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रेलवे को प्रयोगशाला न बनाए सरकार : राघवैय्या
Updated Wed, 01 Nov 2017 09:46 PM IST
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रेलवे को प्रयोगशाला न बनाए सरकार : राघवैय्या
एनएफआईआर के महासचिव ने कहा कि सरकार वापस ले न्यू पेंशन स्कीम
इलाहाबाद में तीन नवंबर तक चलेगी फेडरेशन की वर्किंग कमेटी की बैठक
इलाहाबाद। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआईआर) के महासचिव डा. एम राघवैय्या ने बुधवार को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। कहा कि केंद्र सरकार ने रेलवे को प्रयोगशाला बना दिया है। आए दिन कोई न कोई प्रयोग रेलवे के साथ किया गया जा रहा है। सरकार एक ओर जहां मेक इन इंडिया की बात कर रही है तो वहीं दूसरी ओर स्पेन की ट्रेन टेल्गो आदि का भी ट्रायल ले चुकी है। अगर मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना है तो विदेशी ट्रेनों का देश में ट्रायल क्यों लिया जा रहा है। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, फिर भी रेलवे के तमाम बड़े प्रोजेक्ट में बाहर से इंजीनियर क्यों बुलाए जा रहे हैं।
इलाहाबाद में एनएफआईआर की वर्किंग कमेटी की बैठक में शिरकत करने के लिए पहुंचे डा. राघवैय्या ने रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित एक होटल में संवाददाताओं से हुई बातचीत में कहा कि हमारा सिस्टम विदेशी कंपनियों के हाथों में जा रहा है। वाराणसी स्थित डीजल इंजन रेल कारखाना जो उन्नत किस्म के इंजन बनाता है उसकी उपेक्षा की जा रही है। सरकार चाहे तो डीएलडब्ल्यू को पहले से ज्यादा विकसित कर वहां निर्मित डीजल इंजनों की सप्लाई पड़ोसी देशों को कर सकती है। इससे मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा। डा. राघवैय्या ने कहा कि फेडरेशन सरकार को सौ प्रतिशत सहयोग देने को तैयार है लेकिन पॉलिसी बनाने के पहले यूनियन को भी जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय देश में 2.30 लाख पद सिर्फ रेलवे में ही रिक्त हैं। इसमें 1.60 लाख पद संरक्षा श्रेणी के हैं। सरकार नई लाइन, नये स्टेशन तो बना रही है लेकिन रेलकर्मियों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। इसके पूर्व फेडरेशन के अध्यक्ष गुमान सिंह ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ऐसी परिस्थिति पैदा कर रही है जिससे रेल निजी हाथों में चली जाए। लेकिन रेलकर्मी ऐसा नहीं होने देंगे। इस अवसर पर नार्थ सेंट्रल रेलवे इंपलाइज संघ (एनसीआरईएस) के महामंत्री आरपी सिंह ने वर्किंग कमेटी की बैठक में रखे जाने वाले बिंदुओं की जानकारी दी।
समझौते के बावजूद इन 11 मांगों पर विचार नहीं कर रहा है रेलवे
0 रेलवे में एसएसई एव अन्य निरीक्षक/सुपरवाइजर के छठे वेतन आयोग के ग्रेड पे =4600 को ग्रेड पे 4800 करना।
0 लोको पायलट के छठे वेतन आयोग के ग्रेड पे 4200 को ग्र्रेड पे 4600 में करना।
0 रेलवे में टेकभनीशियन टू को टेकभनीशियन वन में मर्ज करना।
0 लोको इंसपेक्टर को स्टेपिंग अप का लाभ दिया जाना।
0 ग्रुप सी के अपेक्स लेवल के 3335 पदों को ग्रुप बी गजटेड में अपग्रेड करना।
0 रेलवे में ट्रेनिंग पूरी कर चुके एक्ट अप्रेटिंसों को समाहित करना।
0 गेट कीपर एवं अन्य की 12 घंटे की ड्यूटी को आठ घंटे की किया जाना।
0 विभिन्न कैटेगरी के रिक्त पदों को भरना एवं नये पदों का सृजन करना।
0 रेलवे के क्वासी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ को नियमित करना।
0 सिगनल विभाग के वरिष्ठ टेकभनीशियन को जेई सिगनल में मर्ज करना।
