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अलीगढ़ः भाजपा नेता की गिरफ्तारी के लिए आई पश्चिम बंगाल पुलिस को पीटा

Tue, 21 Sep 2021 06:35 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 21 Sep 2021 06:35 PM IST
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West Bengal police beaten up for arresting BJP leader
ममता बनर्जी के सिर पर 11 लाख का इनाम रखने वाला युवा भाजपा नेता योगेश वार्ष्णेय - फोटो : CITY OFFICE
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सिर पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित करने वाले युवा भाजपा नेता योगेश वार्ष्णेय की गिरफ्तारी और कुर्की नोटिस चस्पा करने के लिए पश्चिम बंगाल की पुलिस शुक्रवार को फिर पहुंच गई। सादा कपड़ों में घर में घुसे दो पुलिसकर्मियों पर महिलाओं से अभद्रता और मारपीट का आरोप लगा। इसी बीच खबर पर पहुंचे तमाम युवा भाजपाइयों ने पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की करते हुए मारपीट तक कर दी। जमकर हंगामा हुआ। बाद में पहुंचे सांसद व विधायकों ने किसी तरह लोगों को शांत किया और कहा कि योगेश को किसी भी कीमत पर पश्चिम बंगाल पुलिस को नहीं ले जाने दिया जाएगा। एक घंटे तक चले हंगामे के बाद स्थानीय पुलिस किसी तरह दोनों को बचाकर ले गई। देर रात थाने में वार्ता जारी थी।
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वाकया अगस्त 2017 का है, जब पश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले में हनुमान जयंती के मौके पर जुलूस निकाल रहे हिंदू जागरण मंच कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ था। इससे आहत शहर के गांधी नगर निवासी युवा भाजपा नेता योगेश वार्ष्णेय ने लाठीचार्ज के लिए वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बताया और उनका सिर लेकर आने वाले को 11 लाख के इनाम की घोषणा करते हुए बयान जारी कर दिया था। 12 अगस्त 2017 को इस बयान के बाद देश की सियासत में भूचाल मचा था। संसद तक में यह मुद्दा गूंजा था। इस मामले में टीएमसी के वीरभूमि के ही नेता ने वहां मुकदमा दर्ज कराया था। उस मुकदमे पर उस समय भी पश्चिम बंगाल पुलिस योगेश की गिरफ्तारी को यहां आई थी। मगर उस समय भी भाजपा नेताओं के दबाव में साथ नहीं ले जा सकी थी।
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इधर, अब इस मामले में शुक्रवार शाम को पश्चिम बंगाल सीआईडी के एसआई सुवासीष दत्त व सिपाही आलमगीर न्यायालय से जारी सीआरपीसी की धारा 82 के तहत कुर्की नोटिस/गिरफ्तारी वारंट लेकर यहां पहुंचे। सबसे पहले ये दोनों पुलिसकर्मी गांधीपार्क थाने गए, जहां उनकी मुलाकात एसएसआई गांधीपार्क शिवप्रताप सिंह से हुई। एसएसआई ने चौकी प्रभारी अचलताल संदीप के लिए प्रकरण संदर्भित कर दिया और उन्हें अचल चौकी भेज दिया। इसके बाद शाम करीब साढ़े सात बजे ये दोनों अचल चौकी के दरोगा व सिपाही को साथ लेकर योगेश के घर पहुंचे। स्थानीय चौकी प्रभारी व सिपाही बाहर दरवाजे पर ही रुक गए, जबकि पश्चिम बंगाल से आई पुलिस योगेश के घर में उसका नाम पुकारते हुए घुस गई। उस समय योगेश घर पर नहीं थे। पहली मंजिल पर मौजूद उनकी मां व बहन ने पूछा कि आप कौन हैं तो आरोप है कि उन लोगों ने घर की तलाशी लेते हुए धक्का-मुक्की शुरू कर दी और विरोध किया तो मारपीट कर अभद्रता कर दी। इसी बीच चीख पुकार पर पड़ोस में रहने वाली पार्षद अल्का गुप्ता आईं तो उनके साथ भी अभद्रता व मारपीट कर दी। इस दौरान स्थानीय दरोगा संदीप ने बीचबचाव का प्रयास किया और बताया कि ये पश्चिम बंगाल की पुलिस है तो मामला और भड़क गया।
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इसी दौरान योगेश को सूचना मिली तो उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को सूचना दे दी। इस पर तमाम युवा भाजपाई उनके घर पहुंचे और घर में मौजूद दोनों पुलिसकर्मियों को पीट दिया। उनके हाथ में लगी वारंटों संबंधी पत्रावली और उनके आईडी कार्ड छीन लिए। इस पर उन्हें घर में ही रोक लिया और फिर खबर देकर सांसद सतीश गौतम, विधायक संजीव राजा, अनिल पाराशर, महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत, पूर्व मेयर शकुंतला भारती, युवा जिलाध्यक्ष मुकेश लोधी, महानगर अध्यक्ष अमन गुप्ता, प्रतीक चौहान, संजू बजाज, वैभव गौतम आदि पहुंच गए। उन्होंने पहुंचकर हंगामा कर रहे युवा भाजपाई शांत किए। इन नेताओं ने साफ कहा कि कोई योगेश को नहीं ले जाएगा।
