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अलीगढ़ : कहां गईं लाखों की 23 भैंसें, क्यों नहीं लौटा रही पुलिस ?
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आगरा से अलीगढ़ आते समय मडराक पुलिस द्वारा पांच जनवरी को पकड़ी गईं लाखों रुपये कीमत की दुधारू 23 भैंसें आखिर कहां गईं। पुलिस उन्हें क्यों वापस नहीं कर रही है। गोशाला संचालक भी हठधर्मिता अपनाए हुए है। तीन-तीन आदेश की अवहेलना पर सोमवार को न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कोतवाल को चेतावनी देकर मंगलवार को तलब किया है। साथ में एसएसपी को पत्र लिख कार्रवाई की संस्तुति की है।
वाकया इस तरह है कि मूल रूप से सिकंदराराऊ हाल निवासी भुजपुरा का पशु व्यापारी शानू पांच जनवरी को आगरा से एक वाहन में 23 भैंसें खरीदकर ला रहा था। सभी दुधारू पशु बताए गए हैं, जिन्हें मडराक पुलिस ने चेकिंग में पकड़ा और पशु क्रूरता आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कर शानू को जेल भेज दिया। पशुओं को पहले थाने में रखा। फिर आसना स्थित गोशाला में रखवा दिया। बाद में न्यायालय से शानू रिहा हो गया। वाहन भी रिलीज कर दिया गया। मगर 9 फरवरी के जमानत आदेश पर आज तक पशुओं को रिहा नहीं किया गया।
अदालत का आदेश लेकर जब पीड़ित थाने और फिर गोशाला गया तो उससे कहा गया कि पशुओं के रखखाव में साढ़े चार लाख खर्च हुए हैं। पहले उनका भुगतान करो, तब पशु मिलेंगे। इस पर फिर शानू ने कोर्ट में अर्जी दी। इस पर कोर्ट ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से इस संबंध में नियम की जानकारी मांगी। इस पर रिपोर्ट आई कि एक पशु के रखरखाव पर शासन ने 30 रुपये प्रतिदिन नियत कर रखा है। इस पर अदालत ने आदेश दिया कि शानू 30 रुपये प्रतिदिन के अनुसार एक पशु का भुगतान करेगा, उसे पशु दिए जाएं। इस आदेश के बाद भी उसे पशु नहीं दिए गए।
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इस मामले में शानू की ओर से पैरोकारी कर रहे अधिवक्ता सुरेश चंद्र गौतम ने बताया कि अब फिर कोर्ट में अर्जी दी गई। जिसमें तीन-तीन आदेश के बाद भी पशु न दिए जाने का उल्लेख किया गया। इस पर जेएम प्रथम की अदालत ने इंस्पेक्टर मडराक को नोटिस जारी कर कहा है कि क्यों न आप के खिलाफ अवहेलना में कार्रवाई की जाए। आप मंगलवार को अदालत में हाजिर होकर स्पष्ट करें। साथ में एसएसपी को पत्र लिखकर पूरा प्रकरण बताते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
पहले से तीन मुकदमे दर्ज हैं गोशाला संचालक पर
अधिवक्ता सुरेश चंद गौतम के अनुसार, इस मामले में जब न्यायालय ने गोशाला संचालक के विषय में थाने से जानकारी तलब की तो पता चला कि उस पर पहले से तीन-तीन मुकदमे दर्ज हैं। वह मुकदमे भी इसी तरह के विवाद के हैं। मडराक पुलिस से सांठगांठ कर वह पशुओं को अपने यहां रखता है। फिर रुपया वसूलकर उन्हें छोड़ता है। इनमें एक मुकदमा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का है। मडराक से जुड़े एक मुकदमे में गोशाला संचालक के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है। यह भी जानकारी मिली है कि गोशाला संचालक ने शानू के 23 पशुओं में से पांच पशु बेच दिए हैं। इन तमाम तथ्यों से भी अदालत को अवगत कराया गया है। अब मामले में मंगलवार को आगे कार्रवाई तय की जाएगी।
आखिर पुलिस की नजर-ए-इनायत क्यों