0 ट्रैक मेंटेनर कैटेगरी को छठे वेतन आयोग के ग्रेड पे 2800, 2400, 1900, 1800 दिया जाना।
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एनएफआईआर के महासचिव ने कहा कि सरकार वापस ले न्यू पेंशन स्कीम
इलाहाबाद में तीन नवंबर तक चलेगी फेडरेशन की वर्किंग कमेटी की बैठक
इलाहाबाद। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (एनएफआईआर) के महासचिव डा. एम राघवैय्या ने बुधवार को केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। कहा कि केंद्र सरकार ने रेलवे को प्रयोगशाला बना दिया है। आए दिन कोई न कोई प्रयोग रेलवे के साथ किया गया जा रहा है। सरकार एक ओर जहां मेक इन इंडिया की बात कर रही है तो वहीं दूसरी ओर स्पेन की ट्रेन टेल्गो आदि का भी ट्रायल ले चुकी है। अगर मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना है तो विदेशी ट्रेनों का देश में ट्रायल क्यों लिया जा रहा है। देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, फिर भी रेलवे के तमाम बड़े प्रोजेक्ट में बाहर से इंजीनियर क्यों बुलाए जा रहे हैं।
इलाहाबाद में एनएफआईआर की वर्किंग कमेटी की बैठक में शिरकत करने के लिए पहुंचे डा. राघवैय्या ने रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित एक होटल में संवाददाताओं से हुई बातचीत में कहा कि हमारा सिस्टम विदेशी कंपनियों के हाथों में जा रहा है। वाराणसी स्थित डीजल इंजन रेल कारखाना जो उन्नत किस्म के इंजन बनाता है उसकी उपेक्षा की जा रही है। सरकार चाहे तो डीएलडब्ल्यू को पहले से ज्यादा विकसित कर वहां निर्मित डीजल इंजनों की सप्लाई पड़ोसी देशों को कर सकती है। इससे मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा। डा. राघवैय्या ने कहा कि फेडरेशन सरकार को सौ प्रतिशत सहयोग देने को तैयार है लेकिन पॉलिसी बनाने के पहले यूनियन को भी जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय देश में 2.30 लाख पद सिर्फ रेलवे में ही रिक्त हैं। इसमें 1.60 लाख पद संरक्षा श्रेणी के हैं। सरकार नई लाइन, नये स्टेशन तो बना रही है लेकिन रेलकर्मियों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। इसके पूर्व फेडरेशन के अध्यक्ष गुमान सिंह ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ऐसी परिस्थिति पैदा कर रही है जिससे रेल निजी हाथों में चली जाए। लेकिन रेलकर्मी ऐसा नहीं होने देंगे। इस अवसर पर नार्थ सेंट्रल रेलवे इंपलाइज संघ (एनसीआरईएस) के महामंत्री आरपी सिंह ने वर्किंग कमेटी की बैठक में रखे जाने वाले बिंदुओं की जानकारी दी।
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समझौते के बावजूद इन 11 मांगों पर विचार नहीं कर रहा है रेलवे
0 रेलवे में एसएसई एव अन्य निरीक्षक/सुपरवाइजर के छठे वेतन आयोग के ग्रेड पे =4600 को ग्रेड पे 4800 करना।
0 लोको पायलट के छठे वेतन आयोग के ग्रेड पे 4200 को ग्र्रेड पे 4600 में करना।
0 रेलवे में टेकभनीशियन टू को टेकभनीशियन वन में मर्ज करना।
0 लोको इंसपेक्टर को स्टेपिंग अप का लाभ दिया जाना।
0 ग्रुप सी के अपेक्स लेवल के 3335 पदों को ग्रुप बी गजटेड में अपग्रेड करना।
0 रेलवे में ट्रेनिंग पूरी कर चुके एक्ट अप्रेटिंसों को समाहित करना।
0 गेट कीपर एवं अन्य की 12 घंटे की ड्यूटी को आठ घंटे की किया जाना।
0 विभिन्न कैटेगरी के रिक्त पदों को भरना एवं नये पदों का सृजन करना।
0 रेलवे के क्वासी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ को नियमित करना।
0 सिगनल विभाग के वरिष्ठ टेकभनीशियन को जेई सिगनल में मर्ज करना।
0 ट्रैक मेंटेनर कैटेगरी को छठे वेतन आयोग के ग्रेड पे 2800, 2400, 1900, 1800 दिया जाना।