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कवि दिवस मैथिलीशरण गुप्त
Updated Sat, 04 Aug 2018 02:01 AM IST
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0 राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती ‘कवि दिवस’ पर कवि सम्मेलन
इलाहाबाद। हिन्दुस्तानी एकेडेमी की ओर से शुक्रवार को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती ‘कवि दिवस’ पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। जुटे रचनाकारों ने राष्ट्र के लिए उनकी सेवाओं केसाथ ही कविता के सरोकारों से जोड़ने, जुड़ने का संकल्प भी लिया। हितेश सिंह ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त एवं डॉ. सुजीत कुमार शर्मा ने डॉ जगदीश गुप्त के साहित्यिक अवदान को रेखांकित किया। एकेडेमी अध्यक्ष डॉ.उदय प्रताप सिंह ने कहा, ‘डॉ.जगदीश गुप्त की संकल्पना और डॉ. राम कुमार वर्मा की प्रेरणा से ही राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती को कवि दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई थी। इसी क्रम में एकेडेमी की ओर से रचनाकारों को मंच देने की परंपरा आरंभ हुई। प्रस्तुत कवि सम्मेलन भी उसी कड़ी में है। सम्मेलन में रचनाकारों ने शब्द-शब्द समय अपने समय की पड़ताल की तो सरोकारों से संवाद भी।
कवि सम्मेलन के अध्यक्ष बुद्धिसेन शर्मा ने ‘हर घड़ी दिल में कोई ताजा चुभन हो जैसे, जिंदगी वक्त के माथे की शिकन हो जैसे’सुनाकर समय का हाल बयां किया। नंदल हितैषी ने सुनाया, किसने नदी को खंगाला है राम ही जाने, कौन किसका नेवाला है, राम ही जानें। इसी क्रम में प्रद्युम्न नाथ तिवारी करुणेश, जयप्रकाश शर्मा ‘जनकवि प्रकाश,’ओम धीरज, शिवराम उपाध्याय मुकुल मतवाला, विवेक सत्यांशु, राजेश सिंह राज, मंजू महक जौनपुरी, वीरेंद्र मिश्र ‘दीपक’,डॉ.अशोक कुमार सिंह, डॉ.कमलेश राय, ब्रजेश चंद्र पांडेय, रश्मि पाठक, कृष्णदेव मिश्र, हिमांशु उपाध्याय आदि ने रचनापाठ किया।
संचालक डॉ.श्लेष गौतम ने ‘कठिन समय का हल होती है, इंकलाब होती है कविता, गंगाजल होती है’सुनाकर कविता की अर्थवत्ता बताई। एकेडेमी कोषाध्यक्ष रविनंदन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में हरिमोहन मालवीय, प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह, ‘तलब जौनपुरी’, शिवमूर्ति सिंह, डॉ वीरेन्द्र कुमार तिवारी, डॉ शान्ति चौधरी, रविशंकर उपाध्याय, डॉ.अनुपम आनंद आदि मौजूद थे।
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आज भी प्रासंगिक हैं राष्ट्रकवि गुप्त
इलाहाबाद। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इलाहाबाद विश्वविद्यालय विभाग से जुड़े कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को याद किया। मुख्य अतिथि हेमराज डोगरा ने कहा, गुप्त जी की रचनाएं चेतना जगाती हैं। राष्ट्रीय मंत्री रोहित मिश्र ने कहा, वह आज भी प्रासंगिक हैं। छात्रसंघ महामंत्री निर्भय कुमार द्विवेदी ने केहा, उनकी रचनाएं देशभक्ति से ओतप्रोत हैं। विवि परिसर में हुई संगोष्ठी का संचालन अभिषेक कुमार अवस्थी और धन्यवाद ज्ञापन शेखर विक्रम सिंह ने किया। कार्यक्रम में कबीर आजाद, धीरेंद्र प्रताप सिंह, प्रशांत राय, वीरेंद्र, संक्षेप आदि मौजूद थे।
