के पुन: आदेश पर डीएम ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर संबंधित मामले पर रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी की रिपोर्ट में भी याची का दावा बेबुनियाद पाया गया। अधिवक्ता का कहना था कि डीएम ने रिट कोर्ट के आदेश का पालन कर दिया, इसलिए अवमानना की कार्यवाही का आधार नहीं है। अवमानना अदालत को केस की मेरिट देखने का क्षेत्राधिकार नहीं है। कोर्ट ने दलील स्वीकार करते हुए कहा कि अवमानना कोर्ट को केस की मेरिट पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। प्रत्यावेदन का निस्तारण कर डीएम ने आदेश का अनुपालन कर दिया है।
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