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उरई मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य अवमानना के दोषी

Wed, 19 Dec 2018 09:31 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 19 Dec 2018 09:31 PM IST
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उरई मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य अवमानना के दोषी
उरई मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य अवमानना के दोषी
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0 हाईकोर्ट में तलब, सजा की मात्रा पर कोर्ट ने मांगा जवाब
0 अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी को कोर्ट के आदेश पर भी नहीं दिया दाखिला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई (जालौन) के प्रधानाचार्य को अदालत के आदेश की अवमानना में तलब कर लिया है। कोर्ट ने उनको जानबूझकर कर अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए पूछा कि वह बताएं कि उनको इसके लिए कितनी सजा दी जाए। मेडिकल प्रथम वर्ष के छात्र जयप्रकाश पाल की अवमानना याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया है।

याची का दाखिला मेडिकल कॉलेज में अनुसूचित जाति कोटे के तहत हुआ था। उसने धनगर जाति का प्रमाणपत्र लगाया था। प्रधानाचार्य ने धनगर जाति को अनुसूचित जाति मानने से इंकार करते हुए उसका दाखिला नहीं दिया। याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर जिला स्तरीय कमेटी ने उसके जाति प्रमाणपत्र की जांच के बाद उसे सही करार दिया। जिला कमेटी के आदेश को प्रधानाचार्य ने मान तो लिया, मगर दाखिला इस आधार पर नहीं दिया कि अब विलंब हो गया है और कोर्स काफी आगे निकल गया है। इस स्थिति में एमसीआई की गाइडलाइन के तहत याची को दाखिला नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि याची का जाति प्रमाणपत्र सही करार दिया गया है, इसलिए प्रधानाध्यापक उसे दाखिला देने के लिए बाध्य हैं। उसके कोर्स पूरा होने का मामला पूरी तरह से अलग है। इस आधार पर दाखिले से इंकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने प्रधानाध्यापक को जानबूझकर अदालत के आदेश की अवमानना का दोषी मानते हुए तलब किया है।
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