इसी बीच खबर पर सीओ द्वितीय मोहसिन खान, इंस्पेक्टर गांधीपार्क भी आ गए। सांसद ने इस बात पर नाराजगी जताई कि बना आमद के गैर जनपद पुलिस कैसे यहां दबिश देने आ गई। इस पर स्पष्ट हुआ कि ये लोग थाने गए थे। चौकी से पुलिस भी साथ आई है। इस पर स्थानीय दरोगा को इस बात के लिए जिम्मेदार बताया कि वह दरवाजे पर क्यों रुका। घर में जब महिलाएं अकेली थीं तो उसे इन दोनों को बाहर ही रोकना था। दरवाजे पर खड़े होकर पहले बात करनी थी। अंदर जाकर इनके द्वारा अभद्रता मारपीट क्यों की गई। नेताओं ने इन दोनों के साथ-साथ स्थानीय दरोगा को भी इस मामले में लापरवाह करार देते हुए उसके खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही। कुल मिलाकर एक घंटे तक चले हंगामे व विवाद के बाद किसी तरह दोनों को निकालकर थाना गांधीपार्क ले जाया गया। इस दौरान पहुंचने वालों में मनोज शर्मा, विशाल देशभक्त, हर्षद हिंदू, ब्रजेश कंटक, अतुल राजा जी, मनीष राय, आदि थे।
योगेश की मां ने दी मारपीट, लूट की तहरीर
योगेश की मां पूनम की ओर से दोनों पुलिसकर्मियों को नामजद करते हुए गांधीपार्क में तहरीर दी गई है, जिसमें सीधे आरोप है कि सादा कपड़ों में घर में घुसकर इन्होंने मारपीट, अभद्रता की। मदद को आईं पार्षद अल्का गुप्ता से मारपीट, अभद्रता व आपत्तिजनक हरकत की। बाद में धमकी देते हुए 15 हजार रुपये व जंजीर छीन ली। बाद में मोहल्ले के लोगों ने एकत्रित होकर किसी तरह बचाया।
ये पश्चिम बंगाल नहीं, यूपी है : मुकेश लोधी
इस घटनाक्रम पर युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष मुकेश लोधी ने पश्चिम बंगाल पुलिस को सीधी चेतावनी दी है कि वहां की पुलिस योगेश क्या किसी भाजपा कार्यकर्ता को नहीं ले जा सकती है। यह पश्चिम बंगाल नहीं यूपी है। आगे से इस तरह की हरकत की तो परिणाम गंभीर होंगे। वहीं उन्होंने स्थानीय दरोगा संदीप को भी इस प्रकरण के लिए जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि वे अगर दोनों को दरवाजे पर ही रोक लेते तो शायद यह घटना न होती। संदीप पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
योगेश ने लिया था यू टर्न
योगेश के बयान से भाजपा ने किनारा कर लिया था। उस समय की युवा मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम महाजन ने योगेश का पार्टी से कोई नाता नहीं बताया था। खुद योगेश से उन्होंने मोबाइल पर बात की थी तो इस पर योगेश ने यू-टर्न लेते हुए कहा था कि उसने आवेश में यह बयान दे दिया है। इसका पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। यही पोस्ट उन्होंने फेसबुक पर भी की थी।
अलीगढ़ में भी दर्ज हुआ था मुकदमा
उस समय अलीगढ़ टीएमसी के जिलाध्यक्ष रामफूल उपाध्याय ने एसएसपी से बीजेपी नेता पर कार्रवाई करने की मांग की थी। उस समय एसएसपी के आदेश पर सिविल लाइंस में धारा 506 (हत्या की धमकी) समेत अन्य धाराओं में यहां भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।
योगेश पर भी हुआ था 22 लाख इनाम
योगेश के इस बयान के बदले कोलकाता के टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम सैयद मोहम्मद नुरूर रहमान बरकती ने योगेश वार्ष्णेय का सिर कलम कर लाने वालों को 22 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की थी। ऐसा बयान देने वाले योगेश वार्ष्णेय के खिलाफ फतवा जारी करते हुए बरकती ने कहा यदि कोई भी योगेश वार्ष्णेय का सिर काट कर लाता है तो उसे इनाम में 22 लाख की राशि दी जाएगी।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने दी तहरीर, पूरे प्रकरण की होगी जांच : सीओ
सीओ द्वितीय मोहसिन खान ने बताया कि पश्चिम बंगाल की सीआईडी टीम कोर्ट के कुर्की नोटिस लेकर विधिक कार्रवाई के लिए सादा कपड़ों में गांधी नगर में योगेश के घर पहुंची थी। इस दौरान वहां उनका कुछ लोगों से वाद विवाद हुआ। बाद में हमने पहुंचकर वहां विवाद शांत कराया। उन्हें वहां से निकालकर थाने भेजा। वे किसी को यहां से पकड़कर नहीं ले जा रहे हैं। कुर्की नोटिस लेकर आए हैं। पुलिसककर्मियों के स्तर से यही तथ्य लिखित में दिया जा रहा है। रहा सवाल स्थानीय पुलिस की भूमिका का और उनके थाने जाने से लेकर चौकी और फिर चौकी स्टाफ के साथ जाने का तो इस पूरे तथ्य की जांच की जा रही है। स्थानीय पुलिस में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। पीड़ित परिवार ने भी तहरीर दी है, उन तथ्यों की जांच की जा रही है।
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