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तेलंगाना से ट्रकों से आए 12 लोग गांव में घूम रहे
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- फोटो : demo pic
बोले, पांच दिन की यात्रा में कहीं भी नहीं हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
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शाही पुलिस ने भी बिना जांच कराए ही घर भेज दिया
शाही। तेलंगाना से शाही थाना क्षेत्र के गांव सेवा ज्वालापुर में पहुंचे 12 प्रवासी मजदूर गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। ये सभी मजदूर सोमवार कग सुबह करीब नौ बजे ही गांव पहुंचे हैं। मजदूरों के मुताबिक, तेलंगाना से पांच दिन पहले वह घर को निकले थे। रास्ते में ट्रक, डीसीएम आदि जो भी वाहन मिला उससे आगे का सफर तय किया। काफी रास्ता पैदल भी तय करना पड़ा।
रविवार रात बरेली पहुंचे। वहां से रात करीब 11 बजे पैदल ही शाही के लिए रवाना हो गए। फतेहगंज पश्चिमी धनेटा क्रॉसिंग होते हुए सुबह करीब 8:30 बजे मिर्जापुर चौराहे पहुंचे। करीब दो दर्जन मजदूर मिर्जापुर पहुंचने के बाद कुछ शीशगढ़ रोड की ओर रवाना हो गए तो कुछ शाही आ गए। मिर्जापुर बाजार में रुकने पर शाही पुलिस पहुंची और बिना जांच के ही उन्हें घर रवाना कर दिया।
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मजदूरों ने बताया कि बरेली का ही एक ठेकेदार पेंटिंग का काम कराने के लिए उन्हें तेलंगाना ले गया था। करीब दो महीने से वे खाली बैठे थे। घर आने के लिए भी पैसे नहीं थे तो घरवालों से खाते में रुपये मंगाए। कई दिनों से भूखे प्यासे चलते हुए वे गांव पहुंचे। मजदूरों ने बताया कि उन्हें लगा कि बरेली पहुंचने पर उनकी जांच की जाएगी, लेकिन ऐसा कहीं नहीं हुुआ। तेलंगाना से यहां तक आने पर रास्ते में भी कहीं उनका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हुआ। वहीं मजदूरों के गांव में घूमने से लोगों में दहशत का माहौल है।
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शाही पुलिस ने भी बिना जांच कराए ही घर भेज दिया शाही। तेलंगाना से शाही थाना क्षेत्र के गांव सेवा ज्वालापुर में पहुंचे 12 प्रवासी मजदूर गांव में खुलेआम घूम रहे हैं। ये सभी मजदूर सोमवार कग सुबह करीब नौ बजे ही गांव पहुंचे हैं। मजदूरों के मुताबिक, तेलंगाना से पांच दिन पहले वह घर को निकले थे। रास्ते में ट्रक, डीसीएम आदि जो भी वाहन मिला उससे आगे का सफर तय किया। काफी रास्ता पैदल भी तय करना पड़ा।
रविवार रात बरेली पहुंचे। वहां से रात करीब 11 बजे पैदल ही शाही के लिए रवाना हो गए। फतेहगंज पश्चिमी धनेटा क्रॉसिंग होते हुए सुबह करीब 8:30 बजे मिर्जापुर चौराहे पहुंचे। करीब दो दर्जन मजदूर मिर्जापुर पहुंचने के बाद कुछ शीशगढ़ रोड की ओर रवाना हो गए तो कुछ शाही आ गए। मिर्जापुर बाजार में रुकने पर शाही पुलिस पहुंची और बिना जांच के ही उन्हें घर रवाना कर दिया।
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मजदूरों ने बताया कि बरेली का ही एक ठेकेदार पेंटिंग का काम कराने के लिए उन्हें तेलंगाना ले गया था। करीब दो महीने से वे खाली बैठे थे। घर आने के लिए भी पैसे नहीं थे तो घरवालों से खाते में रुपये मंगाए। कई दिनों से भूखे प्यासे चलते हुए वे गांव पहुंचे। मजदूरों ने बताया कि उन्हें लगा कि बरेली पहुंचने पर उनकी जांच की जाएगी, लेकिन ऐसा कहीं नहीं हुुआ। तेलंगाना से यहां तक आने पर रास्ते में भी कहीं उनका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हुआ। वहीं मजदूरों के गांव में घूमने से लोगों में दहशत का माहौल है।