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पटरी दुकानदारों को हटाने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Updated Wed, 07 Jun 2017 10:15 PM IST
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इलाहाबाद। सिविल लाइंस और अन्य इलाकों से रोड पटरियों पर दुकान लगाने वाले वेंडर्स को हटाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त, एडीए उपाध्यक्ष और एसएसपी इलाहाबाद से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इन अधिकारियों को आठ जून बृहस्पतिवार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। रेखा सिंह की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की अध्यक्षता वाली अवकाश कालीन पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता अंशुल निगम का कहना था कि नगर निगम और एडीए पुलिस की मदद से सिविल लाइंस और आसपास के क्षेत्रों में रोड पटरी के दुकानदारों को भगा रहे हैं। इतना ही नहीं उनका सामान जब्त कर लिया जा रहा है और गुमटियां आदि ध्वस्त की जा रही हैं। अपने दावे के समर्थन में अमर उजाला समाचार पत्र में प्रकाशित ध्वस्तीकरण संबंधी समाचार भी याचिका के साथ संलग्न किए हैं। अधिवक्ता का कहना है कि पूरी कार्रवाई स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 और 2016 में बने रूल्स का उल्लंघन है।
कार्रवाई करने से पहले एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार पटरी दुकानदारों को हटाने से तीन दिन पूर्व उनको नोटिस दिया जाना चाहिए। हटाए गए सामान की सूची तैयार की जानी चाहिए ताकि दुकानदारों को कोई नुकसान न हो। एक्ट में सामान जब्त करने का प्रावधान नहीं है मगर इसके बावजूद सामान जब्त किए जा रहे हैं।
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याचिका में कहा गया है कि सितंबर 2016 में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के तहत बनी नियमावली लागू कर दी गई है। इसके बाद एक सर्वे भी कराया गया और ठेले वालों को रसीद भी दी गई थी। नियमानुसार बिना सर्वे कराए किसी को हटाया नहीं जा सकता है। एक्ट में स्ट्रीट वेंडिंग जोन तय करके वहां पटरी दुकानदारों को स्थान देने का भी प्रावधान है मगर अभी तक ऐसा कोई जोन तय नहीं किया गया है। याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।
पटरी दुकानदारोें को हटाने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
0 स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का पालन नहीं करने पर जनहित याचिका दाखिल
अमर उजाला ब्यूरो
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याची के अधिवक्ता अंशुल निगम का कहना था कि नगर निगम और एडीए पुलिस की मदद से सिविल लाइंस और आसपास के क्षेत्रों में रोड पटरी के दुकानदारों को भगा रहे हैं। इतना ही नहीं उनका सामान जब्त कर लिया जा रहा है और गुमटियां आदि ध्वस्त की जा रही हैं। अपने दावे के समर्थन में अमर उजाला समाचार पत्र में प्रकाशित ध्वस्तीकरण संबंधी समाचार भी याचिका के साथ संलग्न किए हैं। अधिवक्ता का कहना है कि पूरी कार्रवाई स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 और 2016 में बने रूल्स का उल्लंघन है।
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कार्रवाई करने से पहले एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार पटरी दुकानदारों को हटाने से तीन दिन पूर्व उनको नोटिस दिया जाना चाहिए। हटाए गए सामान की सूची तैयार की जानी चाहिए ताकि दुकानदारों को कोई नुकसान न हो। एक्ट में सामान जब्त करने का प्रावधान नहीं है मगर इसके बावजूद सामान जब्त किए जा रहे हैं।
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याचिका में कहा गया है कि सितंबर 2016 में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के तहत बनी नियमावली लागू कर दी गई है। इसके बाद एक सर्वे भी कराया गया और ठेले वालों को रसीद भी दी गई थी। नियमानुसार बिना सर्वे कराए किसी को हटाया नहीं जा सकता है। एक्ट में स्ट्रीट वेंडिंग जोन तय करके वहां पटरी दुकानदारों को स्थान देने का भी प्रावधान है मगर अभी तक ऐसा कोई जोन तय नहीं किया गया है। याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।
पटरी दुकानदारोें को हटाने पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
0 स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का पालन नहीं करने पर जनहित याचिका दाखिल
अमर उजाला ब्यूरो