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वकीलों से रूब रू होंगे चीफ जस्टिस

Thu, 01 Feb 2018 01:08 AM IST
Updated Thu, 01 Feb 2018 01:08 AM IST
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वकीलों से रूब रू होंगे चीफ जस्टिस
वकीलों से मुलाकात करेंगे चीफ जस्टिस
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0 हाईकोर्ट बार को आज करेंगे संबोधित, बार के प्रतिनिधि मंडल ने की मुलाकात
0 उच्च न्यायालय में लागू नए सॉफ्टवेयर सीआईएस को लेकर करेंगे जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट में लागू नए सॉफ्टवेयर सीआईएस से हो रही परेशानी को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले बृहस्पतिवार को वकीलों से सीधे मुलाकात करेंगे। दिन में डेढ़ बजे वह बार एसोसिएशन के लाइब्रेरी हॉल में वकीलों को संबोधित करेंगे। चीफ जस्टिस के साथ कुछ सीनियर जज भी होंगे। सिस्टम अभी पूरी तरह से काम नहीं कर रहा है, जिससे वकील काफी परेशान हैं। उनमें नाराजगी भी है।
सीआईएस के संबंध में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्र कुमार चतुर्वेदी, महासचिव एसी तिवारी के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता टीपी सिंह, ओपी सिंह और एनसी राजवंशी का प्रतिनिधि मंडल बुधवार को मुख्य न्यायाधीश से मिला। अध्यक्ष ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश को वकीलों की तमाम परेशानियों से अवगत कराया गया है। नए सिस्टम के ठीक से काम न करने के कारण वकीलों को उनके मुकदमों की जानकारी नहीं हो पा रही है। फ्रेश के मुकदमे दाखिल होने के बाद कब सुनवाई के लिए आएंगे, इसका पता नहीं चलता। वकील सुनवाई के समय पहुंच नहीं पाते और न उनका केस खारिज हो जाता है। मुख्य न्यायाधीश ने आश्वासन दिया है फिलहाल जब तक सिस्टम पूरी तरह से काम नहीं करता है, फ्रेश मुकदमे दाखिले के पांच दिन बाद सुने जाएंगे। फ्रेश लिस्ट रिवाइज की जाएगी और इसके बाद भी यदि वकील नहीं पहुंचते हैं तो उनका मुकदमा खारिज नहीं होगा। उस पर पांच दिन के बाद की डेट लग जाएगी। यदि किसी मामले में अर्जेंसी है तो केस कोर्ट से मेंशन करने पर ही सुन लिया जाएगा। इसी प्रकार से जमानत प्रार्थनापत्रों पर पहले से ही 11 दिन का समय लगता है, इसके बाद पांच दिन और लगने पर सुनवाई की अवधि बढ़ जाएगी। चीफ जस्टिस ने आश्वासन दिया है कि नोटिस अवधि में पांच दिन की ढील दी जाएगी ताकि, जमानत प्रार्थनापत्र उतने ही समय में सुने जा सकें।
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अध्यक्ष ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश ने आश्वासन दिया है कि यदि इसके बावजूद कोई मुकदमा खारिज होता है या कोई अन्य समस्या है तो उनको अवगत कराया जाए। वह व्यक्तिगत रूप से उसे देखेंगे। वैसे सभी न्यायाधीशों से अनुरोध किया गया है कि सीआईएस सिस्टम से हो रही दिक्कत को देखते हुए ‘नो एडवर्स आर्डर’को लागू रखा जाए। चीफ जस्टिस स्वयं वकीलों से मिलकर उनको सीआईएस सिस्टम की खूबियों से अवगत कराएंगे।
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