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अलीगढ़ः जब लक्ष्य कठिन लगे और मुश्किलें आएं तो राजा महेंद्र को याद करें युवा : मोदी
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राजा महेन्द्र प्रताप राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में सम्बोधित करते पीएम।
- फोटो : CITY OFFICE
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राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को राजा महेंद्र प्रताप सिंह के जीवन और संघर्ष से प्रेरणा लेने की बात कही। राजा महेंद्र प्रताप के साथ स्वाधीनता संग्राम में उनके सहयोगी रहे गुजरात के क्रांतिकारी श्याम जी कृष्ण वर्मा का भी जिक्र किया। साथ ही 11 वीं शताब्दी में महमूद गजनवी के सेनापति मियां गाजी को हराने वाले श्रावस्ती के राजा सुहेलदेव के संबंध में कहा कि आजादी के 75वें वर्ष का पर्व मानते समय ऐसे राष्ट्रनायकों के योगदान को भी वह नमन करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महाराजा सुहेल देव जी हों, दीनबंधु चौधरी छोटूराम हों या फिर राजा महेंद्र प्रताप सिंह हों, राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराने का ईमानदार प्रयास आज देश में हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहा है तो इन कोशिशों को और गति दी गई है। भारत की आजादी में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के योगदान को नमन करने का यह प्रयास ऐसा ही पावन अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के हर उस युवा को, जो बड़े सपने देख रहा है, जो बड़े लक्ष्य पाना चाहता है, उसे राजा महेंद्र प्रताप सिंह के विषय में अवश्य जानना चाहिए, अवश्य पढ़ना चाहिए।
राजा महेंद्र प्रताप सिंह की अदम्य इच्छा शक्ति, अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर गुजरने वाली जीवटता आज भी हमें प्रेरित करती है। उन्होंने अपने जीवन का एक-एक पल देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया। पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि जब भी उन्हें कोई लक्ष्य कठिन लगे, कुछ मुश्किलें नजर आएं, तो वे राजा महेंद्र प्रताप सिंह को जरूर याद कर लें। इससे उनका हौसला बुलंद हो जाएगा।
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72 वर्ष बाद क्रांतिकारी श्याम जी कृष्ण की अस्थियां भारत ला सका : मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के एक और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, गुजरात के सपूत श्याम जी कृष्ण वर्मा का भी स्मरण हो रहा है। प्रथम विश्वयुद्ध के समय राजा महेंद्र प्रताप विशेष तौर पर श्याम जी वर्मा और लाला हरदयाल से मिलने के लिए यूरोप गए। उसी बैठक में जो दिशा तय हुई, उसका परिणाम हमें अफगानिस्तान में भारत की पहली निर्वासित सरकार के तौर पर देखने को मिला। इस सरकार का नेतृत्व राजा महेंद्र प्रताप ने ही किया। यह मेरा सौभाग्य था कि जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब श्याम जी वर्मा की अस्थियों को 72 साल बाद भारत लाने में सफलता मिली। अगर आपको कच्छ जाने का मौका मिले तो वहां मांडवी में उनका बहुत प्रेरक स्मारक है। वहां उनके 80 कलश रखे हैं, जो मां भारती के लिए जीने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे फिर से एक बार फिर से यह सौभाग्य मिला है कि राजा महेंद्र प्रताप जैसे विजनरी और महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर बन रही यूनिवर्सिटी का शिलान्यास कर रहा हूं। ऐसे पवित्र अवसर पर आप बड़ी संख्या में आशीर्वाद देने आए हैं। जनता जनार्दन का दर्शन करना शक्ति दायक होता है।
