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कोर्ट
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हाईकोर्ट के 75 अधिवक्ता सीनियर एडवोकेट नामित
0 कुल 78 नामों पर हुआ था विचार, 75 के नाम पर लगी मुहर
0 पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बनाए गए सीनियर, 160 हो जाएगी संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 75 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया है। यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ सीनियर एडवोकेट नामित किए गए हैं। हाईकोर्ट द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत सीनियर एडवोकेट बनने के लिए आए आवेदनों की स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा जांच के बाद कुल 78 वकीलों को सीनियर बनाए जाने योग्य पाया गया। इन नामों पर हाईकोर्ट जजों की बैठक में विचार किया गया। जजों द्वारा मतदान के माध्यम से कुल 75 वकीलों को सीनियर एडवोकेट (वरिष्ठ अधिवक्ता) नामित किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने हेतु हाईकोर्ट ने जुलाई 2018 में वकीलों से आवेदन मांगे थे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त आवेदनों की जांच कर शार्ट लिस्टिंग की गई। इस काम के लिए गठित कमेटी मुख्य न्यायाधीश के निर्देशन में बनी कमेटी में प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत भी शामिल थे। कमेटी ने प्राप्त आवेदनों में से 78 वकीलों को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने के योग्य पाया। इन नामों को हाईकोर्ट जजों की फुलकोर्ट के समक्ष रखा गया। फुलकोर्ट में सभी जज शामिल होते हैं। फुलकोर्ट की मंजूरी मिल जाने के बाद जल्दी ही वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची में 75 नए नामों के शामिल हो जाने से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सबसे बड़ा कुनबा बन गया है। मौजूदा समय में हाईकोर्ट में कुल 85 वरिष्ठ अधिवक्ता हैं जिनमें से 65 इलाहाबाद हाईकोर्ट में और 20 लखनऊ खंडपीठ में हैं। 75 नाम और शामिल होने से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कुल संख्या 160 हो जाएगी जो सभी उच्च न्यायालयों में सबसे बड़ी संख्या है।
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कठिन है सीनियर बनने की प्रक्रिया
सीनियर एडवोकेट बनाए जाने की प्रक्रिया कठिन है। इसके लिए योग्यता के कड़े मापदंड रखे गए हैं। एडवोकेट्स एक्ट के अनुसार कोई अधिवक्ता अपनी उम्र से सीनियर एडवोकेट नहीं होता है बल्कि यह एक प्रक्रिया है जिसे पूरा करने के बाद सीनियर तगमा मिलता है। किसी वकील को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने में लगभग वही मापदंड लागू होते हैं जो जज बनाए जाने हैं। वकील की प्रैक्टिस, आयकर रिटर्न का रिकार्ड, उसके द्वारा किए गए मुकदमों की संख्या और गुणवत्ता, लॉ जर्नल में प्रकाशित हुए मुकदमों के अलावा अधिवक्ता के चरित्र और आचरण पर भी विचार करने के बाद निर्णय लिया जाता है।
बदल जाती है ड्रेस, बढ़ता है सम्मान
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद वकील का सम्मान पहले के मुकाबले और बढ़ जाता है। उनकी ड्रेस भी जजों की तरह हो जजों की तरह हो जाती है तथा अदालत में बहस के लिए सीनियर एडवोकेट को वकालत नामा दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती है। अदालतें भी सीनियर एडवोकेट से बड़े मुकदमों की सहयोग की अपेक्षा करती हैं।
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हाईकोर्ट के 75 अधिवक्ता सीनियर एडवोकेट नामित
0 कुल 78 नामों पर हुआ था विचार, 75 के नाम पर लगी मुहर
0 पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बनाए गए सीनियर, 160 हो जाएगी संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 75 वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया है। यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में एक साथ सीनियर एडवोकेट नामित किए गए हैं। हाईकोर्ट द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत सीनियर एडवोकेट बनने के लिए आए आवेदनों की स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा जांच के बाद कुल 78 वकीलों को सीनियर बनाए जाने योग्य पाया गया। इन नामों पर हाईकोर्ट जजों की बैठक में विचार किया गया। जजों द्वारा मतदान के माध्यम से कुल 75 वकीलों को सीनियर एडवोकेट (वरिष्ठ अधिवक्ता) नामित किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने हेतु हाईकोर्ट ने जुलाई 2018 में वकीलों से आवेदन मांगे थे। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त आवेदनों की जांच कर शार्ट लिस्टिंग की गई। इस काम के लिए गठित कमेटी मुख्य न्यायाधीश के निर्देशन में बनी कमेटी में प्रदेश के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत भी शामिल थे। कमेटी ने प्राप्त आवेदनों में से 78 वकीलों को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने के योग्य पाया। इन नामों को हाईकोर्ट जजों की फुलकोर्ट के समक्ष रखा गया। फुलकोर्ट में सभी जज शामिल होते हैं। फुलकोर्ट की मंजूरी मिल जाने के बाद जल्दी ही वरिष्ठ अधिवक्ता बनाए जाने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
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हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूची में 75 नए नामों के शामिल हो जाने से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सबसे बड़ा कुनबा बन गया है। मौजूदा समय में हाईकोर्ट में कुल 85 वरिष्ठ अधिवक्ता हैं जिनमें से 65 इलाहाबाद हाईकोर्ट में और 20 लखनऊ खंडपीठ में हैं। 75 नाम और शामिल होने से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कुल संख्या 160 हो जाएगी जो सभी उच्च न्यायालयों में सबसे बड़ी संख्या है।
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कठिन है सीनियर बनने की प्रक्रिया
सीनियर एडवोकेट बनाए जाने की प्रक्रिया कठिन है। इसके लिए योग्यता के कड़े मापदंड रखे गए हैं। एडवोकेट्स एक्ट के अनुसार कोई अधिवक्ता अपनी उम्र से सीनियर एडवोकेट नहीं होता है बल्कि यह एक प्रक्रिया है जिसे पूरा करने के बाद सीनियर तगमा मिलता है। किसी वकील को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने में लगभग वही मापदंड लागू होते हैं जो जज बनाए जाने हैं। वकील की प्रैक्टिस, आयकर रिटर्न का रिकार्ड, उसके द्वारा किए गए मुकदमों की संख्या और गुणवत्ता, लॉ जर्नल में प्रकाशित हुए मुकदमों के अलावा अधिवक्ता के चरित्र और आचरण पर भी विचार करने के बाद निर्णय लिया जाता है।
बदल जाती है ड्रेस, बढ़ता है सम्मान
सीनियर एडवोकेट बनने के बाद वकील का सम्मान पहले के मुकाबले और बढ़ जाता है। उनकी ड्रेस भी जजों की तरह हो जजों की तरह हो जाती है तथा अदालत में बहस के लिए सीनियर एडवोकेट को वकालत नामा दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होती है। अदालतें भी सीनियर एडवोकेट से बड़े मुकदमों की सहयोग की अपेक्षा करती हैं।