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पांच दिन बाद भी व्यवस्था बोनी, कब निलकेगा शहर से पानी
सार
क्योंकि शहर में पांच दिन से पानी भरा हुआ है।मेयर और नगर निगम सिस्टम से ये सवालबारिश का मौसम जून से शुरू होकर सितंबर तक जारी रहता है।वह भी अपना खुद का घर न होने के कारण यहां डेरा डाले हुए हैं।
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गूलर रोड पर हुए जलभराव से गुजरते वाहन।
- फोटो : CITY OFFICE
विस्तार
इन्हें दिखावटी इंतजाम ही कहा कहा जाए। क्योंकि शहर में पांच दिन से पानी भरा हुआ है। नगर निगम की ओर से इंतजामों का ढोल पीटा जा रहा है। मगर शहर में जल भराव के कारण हालत बद से बदतर हैं। जिसको लेकर लोग सोशल मीडिया पर जमकर छीछालेदार कर रहे हैं। तर्क दिए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि यह तो गनीमत कि पूरे मौसम बारिश नहीं हुई। अगर बारिश का यह सिलसिला बारिश के मौसम में होता तो शहर का क्या हाल होता? महज पांच दिन की बारिश से बदइंतजामियों को देख यही कह रहे हैं कि नगर निगम बारिश से पहले सिल्ट सफाई से लेकर तमाम इंतजामों के अब तक ढोल पीटता रहा। अब बारिश हुई तो उसके इस ढोल की पोल खुल गई।
जलभराव से बेहाल लोग गढ़ रहे ये तर्क
पांच दिन से शहर में जल भराव है। कालोनी और घरों में पानी भरा हुआ है। सामान का नुकसान हो रहा है। रोजगार भी प्रभावित है। लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। बीमारी भी पांव पसारने की तैयारी में है। ये हाल स्मार्ट सिटी का? कहने को हर बार की तरह इस बार भी नाला-सीवर सफाई, उसमें होने वाले लेबर, मशीनरी, डीजल व पंपिंग आदि पर कई करोड़ा रुपया खर्च किया गया। मगर मौसम के अंतिम दौर में हुई इस बारिश ने पहले से किए गए इंतजामों की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए। इस पर न सिस्टम की आवाज आ रही है और न जनप्रतिनिधियों की, सब चुप्पी साधे हैं। आखिर क्यों? क्या किसी की जवाबदेही नहीं है इस सबके लिए?
मेयर और नगर निगम सिस्टम से ये सवाल
बारिश का मौसम जून से शुरू होकर सितंबर तक जारी रहता है। अगर पूरे चार माह यह हाल रहता तो क्या शहर ऐसे ही डूबा रहता। आखिर दशकों से गढ़े जा रहे तर्क कटोरेनुमा शहर में जलनिकासी व जलभराव के स्थायी समाधान के लिए आज तक हल क्यों नहीं निकाला गया। अगर नियमानुसार नालों व सीवर सिस्टम की सफाई हुई थी तो आज वे क्यों अटे पड़े हैं और पानी जमा है। मगर कोई जवाब देने के बजाय खुद मेयर मो.फुरकान फेसबुक पर यह दलील दे रहे हैं कि नगर निगम अपना काम कर रहा है। जनता धैर्य का परिचय दे। इसी तरह अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता की ओर से बयान जारी कर धैर्य रखने की अपील की जा रही है।
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न आपदा प्रबंधन दिखा, न कहीं कोई सहायता पहुंची
कहने को अपने जिले में आपदा प्रबंधन की टीम भी गठित है। जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ शहर के कुछ लोगों को शामिल कर रखा है। मगर यह टीम भी इस आपदा में इन दिनों कहीं सक्रिय नहीं दिखाई दे रही। जिन इलाकों में घरों में पानी भरा है और लोग खाने-दाने तक को मौहताज हैं। वहां उन तक सहायता पहुंचाने तक को कोई टीम नहीं दिख रही। वे लोग कैसे खाने पीने का इंतजाम कर रहे हैं। उनको क्या परेशानियां हैं, कहीं कोई बीमारी तो नहीं। यह सब जानने या उन्हें इस दिशा में मदद के लिए किसी इलाके में अभी कोई टीम नहीं पहुंची।
ये है राहत शिविरों की हकीकत, एक पर ताला
कहने को नगर निगम ने तीन राहत शिविर भी खोल रखे हैं। जहां रहने, खाने व सुरक्षा के इंतजाम का दावा है। इनमें गांधीपार्क बस स्टैंड के पास का राहत शिविर जरूर शुक्रवार को खुला मिला। जिसमें गांव चिलकौरा की महिला सोन देवी मिलीं। वह भी अपना खुद का घर न होने के कारण यहां डेरा डाले हुए हैं। कहती हैं कि खाना पीना सब मिल रहा है। मगर गूलर रोड के राहत शिविर पर दोपहर में ताला लटका मिला। वहां आसपास के लोगों से जानकारी करने का प्रयास किया। मगर कोई कुछ नहीं बता सका। इसी तरह भुजपुरा के राहत शिविर में रात तीन लोग थे। वे दिन में भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि खाना आदि मिल रहा है।
शाहजमाल में पहुंचे सियासी संगठन
शाहजमाल में सियासी लोगों ने पहुंचना शुरू कर दिया है। एक तरफ भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की टीम ने फरहीन मोहसिन की अगुवाई में पहुंचकर हालात का जायजा लिया और लोगों से समस्या पूछी। उन्हें वहां भरोसा दिलाया कि वे अधिकारियों तक उनकी बात पहुंचाएंगे। इस दौरान उनके साथ मोहसिन, जुबैर, अली हसन, गुड्डू आदि मौजूद रहे। इसी तरह बसपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रतनदीप सिंह व जिला पंचायत सदस्य फारुख अहमद ने वहां पहुंचकर खाद्य सामग्री वितरित की। इस मौके पर पार्षद पति मुराद बच्चन, नौशाद अली , शोएव अल्वी, इरशाद अल्वी, राहिल भाई, बीवीएफ नेता रनबीर सागर आदि रहे।
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जलभराव से बेहाल लोग गढ़ रहे ये तर्क
पांच दिन से शहर में जल भराव है। कालोनी और घरों में पानी भरा हुआ है। सामान का नुकसान हो रहा है। रोजगार भी प्रभावित है। लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। बीमारी भी पांव पसारने की तैयारी में है। ये हाल स्मार्ट सिटी का? कहने को हर बार की तरह इस बार भी नाला-सीवर सफाई, उसमें होने वाले लेबर, मशीनरी, डीजल व पंपिंग आदि पर कई करोड़ा रुपया खर्च किया गया। मगर मौसम के अंतिम दौर में हुई इस बारिश ने पहले से किए गए इंतजामों की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए। इस पर न सिस्टम की आवाज आ रही है और न जनप्रतिनिधियों की, सब चुप्पी साधे हैं। आखिर क्यों? क्या किसी की जवाबदेही नहीं है इस सबके लिए?
