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सर्दी का सितम कम नहीं शीतलहर ने चुभोए नश्तर
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
Updated Tue, 26 Jan 2016 01:31 AM IST
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सोमवार को कोहरे और सर्दी ने फिर अपने तेवर दिखाए। गलन भरी सर्दी में पारा लुढ़क गया। सुबह से कई घंटे तक घना कोहरा छाया रहा और सर्द हवाएं चलती रहीं। पूरे दिन थोड़ी देर के लिए ही सूरज का दीदार हुआ। शीतलहर से जन-जीवन प्रभावित हुआ।
पिछले दो दिन से शीतलहर का प्रकोप थोड़ा कम था और धूप ने सर्दी से लोगों का राहत दी थी, लेकिन सोमवार को फिर सर्दी के तेवर तल्ख हो गए। सुबह से कई घंटे शहर कोहरे की चादर से ढका रहा। कोहरे का सबसे ज्यादा असर यातायात पर पड़ा। वाहन रेंग-रेंग कर चले और लोगों को दुर्घटना का भय सताता रहा।
दोपहर को आसमान में सूरज का थोड़ी देर के लिए दीदार हुआ और हल्की धूप भी निकली लेकिन इससे सर्दी का असर कम नहीं हुआ। गलन और ज्यादा बढ़ गई और पारा नीचे आ गया। सर्द हवाएं पूरे दिन लोगों के शरीर पर नश्तर की तरह चुभती रही। गलन भरी सर्दी से बचने के लिए लोगों ने तरह-तरह के इंतजाम किए।
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किसी ने गर्म कपड़ों के सहारे खुद को सर्दी से बचाया तो किसी ने अलाव का सहारा लिया। कई दिन बाद फिर सामान्य जनजीवनशीतलहर के प्रकोप से प्रभावित हुआ। शाम ढलने के बाद बाजारोें में सन्नाटा छा गया और लोग मजबूरी में ही घरों से बाहर निकले।
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पिछले दो दिन से शीतलहर का प्रकोप थोड़ा कम था और धूप ने सर्दी से लोगों का राहत दी थी, लेकिन सोमवार को फिर सर्दी के तेवर तल्ख हो गए। सुबह से कई घंटे शहर कोहरे की चादर से ढका रहा। कोहरे का सबसे ज्यादा असर यातायात पर पड़ा। वाहन रेंग-रेंग कर चले और लोगों को दुर्घटना का भय सताता रहा।
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दोपहर को आसमान में सूरज का थोड़ी देर के लिए दीदार हुआ और हल्की धूप भी निकली लेकिन इससे सर्दी का असर कम नहीं हुआ। गलन और ज्यादा बढ़ गई और पारा नीचे आ गया। सर्द हवाएं पूरे दिन लोगों के शरीर पर नश्तर की तरह चुभती रही। गलन भरी सर्दी से बचने के लिए लोगों ने तरह-तरह के इंतजाम किए।
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किसी ने गर्म कपड़ों के सहारे खुद को सर्दी से बचाया तो किसी ने अलाव का सहारा लिया। कई दिन बाद फिर सामान्य जनजीवनशीतलहर के प्रकोप से प्रभावित हुआ। शाम ढलने के बाद बाजारोें में सन्नाटा छा गया और लोग मजबूरी में ही घरों से बाहर निकले।