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बाबा रामदेव की कंपनी को हाईकोर्ट से राहत
Updated Tue, 23 Oct 2018 08:00 PM IST
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बाबा रामदेव की कंपनी को हाईकोर्ट से राहत
0 पतंजलि फूड पार्क के लिए आवंटित भूमि पर पेड़ों की कटाई के मामले में याचिका निस्तारित
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कंपनी को नोएडा में फूड पार्क के लिए आवंटित भूमि पर हरे पेड़ों की कटाई के खिलाफ दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर को निर्देश दिया है कि वह पेड़ों की कटाई की जांच कर मुआवजा तय करें और सरकार याचीगण को मुआवजा दे।
पतंजलि आयुर्वेद को फूडपार्क के लिए भूमि का आवंटन यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी ने किया है। अथॉरिटी को यह भूमि राज्य सरकार ने स्थानांतरित की थी। इससे पूर्व सरकार ने इसी जमीन पर 1995 में याचीगण को हरे पेड़ लगाने के लिए पट्टा दिया था। जमीन का हस्तांतरण होेने के बाद उस पर खड़े हजारों पेड़ काट डाले गए। इसे लेकर औसाफ और आठ अन्य लोगोें ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी का कहना था कि सरकार ने याचीगण से भूमि वापस लेकर उसे दी है। उसने भूमि का आवंटन नहीं किया है। पतंजलि आयुर्वेद का भी कहना था कि याचीगण की भूमि उनको आवंटित नहीं की गई है। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि राजस्व संहित के नियम 55(3) के मुताबिक यदि सरकार किसी को भूमि देने के बाद उसे वापस लेती है तो इस दौरान भूमि पर हुए विकास कार्य का आवंटी को मुआवजा पाने का हक है।
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यह था मामला
याचीगण को 1995 में नोएडा में 10 एकड़ जमीन पेड़ लगाने के लिए पट्टे पर दी गई थी। 15 सितंबर 2017 को राज्य सरकार ने यह पट्टा निरस्त कर दिया। जमीन वापस गांव सभा के पास चली गई। इसके बाद राज्य सरकार ने फिर से इस भूमि का अधिग्रहण किया और इसे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को औद्योगिक विकास के लिए दे दिया। अथॉरिटी ने यह जमीन फूड पार्क के लिए पतंजलि आयुर्वेद को दे दी। जब भूमि पर स्थित हरे पेड़ काटे जाने लगे तो याचिका दाखिल कर मुआवजे की मांग की गई। कोर्ट ने मुआवजे की बात स्वीकार करते हुए याचिका निस्तारित कर दी है।
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0 पतंजलि फूड पार्क के लिए आवंटित भूमि पर पेड़ों की कटाई के मामले में याचिका निस्तारित
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कंपनी को नोएडा में फूड पार्क के लिए आवंटित भूमि पर हरे पेड़ों की कटाई के खिलाफ दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर को निर्देश दिया है कि वह पेड़ों की कटाई की जांच कर मुआवजा तय करें और सरकार याचीगण को मुआवजा दे।
पतंजलि आयुर्वेद को फूडपार्क के लिए भूमि का आवंटन यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी ने किया है। अथॉरिटी को यह भूमि राज्य सरकार ने स्थानांतरित की थी। इससे पूर्व सरकार ने इसी जमीन पर 1995 में याचीगण को हरे पेड़ लगाने के लिए पट्टा दिया था। जमीन का हस्तांतरण होेने के बाद उस पर खड़े हजारों पेड़ काट डाले गए। इसे लेकर औसाफ और आठ अन्य लोगोें ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी का कहना था कि सरकार ने याचीगण से भूमि वापस लेकर उसे दी है। उसने भूमि का आवंटन नहीं किया है। पतंजलि आयुर्वेद का भी कहना था कि याचीगण की भूमि उनको आवंटित नहीं की गई है। मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि राजस्व संहित के नियम 55(3) के मुताबिक यदि सरकार किसी को भूमि देने के बाद उसे वापस लेती है तो इस दौरान भूमि पर हुए विकास कार्य का आवंटी को मुआवजा पाने का हक है।
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यह था मामला
याचीगण को 1995 में नोएडा में 10 एकड़ जमीन पेड़ लगाने के लिए पट्टे पर दी गई थी। 15 सितंबर 2017 को राज्य सरकार ने यह पट्टा निरस्त कर दिया। जमीन वापस गांव सभा के पास चली गई। इसके बाद राज्य सरकार ने फिर से इस भूमि का अधिग्रहण किया और इसे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को औद्योगिक विकास के लिए दे दिया। अथॉरिटी ने यह जमीन फूड पार्क के लिए पतंजलि आयुर्वेद को दे दी। जब भूमि पर स्थित हरे पेड़ काटे जाने लगे तो याचिका दाखिल कर मुआवजे की मांग की गई। कोर्ट ने मुआवजे की बात स्वीकार करते हुए याचिका निस्तारित कर दी है।