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मेयर और नगर निगम सिस्टम से ये सवाल
बारिश का मौसम जून से शुरू होकर सितंबर तक जारी रहता है। अगर पूरे चार माह यह हाल रहता तो क्या शहर ऐसे ही डूबा रहता। आखिर दशकों से गढ़े जा रहे तर्क कटोरेनुमा शहर में जलनिकासी व जलभराव के स्थायी समाधान के लिए आज तक हल क्यों नहीं निकाला गया। अगर नियमानुसार नालों व सीवर सिस्टम की सफाई हुई थी तो आज वे क्यों अटे पड़े हैं और पानी जमा है। मगर कोई जवाब देने के बजाय खुद मेयर मो.फुरकान फेसबुक पर यह दलील दे रहे हैं कि नगर निगम अपना काम कर रहा है। जनता धैर्य का परिचय दे। इसी तरह अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता की ओर से बयान जारी कर धैर्य रखने की अपील की जा रही है।
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न आपदा प्रबंधन दिखा, न कहीं कोई सहायता पहुंची
कहने को अपने जिले में आपदा प्रबंधन की टीम भी गठित है। जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ शहर के कुछ लोगों को शामिल कर रखा है। मगर यह टीम भी इस आपदा में इन दिनों कहीं सक्रिय नहीं दिखाई दे रही। जिन इलाकों में घरों में पानी भरा है और लोग खाने-दाने तक को मौहताज हैं। वहां उन तक सहायता पहुंचाने तक को कोई टीम नहीं दिख रही। वे लोग कैसे खाने पीने का इंतजाम कर रहे हैं। उनको क्या परेशानियां हैं, कहीं कोई बीमारी तो नहीं। यह सब जानने या उन्हें इस दिशा में मदद के लिए किसी इलाके में अभी कोई टीम नहीं पहुंची।
ये है राहत शिविरों की हकीकत, एक पर ताला
कहने को नगर निगम ने तीन राहत शिविर भी खोल रखे हैं। जहां रहने, खाने व सुरक्षा के इंतजाम का दावा है। इनमें गांधीपार्क बस स्टैंड के पास का राहत शिविर जरूर शुक्रवार को खुला मिला। जिसमें गांव चिलकौरा की महिला सोन देवी मिलीं। वह भी अपना खुद का घर न होने के कारण यहां डेरा डाले हुए हैं। कहती हैं कि खाना पीना सब मिल रहा है। मगर गूलर रोड के राहत शिविर पर दोपहर में ताला लटका मिला। वहां आसपास के लोगों से जानकारी करने का प्रयास किया। मगर कोई कुछ नहीं बता सका। इसी तरह भुजपुरा के राहत शिविर में रात तीन लोग थे। वे दिन में भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि खाना आदि मिल रहा है।
शाहजमाल में पहुंचे सियासी संगठन
शाहजमाल में सियासी लोगों ने पहुंचना शुरू कर दिया है। एक तरफ भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की टीम ने फरहीन मोहसिन की अगुवाई में पहुंचकर हालात का जायजा लिया और लोगों से समस्या पूछी। उन्हें वहां भरोसा दिलाया कि वे अधिकारियों तक उनकी बात पहुंचाएंगे। इस दौरान उनके साथ मोहसिन, जुबैर, अली हसन, गुड्डू आदि मौजूद रहे। इसी तरह बसपा के पूर्व जिला अध्यक्ष रतनदीप सिंह व जिला पंचायत सदस्य फारुख अहमद ने वहां पहुंचकर खाद्य सामग्री वितरित की। इस मौके पर पार्षद पति मुराद बच्चन, नौशाद अली , शोएव अल्वी, इरशाद अल्वी, राहिल भाई, बीवीएफ नेता रनबीर सागर आदि रहे।

नगर सेंट्रल पार्क अपार्टमेंट में भरे पानी को निकालते नगर निगम कर्मी।- फोटो : CITY OFFICE

मैरिस रोड पर जलभराव के बीच निकलकर जाते लोग । - फोटो : CITY OFFICE