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छह करोड़ रुपये गबन का मामला : डाक एजेंट ने किया था गबन, दारागंज पोस्टमास्टर समेत 12 कर्मचारी निलंबित

Thu, 20 Jun 2024 06:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 20 Jun 2024 06:32 PM IST
सार

डाकघर की बचत योजनाओं के नाम पर दारागंज डाकघर के एजेंट ने करीब छह करोड़ का गबन कर लिया है। यह खेल पिछले 10 वर्ष से चल रहा था। उसने अपनी बहन के साथ मिलकर पैसे हड़पे। दो महीने पहले उसका निधन हो गया तो मामला प्रकाश में आया।

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12 employees including postmaster suspended in case of embezzlement of Rs 6 crore in postal department, create
डाकघर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

डाक विभाग की योजनाओं के नाम पर छह करोड़ रुपये गबन करने के मामले में दारागंज पोस्टमास्टर समेत 12 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। इसके अलावा डाक एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है। एजेंट के जरिये हुए लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

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दारागंज डाकघर के एजेंट निखिल श्रीवास्तव 2014 से खेल कर रहा था। अप्रैल 2024 में उसके निधन के बाद मामला प्रकाश में आया और अब कार्रवाई की जा रही है। निखिल के पिता वीपी श्रीवास्तव भी एजेंट थे। उनकी वहां पर अच्छी साख थी। उनका निधन 2013 में हुआ था तो 2014 निखिल एजेंट बन गया। लोगों ने निखिल पर भी उनके पिता की तरह भरोसा किया गया, लेकिन उसने विश्वासघात किया। उसका एक खेल 2018 में पकड़ा गया तो एजेंसी रद्द हो गई। फिर उसने 2018 में अपनी बहन नीति श्रीवास्तव के नाम से एजेंसी खुलवाई और डाकघर की योजनाओं के नाम पर लोगों से पैसे लेकर खुद रखने लगा।
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पासबुक पर डाला था फर्जी खाता नंबर

उसने डाकघर की पाकबुक का प्रयोग किया और उस पर फर्जी खाता नंबर डालकर लोगों को दे दिया। कई फर्जी पासबुक बनाकर दे दी। उसने कई लोगों का लाखों रुपये फिक्स डिपॉजिट कराए। उसके निधन के बाद लोग डाकघर में अपना खाता चेक करने गए तो पता चला कि पासबुक ही फर्जी है। एजेंट नीति श्रीवास्तव के खिलाफ मई के पहले हफ्ते में शिकायत हुई, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले की खबर बृहस्पतिवार को अमर उजाला में प्रकाशित की गई तो अफसर सक्रिय हुए।
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डाक निदेशक ने बैठक ली और शाम तक दारागंज के पोस्टमास्टर पीएस दुबे, पूर्व पोस्टमास्टर अरुण कुमार सिन्हा, पोस्टल असिस्टेंट आकाश दुबे, प्रणय निगम, सूरज सरोज, वीरेंद्र गुप्ता, खजांची गंगा प्रसाद समेत 12 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। पीएस दुबे 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन इस मामले में उन पर कार्रवाई हो गई है।

2018 के बाद की शिकायतें ज्यादा आई हैं। इसलिए दारागंज में तब से अब तक तैनात रहे पोस्टमास्टर और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिन पर कार्रवाई हुई है, उसमें से चार दारागंज में व अन्य कर्मचारी दूसरे डाकघर में तैनात हैं। मामले की जांच चल रही है। एजेंट नीति श्रीवास्तव से भी पूछताछ की जाएगी। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। - गाैरव श्रीवास्तव, डाक निदेशक


 

योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर किया फर्जीवाड़ा

बता दें कि दारागंज के रहने वाले वीपी श्रीवास्तव डाकघर के एजेंट थे। क्षेत्र में उनकी अच्छी साख थी। दारागंज और आसपास के कई मोहल्लों के हजारों लोगों के उन्होंने डाकघर में खाता खुलवाया। डाकघर की योजनाओं का लाभ दिलवाया। उनके प्रति लोगों का भरोसा ऐसा था कि लाखों रुपये देते और डाकघर पूछने भी नहीं जाते थे। वह पैसा, पासबुक आदि घर दे जाते थे।

2012-13 में उनका निधन हो गया। उसके बाद उनका बेटा निखिल श्रीवास्तव एजेंसी चलाने लगा। पिता की साख पर लोगों ने निखिल पर भरोसा किया, लेकिन वह धोखेबाज निकला। वह किसान विकास पत्र, राष्ट्रीय बचत पत्र, मंथली इनकम स्कीम आदि योजनाओं के नाम पर लोगों से पैसे लेता और डाकघर में जमा नहीं करता। लोगों को फर्जी पासबुक और अकाउंट नंबर दे दिया।

2018 में एक ने एनएससी के लिए पैसा दिया, लेकिन निखिल ने किसान विकास पत्र बनवा दिया। इसकी शिकायत हुई तो एजेंसी रद्द कर दी गई। उसकी डाक विभाग के अफसरों में अच्छी पैठ थी। इसलिए मामला तूल नहीं पकड़ा। उसी दाैरान उसने बहन नीति के नाम एजेंसी ले ली और खुद काम करता रहा। लोगों का भरोसा बना रहे, इसलिए वह नियमित ब्याज और रिटर्न देता रहा।

उसके भरोसे पर शिव बाबू चौरसिया ने 59 लाख रुपये, बलराम यादव ने 16 लाख रुपये, कृष्णा महेंद्रू ने 7.5 लाख रुपये समेत करीब 40 लोगों ने लाखों रुपये निवेश किए थे। कुछ महीने पहले वह बीमार हुआ तो रिटर्न देना बंद कर दिया। लोग डाकघर पहुंचे तो वहां पर उनका रिकॉर्ड ही नहीं था। इसी बीच अप्रैल 2024 में उसका भी निधन हो गया। अब उनकी बहन लोगों को जवाब नहीं दे पा रही हैं। इसलिए शिकायत डाक निदेशक तक पहुंची।

माैत से दो दिन पहले बताया कि गबन किया

कई वर्ष पहले कृष्णा महेंद्रू ने 7.5 लाख रुपये मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस) योजना के तहत निखिल को दिया था। निखिल उनको हर महीने ब्याज देते रहे। पिछले कुछ महीने से ब्याज देना बंद किया तो वह डाकघर गई। वहां बताया गया कि उनके नाम अकाउंट भी नहीं है। वह निखिल के घर के पास ही रहती हैं और उसे अपने बेटे जैसे मानती थीं। वह उसके घर गईं और पासबुक मांगा तो वह टालता रहा। निधन से दो पहले वह फिर से घर गईं तो उसने कबूला कि फ्रॉड किया है।

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