{"_id":"598b26bc4f1c1bf0548b465f","slug":"131502291644-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वविवाह पंजीकरण नियमावली लागू करने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वविवाह पंजीकरण नियमावली लागू करने का आदेश
Updated Wed, 09 Aug 2017 08:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसी माह विवाह पंजीकरण नियमावली लागू करे सरकार
0 हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को दिया निर्देश, 21 अगस्त को होगी सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि विवाह पंजीकरण नियमावली 2017 इसी माह में लागू कर दी जाए। प्रदेश में अभी तक यह नियमावली लागू नहीं होने से वैवाहिक मामलों में खासी दिक्कत आ रही है और हाईकोर्ट में याचिकाओं की बाढ़ आ गई है। विशेषकर परिवार वालों की मर्जी के विरुद्ध विवाह करने वाले जोड़ों के सामने इस प्रकार की दिक्कतें अधिक आ रही हैं। प्रदेश सरकार कर कहना है कि नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और अनुमोदन के लिए राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। राज्यपाल से अनुमोदन प्राप्त होते ही अधिसूचना जारी की जाएगी।
अपनी मर्जी से शादी करने वाले एक जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अपनी मर्जी से विवाह करने वाले जोड़े बड़ी संख्या में हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर संरक्षण की मांग करते हैं। कानूनन किसी भी बालिग युवक-युवती को अपनी मर्जी से शादी करने का अधिकार है। सुप्रीमकोर्ट ने भी कहा है कि माता-पिता यदि ऐसे विवाह से सहमत नहीं है तो उनके पास एकमात्र उपाय है कि वह अपने बेटे या बेटी का सामाजिक रूप से बहिष्कार करें। उनको प्रताड़ित करने या ऑनर किलिंग जैसा कदम उठाने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद यह आदेश विवाह को सत्यापित नहीं करते हैं।
विवाह की वैधता के लिए हिंदू विवाह अधिनियम या स्पेशल मैरिज एक्ट में पंजीकरण होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने 2014 में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि अनिवार्य विवाह पंजीकरण नियमावली 2014 लागू की जाए। सरकार ने भी आश्वासन दिया था कि नियमावली तैयार है और उसमें आवश्यक संशोधन के साथ शीघ्र ही लागू कर दिया जाएगा। 2015 में सुप्रीमकोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि अपने यहां विवाह पंजीकरण नियमावली लागू करें। इसके बावजूद आज तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी और स्थायी अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया कि विवाह पंजीकरण नियमावली 2017 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसे राज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया है। कोर्ट ने कहा कि 21 अगस्त से पहले नियमावली लागू कर दी जाए। मामले पर अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
0 हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को दिया निर्देश, 21 अगस्त को होगी सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि विवाह पंजीकरण नियमावली 2017 इसी माह में लागू कर दी जाए। प्रदेश में अभी तक यह नियमावली लागू नहीं होने से वैवाहिक मामलों में खासी दिक्कत आ रही है और हाईकोर्ट में याचिकाओं की बाढ़ आ गई है। विशेषकर परिवार वालों की मर्जी के विरुद्ध विवाह करने वाले जोड़ों के सामने इस प्रकार की दिक्कतें अधिक आ रही हैं। प्रदेश सरकार कर कहना है कि नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और अनुमोदन के लिए राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। राज्यपाल से अनुमोदन प्राप्त होते ही अधिसूचना जारी की जाएगी।
अपनी मर्जी से शादी करने वाले एक जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अपनी मर्जी से विवाह करने वाले जोड़े बड़ी संख्या में हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर संरक्षण की मांग करते हैं। कानूनन किसी भी बालिग युवक-युवती को अपनी मर्जी से शादी करने का अधिकार है। सुप्रीमकोर्ट ने भी कहा है कि माता-पिता यदि ऐसे विवाह से सहमत नहीं है तो उनके पास एकमात्र उपाय है कि वह अपने बेटे या बेटी का सामाजिक रूप से बहिष्कार करें। उनको प्रताड़ित करने या ऑनर किलिंग जैसा कदम उठाने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद यह आदेश विवाह को सत्यापित नहीं करते हैं।
विज्ञापन
विवाह की वैधता के लिए हिंदू विवाह अधिनियम या स्पेशल मैरिज एक्ट में पंजीकरण होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने 2014 में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि अनिवार्य विवाह पंजीकरण नियमावली 2014 लागू की जाए। सरकार ने भी आश्वासन दिया था कि नियमावली तैयार है और उसमें आवश्यक संशोधन के साथ शीघ्र ही लागू कर दिया जाएगा। 2015 में सुप्रीमकोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि अपने यहां विवाह पंजीकरण नियमावली लागू करें। इसके बावजूद आज तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी और स्थायी अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कोर्ट को बताया कि विवाह पंजीकरण नियमावली 2017 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसे राज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया है। कोर्ट ने कहा कि 21 अगस्त से पहले नियमावली लागू कर दी जाए। मामले पर अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
विज्ञापन