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0 राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती ‘कवि दिवस’ पर कवि सम्मेलन
इलाहाबाद। हिन्दुस्तानी एकेडेमी की ओर से शुक्रवार को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती ‘कवि दिवस’ पर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। जुटे रचनाकारों ने राष्ट्र के लिए उनकी सेवाओं केसाथ ही कविता के सरोकारों से जोड़ने, जुड़ने का संकल्प भी लिया। हितेश सिंह ने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त एवं डॉ. सुजीत कुमार शर्मा ने डॉ जगदीश गुप्त के साहित्यिक अवदान को रेखांकित किया। एकेडेमी अध्यक्ष डॉ.उदय प्रताप सिंह ने कहा, ‘डॉ.जगदीश गुप्त की संकल्पना और डॉ. राम कुमार वर्मा की प्रेरणा से ही राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती को कवि दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई थी। इसी क्रम में एकेडेमी की ओर से रचनाकारों को मंच देने की परंपरा आरंभ हुई। प्रस्तुत कवि सम्मेलन भी उसी कड़ी में है। सम्मेलन में रचनाकारों ने शब्द-शब्द समय अपने समय की पड़ताल की तो सरोकारों से संवाद भी।
कवि सम्मेलन के अध्यक्ष बुद्धिसेन शर्मा ने ‘हर घड़ी दिल में कोई ताजा चुभन हो जैसे, जिंदगी वक्त के माथे की शिकन हो जैसे’सुनाकर समय का हाल बयां किया। नंदल हितैषी ने सुनाया, किसने नदी को खंगाला है राम ही जाने, कौन किसका नेवाला है, राम ही जानें। इसी क्रम में प्रद्युम्न नाथ तिवारी करुणेश, जयप्रकाश शर्मा ‘जनकवि प्रकाश,’ओम धीरज, शिवराम उपाध्याय मुकुल मतवाला, विवेक सत्यांशु, राजेश सिंह राज, मंजू महक जौनपुरी, वीरेंद्र मिश्र ‘दीपक’,डॉ.अशोक कुमार सिंह, डॉ.कमलेश राय, ब्रजेश चंद्र पांडेय, रश्मि पाठक, कृष्णदेव मिश्र, हिमांशु उपाध्याय आदि ने रचनापाठ किया।
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संचालक डॉ.श्लेष गौतम ने ‘कठिन समय का हल होती है, इंकलाब होती है कविता, गंगाजल होती है’सुनाकर कविता की अर्थवत्ता बताई। एकेडेमी कोषाध्यक्ष रविनंदन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में हरिमोहन मालवीय, प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह, ‘तलब जौनपुरी’, शिवमूर्ति सिंह, डॉ वीरेन्द्र कुमार तिवारी, डॉ शान्ति चौधरी, रविशंकर उपाध्याय, डॉ.अनुपम आनंद आदि मौजूद थे।
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आज भी प्रासंगिक हैं राष्ट्रकवि गुप्त
इलाहाबाद। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इलाहाबाद विश्वविद्यालय विभाग से जुड़े कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को याद किया। मुख्य अतिथि हेमराज डोगरा ने कहा, गुप्त जी की रचनाएं चेतना जगाती हैं। राष्ट्रीय मंत्री रोहित मिश्र ने कहा, वह आज भी प्रासंगिक हैं। छात्रसंघ महामंत्री निर्भय कुमार द्विवेदी ने केहा, उनकी रचनाएं देशभक्ति से ओतप्रोत हैं। विवि परिसर में हुई संगोष्ठी का संचालन अभिषेक कुमार अवस्थी और धन्यवाद ज्ञापन शेखर विक्रम सिंह ने किया। कार्यक्रम में कबीर आजाद, धीरेंद्र प्रताप सिंह, प्रशांत राय, वीरेंद्र, संक्षेप आदि मौजूद थे।