अधिवक्ता सुरेश चंद गौतम के अनुसार जब नियमानुसार सभी जमानतें हो चुकी हैं। फिर मडराक पुलिस गोशाला संचालक पर क्यों नजर-ए-इनायत बनाए हुए है। ये बड़ा सवाल है, जबकि पीड़ित की ओर से पशुओं की खरीद बिक्री आदि की सभी पर्ची दिखाकर जमानत पाई गई है। मगर पुलिस उसकी सुनवाई नहीं कर रही है।
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वाकया इस तरह है कि मूल रूप से सिकंदराराऊ हाल निवासी भुजपुरा का पशु व्यापारी शानू पांच जनवरी को आगरा से एक वाहन में 23 भैंसें खरीदकर ला रहा था। सभी दुधारू पशु बताए गए हैं, जिन्हें मडराक पुलिस ने चेकिंग में पकड़ा और पशु क्रूरता आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कर शानू को जेल भेज दिया। पशुओं को पहले थाने में रखा। फिर आसना स्थित गोशाला में रखवा दिया। बाद में न्यायालय से शानू रिहा हो गया। वाहन भी रिलीज कर दिया गया। मगर 9 फरवरी के जमानत आदेश पर आज तक पशुओं को रिहा नहीं किया गया।
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अदालत का आदेश लेकर जब पीड़ित थाने और फिर गोशाला गया तो उससे कहा गया कि पशुओं के रखखाव में साढ़े चार लाख खर्च हुए हैं। पहले उनका भुगतान करो, तब पशु मिलेंगे। इस पर फिर शानू ने कोर्ट में अर्जी दी। इस पर कोर्ट ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से इस संबंध में नियम की जानकारी मांगी। इस पर रिपोर्ट आई कि एक पशु के रखरखाव पर शासन ने 30 रुपये प्रतिदिन नियत कर रखा है। इस पर अदालत ने आदेश दिया कि शानू 30 रुपये प्रतिदिन के अनुसार एक पशु का भुगतान करेगा, उसे पशु दिए जाएं। इस आदेश के बाद भी उसे पशु नहीं दिए गए।
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इस मामले में शानू की ओर से पैरोकारी कर रहे अधिवक्ता सुरेश चंद्र गौतम ने बताया कि अब फिर कोर्ट में अर्जी दी गई। जिसमें तीन-तीन आदेश के बाद भी पशु न दिए जाने का उल्लेख किया गया। इस पर जेएम प्रथम की अदालत ने इंस्पेक्टर मडराक को नोटिस जारी कर कहा है कि क्यों न आप के खिलाफ अवहेलना में कार्रवाई की जाए। आप मंगलवार को अदालत में हाजिर होकर स्पष्ट करें। साथ में एसएसपी को पत्र लिखकर पूरा प्रकरण बताते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
पहले से तीन मुकदमे दर्ज हैं गोशाला संचालक पर
अधिवक्ता सुरेश चंद गौतम के अनुसार, इस मामले में जब न्यायालय ने गोशाला संचालक के विषय में थाने से जानकारी तलब की तो पता चला कि उस पर पहले से तीन-तीन मुकदमे दर्ज हैं। वह मुकदमे भी इसी तरह के विवाद के हैं। मडराक पुलिस से सांठगांठ कर वह पशुओं को अपने यहां रखता है। फिर रुपया वसूलकर उन्हें छोड़ता है। इनमें एक मुकदमा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का है। मडराक से जुड़े एक मुकदमे में गोशाला संचालक के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है। यह भी जानकारी मिली है कि गोशाला संचालक ने शानू के 23 पशुओं में से पांच पशु बेच दिए हैं। इन तमाम तथ्यों से भी अदालत को अवगत कराया गया है। अब मामले में मंगलवार को आगे कार्रवाई तय की जाएगी।
आखिर पुलिस की नजर-ए-इनायत क्यों
अधिवक्ता सुरेश चंद गौतम के अनुसार जब नियमानुसार सभी जमानतें हो चुकी हैं। फिर मडराक पुलिस गोशाला संचालक पर क्यों नजर-ए-इनायत बनाए हुए है। ये बड़ा सवाल है, जबकि पीड़ित की ओर से पशुओं की खरीद बिक्री आदि की सभी पर्ची दिखाकर जमानत पाई गई है। मगर पुलिस उसकी सुनवाई नहीं कर रही है।