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मरीज के दर्द के लिए खुद का दर्द भूल गईं
दीपक शर्मा
Updated Thu, 12 May 2016 01:57 AM IST
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विश्व नर्सिंग दिवस
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
मरीज के साथ एक दर्द का रिश्ता निभाने वाली नर्स की भूमिका मरीज के लिए किसी बीमारी से उबरने में दवा जितनी ही महत्वपूर्ण होती है।
विश्व नर्सिंग दिवस पर जब अमर उजाला ने मलखान सिंह जिला अस्पताल और मोहन लाल गौतम महिला अस्पताल में नर्सों की हालत जानने की कोशिश की दो बेहद दयनीय तस्वीर सामने आई। सीमित संसाधन, निर्धारित संख्या से कम स्टाफ, मरीजों के तीमारदारों की बेरुखी और आक्रोश को झेलती नर्सें परिवार और दायित्व के बीच बस किसी तरह संतुलन भर ही बना पा रही हैं। स्टाफ कम होने से काम का बोझ अधिक है। मरीजों के तीमारदारों की अपेक्षा अधिक है। लेकिन नर्स के हिस्से में वह सम्मान नहीं है जिसकी वह हकदार हैं।
20 साल की नौकरी के बाद आज उपेक्षित.
मलखान सिंह जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स कांति देवी ने बताया कि 20 साल की नौकरी के बाद हालत यह है कि वह आज वह अपने इंक्रीमेंट के लिए औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए अपने ही बीच के लोगों के बीच भटक रही हैं। हाथ में कागज लिए कांति देवी मैटर्न के रूम में पहुंचती हैं तो वहां ताला लगा मिलता है। अपने सहकर्मियों के नाम लेकर उन्हें जिम्मेदार ठहराती हैं तो कभी अपनी स्थिति पर अफसोस जाहिर करती हैं। लेकिन जिस समस्या के समाधान की उन्हें उम्मीद होती है उससे उन्हें निराश ही होना होता है। एक और नर्स वहीं पर आती हैं लेकिन उन्हें हाजिरी रजिस्टर नहीं मिलता। उनके पास भी झुंझलाने के सिवाय कुछ विकल्प नहीं है। यहां गौरतलब है कि जिला अस्पताल में करीब 45 स्टाफ नर्सों की जरूरत है लेकिन उपलब्ध केवल 19 ही हैं।
नर्सों के गौरवशाली अतीत का फोटो
मलखान सिंह जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में बने मैटर्न रूम में एक बहुत पुराना फोटो लगा है। वह फोटो नर्सों के गौरवशाली अतीत और उनकी गरिमा की कहानी बयां करता है। इस फोटो में नर्सें ब्रिटिश काल की अपनी यूनिफार्म में बेहद अनुशासित और विशिष्टता के साथ नजर आ रही हैं। पुराने लोग कहते हैं कि यह वह दौर था जब वार्ड में किसी नर्स के आने पर किसी तीमारदार के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकलता था। नर्स का रुतबा किसी डाक्टर से कम नहीं था। लेकिन इस फोटो की सतह पर जमी धूल बता रही है कि वह गरिमा भी भी धुंधला ही चुकी है।
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‘नर्सें वह काम करती हैं जो मरीज के तीमारदार तक नहीं करते। इसके बाद भी नर्सों को सही सम्मान नहीं मिला है। हमारे यहां नर्सें मानक से कम हैं लेकिन मरीज के साथ हमारा रिश्ता भावनाओं पर आधारित होता है हमारी संख्या पर नहीं। कोशिश रहती है कोई शिकायत नहीं हो’
- डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, मोहन लाल गौतम जिला महिला चिकित्सालय
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विश्व नर्सिंग दिवस पर जब अमर उजाला ने मलखान सिंह जिला अस्पताल और मोहन लाल गौतम महिला अस्पताल में नर्सों की हालत जानने की कोशिश की दो बेहद दयनीय तस्वीर सामने आई। सीमित संसाधन, निर्धारित संख्या से कम स्टाफ, मरीजों के तीमारदारों की बेरुखी और आक्रोश को झेलती नर्सें परिवार और दायित्व के बीच बस किसी तरह संतुलन भर ही बना पा रही हैं। स्टाफ कम होने से काम का बोझ अधिक है। मरीजों के तीमारदारों की अपेक्षा अधिक है। लेकिन नर्स के हिस्से में वह सम्मान नहीं है जिसकी वह हकदार हैं।
20 साल की नौकरी के बाद आज उपेक्षित.
मलखान सिंह जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स कांति देवी ने बताया कि 20 साल की नौकरी के बाद हालत यह है कि वह आज वह अपने इंक्रीमेंट के लिए औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए अपने ही बीच के लोगों के बीच भटक रही हैं। हाथ में कागज लिए कांति देवी मैटर्न के रूम में पहुंचती हैं तो वहां ताला लगा मिलता है। अपने सहकर्मियों के नाम लेकर उन्हें जिम्मेदार ठहराती हैं तो कभी अपनी स्थिति पर अफसोस जाहिर करती हैं। लेकिन जिस समस्या के समाधान की उन्हें उम्मीद होती है उससे उन्हें निराश ही होना होता है। एक और नर्स वहीं पर आती हैं लेकिन उन्हें हाजिरी रजिस्टर नहीं मिलता। उनके पास भी झुंझलाने के सिवाय कुछ विकल्प नहीं है। यहां गौरतलब है कि जिला अस्पताल में करीब 45 स्टाफ नर्सों की जरूरत है लेकिन उपलब्ध केवल 19 ही हैं।
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नर्सों के गौरवशाली अतीत का फोटो
मलखान सिंह जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में बने मैटर्न रूम में एक बहुत पुराना फोटो लगा है। वह फोटो नर्सों के गौरवशाली अतीत और उनकी गरिमा की कहानी बयां करता है। इस फोटो में नर्सें ब्रिटिश काल की अपनी यूनिफार्म में बेहद अनुशासित और विशिष्टता के साथ नजर आ रही हैं। पुराने लोग कहते हैं कि यह वह दौर था जब वार्ड में किसी नर्स के आने पर किसी तीमारदार के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकलता था। नर्स का रुतबा किसी डाक्टर से कम नहीं था। लेकिन इस फोटो की सतह पर जमी धूल बता रही है कि वह गरिमा भी भी धुंधला ही चुकी है।
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‘नर्सें वह काम करती हैं जो मरीज के तीमारदार तक नहीं करते। इसके बाद भी नर्सों को सही सम्मान नहीं मिला है। हमारे यहां नर्सें मानक से कम हैं लेकिन मरीज के साथ हमारा रिश्ता भावनाओं पर आधारित होता है हमारी संख्या पर नहीं। कोशिश रहती है कोई शिकायत नहीं हो’
- डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, मोहन लाल गौतम जिला महिला चिकित्सालय