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राजस् थान की हार के बाद फूलपुर किला बचाना भाजपा के लिए चुनौती
Updated Sat, 10 Feb 2018 12:09 AM IST
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राजस्थान की हार के बाद फूलपुर किला बचाना भाजपा के लिए चुनौती
0 भाजपा के लिए आसान नहीं है केशव मौर्य का उत्तराधिकारी तलाशना
0 अधिसूचना जारी होने के साथ ही कई दावेदारों के नाम आए सामने
इलाहाबाद। राजस्थान की दो लोकसभा सीट में अभी हाल ही में हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा के लिए फूलपुर संसदीय क्षेत्र में किला फतह करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने के बाद भाजपा इस सीट से पिछले वर्ष से उनका उत्तराधिकारी तलाश रही है। इस बीच पार्टी के तमाम नेताओं ने इस सीट से अपनी दावेदारी का दावा भी ठोंका है। हालांकि पार्टी अब तक अंतिम रूप से किसी एक उम्मीदवार का नाम तलाश नहीं सकी है। उधर पार्टी कार्यकर्ता दिवाली बाद से ही इस सीट से केशव प्रसाद मौर्य की पत्नी राजकुमारी मौर्य को टिकट दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
वर्ष 2014 में फूलपुर सीट पर भाजपा के पास पहली बार आई। तब केशव ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी थी। इस चुनाव के बाद केशव का कद लगातार बढ़ता ही गया। पहले वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उसके बाद वे अब डिप्टी सीएम बन गए हैं। भाजपा के सामने मुश्किल ये है कि वह फूलपुर संसदीय सीट से आखिर केशव के कद का नेता कहां से लाए। दरअसल इस सीट पर तमाम जातीय समीकरण के आधार पर ही केशव ने यहां पहली बार भाजपा की विजय पताका फहराई थी। इस बीच फूलपुर संसदीय क्षेत्र की तमाम विधानसभा क्षेत्र में पिछले दिनों केशव द्वारा कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि पार्टी यहां से उनकी पत्नी राजकुमारी मौर्य का चुनाव मैदान में उतार सकती है। इसके अलावा इस संसदीय क्षेत्र में केशव के इस्तीफे के बाद विक्रम सिंह पटेल, प्रदीप श्रीवास्तव, अभय नारायण पांडेय, दया पाठक, डा. यूबी यादव आदि की भी सक्रियता बढ़ी है। इन सभी के समर्थक अपने-अपने नेताओं को मजबूत दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि डिप्टी सीएम केशव के समर्थकों की सूची काफी लंबी है। सभी ने केशव मौर्य की पत्नी को ही उम्मीदवार बनाए जाने की मांग की है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र देव पांडेय का कहना है कि इस सीट से पार्टी सोच विचार कर जिताऊ प्रत्याशी उतारेगी। डिप्टी सीएम द्वारा करवाए गए तमाम विकास कार्य से संबंधित संसदीय क्षेत्र की जनता भी वाकिफ है।
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0 भाजपा के लिए आसान नहीं है केशव मौर्य का उत्तराधिकारी तलाशना
0 अधिसूचना जारी होने के साथ ही कई दावेदारों के नाम आए सामने
इलाहाबाद। राजस्थान की दो लोकसभा सीट में अभी हाल ही में हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा के लिए फूलपुर संसदीय क्षेत्र में किला फतह करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने के बाद भाजपा इस सीट से पिछले वर्ष से उनका उत्तराधिकारी तलाश रही है। इस बीच पार्टी के तमाम नेताओं ने इस सीट से अपनी दावेदारी का दावा भी ठोंका है। हालांकि पार्टी अब तक अंतिम रूप से किसी एक उम्मीदवार का नाम तलाश नहीं सकी है। उधर पार्टी कार्यकर्ता दिवाली बाद से ही इस सीट से केशव प्रसाद मौर्य की पत्नी राजकुमारी मौर्य को टिकट दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
वर्ष 2014 में फूलपुर सीट पर भाजपा के पास पहली बार आई। तब केशव ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी थी। इस चुनाव के बाद केशव का कद लगातार बढ़ता ही गया। पहले वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उसके बाद वे अब डिप्टी सीएम बन गए हैं। भाजपा के सामने मुश्किल ये है कि वह फूलपुर संसदीय सीट से आखिर केशव के कद का नेता कहां से लाए। दरअसल इस सीट पर तमाम जातीय समीकरण के आधार पर ही केशव ने यहां पहली बार भाजपा की विजय पताका फहराई थी। इस बीच फूलपुर संसदीय क्षेत्र की तमाम विधानसभा क्षेत्र में पिछले दिनों केशव द्वारा कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि पार्टी यहां से उनकी पत्नी राजकुमारी मौर्य का चुनाव मैदान में उतार सकती है। इसके अलावा इस संसदीय क्षेत्र में केशव के इस्तीफे के बाद विक्रम सिंह पटेल, प्रदीप श्रीवास्तव, अभय नारायण पांडेय, दया पाठक, डा. यूबी यादव आदि की भी सक्रियता बढ़ी है। इन सभी के समर्थक अपने-अपने नेताओं को मजबूत दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि डिप्टी सीएम केशव के समर्थकों की सूची काफी लंबी है। सभी ने केशव मौर्य की पत्नी को ही उम्मीदवार बनाए जाने की मांग की है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र देव पांडेय का कहना है कि इस सीट से पार्टी सोच विचार कर जिताऊ प्रत्याशी उतारेगी। डिप्टी सीएम द्वारा करवाए गए तमाम विकास कार्य से संबंधित संसदीय क्षेत्र की जनता भी वाकिफ है।
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