आजादी ही नहीं, बल्कि भारत निर्माण भी था राजा का सपना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह देश की आजादी के लिए ही नहीं लड़े, उन्होंने भारत के भविष्य के निर्माण में भी सक्रिय योगदान दिया था। उन्होंने अपनी देश विदेश की यात्राओं से मिले अनुुभव का उपयोग भारत की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए किया। वृंदावन में आधुनिक टेक्निकल कॉलेेज अपने संसाधनों से पैतृक संपत्ति को दान करने बनवाया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने जमीन दी थी। आज आजादी के इस अमृत काल में जब 21 वीं सदी का भारत शिक्षा और कौशल के नए दौर की तरफ बढ़ चला है, तब मां भारती के ऐसे अमर सपूत के नाम पर इस विश्वविद्यालय का निर्माण उनको सच्ची कार्यांजलि है। इस विचार को साकार करने के लिए योगी और उनकी पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महाराजा सुहेल देव जी हों, दीनबंधु चौधरी छोटूराम हों या फिर राजा महेंद्र प्रताप सिंह हों, राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराने का ईमानदार प्रयास आज देश में हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मना रहा है तो इन कोशिशों को और गति दी गई है। भारत की आजादी में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के योगदान को नमन करने का यह प्रयास ऐसा ही पावन अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के हर उस युवा को, जो बड़े सपने देख रहा है, जो बड़े लक्ष्य पाना चाहता है, उसे राजा महेंद्र प्रताप सिंह के विषय में अवश्य जानना चाहिए, अवश्य पढ़ना चाहिए।
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह की अदम्य इच्छा शक्ति, अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी कर गुजरने वाली जीवटता आज भी हमें प्रेरित करती है। उन्होंने अपने जीवन का एक-एक पल देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया। पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि जब भी उन्हें कोई लक्ष्य कठिन लगे, कुछ मुश्किलें नजर आएं, तो वे राजा महेंद्र प्रताप सिंह को जरूर याद कर लें। इससे उनका हौसला बुलंद हो जाएगा।
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72 वर्ष बाद क्रांतिकारी श्याम जी कृष्ण की अस्थियां भारत ला सका : मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के एक और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, गुजरात के सपूत श्याम जी कृष्ण वर्मा का भी स्मरण हो रहा है। प्रथम विश्वयुद्ध के समय राजा महेंद्र प्रताप विशेष तौर पर श्याम जी वर्मा और लाला हरदयाल से मिलने के लिए यूरोप गए। उसी बैठक में जो दिशा तय हुई, उसका परिणाम हमें अफगानिस्तान में भारत की पहली निर्वासित सरकार के तौर पर देखने को मिला। इस सरकार का नेतृत्व राजा महेंद्र प्रताप ने ही किया। यह मेरा सौभाग्य था कि जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब श्याम जी वर्मा की अस्थियों को 72 साल बाद भारत लाने में सफलता मिली। अगर आपको कच्छ जाने का मौका मिले तो वहां मांडवी में उनका बहुत प्रेरक स्मारक है। वहां उनके 80 कलश रखे हैं, जो मां भारती के लिए जीने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे फिर से एक बार फिर से यह सौभाग्य मिला है कि राजा महेंद्र प्रताप जैसे विजनरी और महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर बन रही यूनिवर्सिटी का शिलान्यास कर रहा हूं। ऐसे पवित्र अवसर पर आप बड़ी संख्या में आशीर्वाद देने आए हैं। जनता जनार्दन का दर्शन करना शक्ति दायक होता है।
आजादी ही नहीं, बल्कि भारत निर्माण भी था राजा का सपना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह देश की आजादी के लिए ही नहीं लड़े, उन्होंने भारत के भविष्य के निर्माण में भी सक्रिय योगदान दिया था। उन्होंने अपनी देश विदेश की यात्राओं से मिले अनुुभव का उपयोग भारत की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए किया। वृंदावन में आधुनिक टेक्निकल कॉलेेज अपने संसाधनों से पैतृक संपत्ति को दान करने बनवाया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने जमीन दी थी। आज आजादी के इस अमृत काल में जब 21 वीं सदी का भारत शिक्षा और कौशल के नए दौर की तरफ बढ़ चला है, तब मां भारती के ऐसे अमर सपूत के नाम पर इस विश्वविद्यालय का निर्माण उनको सच्ची कार्यांजलि है। इस विचार को साकार करने के लिए योगी और उनकी पूरी टीम को बहुत बहुत बधाई।