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Aligarh News: कारसेवा को जा रहे थे, पुलिस ने भेज दिया था जेल
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भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में 22 जनवरी को राममंदिर में रामलला विराजमान होंगे। इसको लेकर रामभक्तों में उत्साह है। कारसेवक उस दौर को याद कर रहे हैं, जब उन्होंने राममंदिर के लिए संघर्ष किया था। कारसेवा के लिए निकले रामभक्तों को पुलिस ने कस्बा में ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कारसेवक जेल जाने के दिन याद कर कह रहे हैं कि उनके जीवन में प्राण प्रतिष्ठा समारोह होना सौभाग्य की बात है।
कस्बा निवासी एलबीके स्कूल के प्रबंधक हरिमोहन अग्रवाल बताते हैं कि वर्ष 1990 में लालकृष्ण आडवाणी राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत कर चुके थे। हमने बैठक कर कारसेवा करने का संकल्प लिया। मैं रामकुमार नागर, डा. उमेश अग्रवाल, हरिश्याम त्यागी, योगेश शर्मा, स्व. लोहकू बाबा, विजय कुमार आदि 14 लोगों के साथ कारसेवा के लिए निकले थे। घर से निकलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
अलीगढ़ की जेल भर जाने के कारण आगरा की सेंट्रल जेल भेजा गया। यहां अन्य कारसेवकों के साथ हर रोज रामकथा में भाग लेते थे। 14 वें दिन हमें जेल से छोड़ा गया था। अपने जीवन में राम मंदिर को बनते और स्थापना समारोह देखना सौभाग्य की बात है।
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सराय बाजार निवासी रामकुमार नागर ने बताया कि 1990 में कारसेवा के लिए जो आंदोलन शुरू हुआ। उस टोली का हम हिस्सा बने। कारसेवा के लिए घर से निकले तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हमें अयोध्या तक नहीं पहुंचने की कमी खली थी। गांव-गांव जाकर हमने राम ज्योति जलाई थी। उस समय जवानी का जोश था और बंदिशों के बाद भी पीछे नहीं हटे।मन में जुनून और कोशिश पूरी तरह ईमानदार थी। भगवान राम का मंदिर बन रहा है। अपने जीवन में यह देखना किसी सपने के पूरा होने से कम नहीं है।
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कस्बा निवासी एलबीके स्कूल के प्रबंधक हरिमोहन अग्रवाल बताते हैं कि वर्ष 1990 में लालकृष्ण आडवाणी राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत कर चुके थे। हमने बैठक कर कारसेवा करने का संकल्प लिया। मैं रामकुमार नागर, डा. उमेश अग्रवाल, हरिश्याम त्यागी, योगेश शर्मा, स्व. लोहकू बाबा, विजय कुमार आदि 14 लोगों के साथ कारसेवा के लिए निकले थे। घर से निकलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
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अलीगढ़ की जेल भर जाने के कारण आगरा की सेंट्रल जेल भेजा गया। यहां अन्य कारसेवकों के साथ हर रोज रामकथा में भाग लेते थे। 14 वें दिन हमें जेल से छोड़ा गया था। अपने जीवन में राम मंदिर को बनते और स्थापना समारोह देखना सौभाग्य की बात है।
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सराय बाजार निवासी रामकुमार नागर ने बताया कि 1990 में कारसेवा के लिए जो आंदोलन शुरू हुआ। उस टोली का हम हिस्सा बने। कारसेवा के लिए घर से निकले तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हमें अयोध्या तक नहीं पहुंचने की कमी खली थी। गांव-गांव जाकर हमने राम ज्योति जलाई थी। उस समय जवानी का जोश था और बंदिशों के बाद भी पीछे नहीं हटे।मन में जुनून और कोशिश पूरी तरह ईमानदार थी। भगवान राम का मंदिर बन रहा है। अपने जीवन में यह देखना किसी सपने के पूरा होने से कम नहीं है।