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कल्पवासियों से सजी संगम की रेती
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कुंभ
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कल्पवासियों से सजी संगम की रेती
0 तुलसी के पौधे संग पहुंचे तंबुओं की नगरी, रखा-सजाया सामान
0 संक्रांति से आरंभ होगा जप, तप, संयम का अभ्यास कल्पवास
कुंभनगर (प्रयागराज)। संगम की रेती पर मंगलवार को मकर संक्रांति से ही जप, तप, संयम का अभ्यास कल्पवास आरंभ होगा। सोमवार की रात तक देश के कोने-कोने से आने वाले कल्पवासियों ने तंबुओं की नगरी में डेरा जमाया और उसे अपनी जरूरत के मुताबिक व्यवस्थित किया। संग लाए गए तुलसी के पौधे को शिविर के बाहर रखा तो ठाकुर जी सहित माला, चालीसा, पूजन सामग्री, दान की सामग्री के अतिरिक्त माह भर का राशन और कपड़ों से भरा बैग शिविर के भीतर रखा गया। ट्रैक्टर ट्रालियों में सोने के लिए बिस्तर, खाने का राशन, बिछाने को पुआल, जलाने के लिए लकड़ी सहित जरूरत का अन्य सामान गाड़ियों में भर-भरकर लाया गया।
कल्पवासी अपने तीर्थ पुरोहितों का निशान देखकर उनके शिविरों में पहुंचे। यहां आकर कल्पवासियों ने उनके पांव छूए और आज्ञा लेकर अपने शिविरों में प्रवेश किया। गंगोली शिवाला मार्ग पर कल्पवास करने को पहुंची 86 बरस की धनपती बोलीं, अबकी तो ‘कलपबास’ संक्रांति से ही आरंभ होई भइया। वहीं शंकर आश्रम, जगनारायण दास, फूलपुर के शिविर में रुके फूलपुर के 75 वर्षीय महाजन पटेल ने कहा, वैसे तो संक्रांति से संक्रांत कै कलपवास है लेकिन मकर से ही शुरुआत होई।
तीर्थपुरोहितों के मुताबिक कल्पवास के लिए निश्चित रूप से शास्त्रीय विधान है। लेकिन, कल्पवास लोकरीति और कुलरीति से भी किया जाता है। इसीलिए संक्रांति की अवधारणा मानने वाले श्रद्धालुओं के लिए संक्रांति से ही कल्पवास आरंभ होगा, जो किसी के लिए माघी पूर्णिमा तो किसी के लिए शिवरात्रि तक रहेगा। इसके अतिरिक्त तमाम श्रद्धालु पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक का कल्पवास करेंगे।
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रोपा जाएगा तुलसी का पौधा
कल्पवास के आरंभ में शिविरों के बाहर तुलसी का पौधा रोपा जाएगा। तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल कहते हैं, कल्पवास के दौरान तुलसी पूजन का विधान है। इसी तरह कुटिया के बाहर जौ भी बोया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि जौ की पौध बढ़ने के साथ ही सर्वमंगल और सर्वप्रगति भी होती है।
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रहेगा संयम और अनुशासन
कल्पवास के दौरान संगम की रेती पर व्रत, तप, पूजा-अनुष्ठान के साथ नियम-संयम का पालन, अनुशासन रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु दो समय स्नान और सिर्फ एक ही समय भोजन के अतिरिक्त भूमि पर ही शयन करेंगे।
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कल्पवासियों से सजी संगम की रेती
0 तुलसी के पौधे संग पहुंचे तंबुओं की नगरी, रखा-सजाया सामान
0 संक्रांति से आरंभ होगा जप, तप, संयम का अभ्यास कल्पवास
कुंभनगर (प्रयागराज)। संगम की रेती पर मंगलवार को मकर संक्रांति से ही जप, तप, संयम का अभ्यास कल्पवास आरंभ होगा। सोमवार की रात तक देश के कोने-कोने से आने वाले कल्पवासियों ने तंबुओं की नगरी में डेरा जमाया और उसे अपनी जरूरत के मुताबिक व्यवस्थित किया। संग लाए गए तुलसी के पौधे को शिविर के बाहर रखा तो ठाकुर जी सहित माला, चालीसा, पूजन सामग्री, दान की सामग्री के अतिरिक्त माह भर का राशन और कपड़ों से भरा बैग शिविर के भीतर रखा गया। ट्रैक्टर ट्रालियों में सोने के लिए बिस्तर, खाने का राशन, बिछाने को पुआल, जलाने के लिए लकड़ी सहित जरूरत का अन्य सामान गाड़ियों में भर-भरकर लाया गया।
कल्पवासी अपने तीर्थ पुरोहितों का निशान देखकर उनके शिविरों में पहुंचे। यहां आकर कल्पवासियों ने उनके पांव छूए और आज्ञा लेकर अपने शिविरों में प्रवेश किया। गंगोली शिवाला मार्ग पर कल्पवास करने को पहुंची 86 बरस की धनपती बोलीं, अबकी तो ‘कलपबास’ संक्रांति से ही आरंभ होई भइया। वहीं शंकर आश्रम, जगनारायण दास, फूलपुर के शिविर में रुके फूलपुर के 75 वर्षीय महाजन पटेल ने कहा, वैसे तो संक्रांति से संक्रांत कै कलपवास है लेकिन मकर से ही शुरुआत होई।
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तीर्थपुरोहितों के मुताबिक कल्पवास के लिए निश्चित रूप से शास्त्रीय विधान है। लेकिन, कल्पवास लोकरीति और कुलरीति से भी किया जाता है। इसीलिए संक्रांति की अवधारणा मानने वाले श्रद्धालुओं के लिए संक्रांति से ही कल्पवास आरंभ होगा, जो किसी के लिए माघी पूर्णिमा तो किसी के लिए शिवरात्रि तक रहेगा। इसके अतिरिक्त तमाम श्रद्धालु पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक का कल्पवास करेंगे।
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रोपा जाएगा तुलसी का पौधा
कल्पवास के आरंभ में शिविरों के बाहर तुलसी का पौधा रोपा जाएगा। तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल कहते हैं, कल्पवास के दौरान तुलसी पूजन का विधान है। इसी तरह कुटिया के बाहर जौ भी बोया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि जौ की पौध बढ़ने के साथ ही सर्वमंगल और सर्वप्रगति भी होती है।
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रहेगा संयम और अनुशासन
कल्पवास के दौरान संगम की रेती पर व्रत, तप, पूजा-अनुष्ठान के साथ नियम-संयम का पालन, अनुशासन रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु दो समय स्नान और सिर्फ एक ही समय भोजन के अतिरिक्त भूमि पर ही शयन करेंगे।