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एएमयू में पूरी गरिमा के साथ करेंगे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का स्वागत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Mon, 26 Feb 2018 02:14 AM IST
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सात मार्च को प्रस्तावित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के 65वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन का विरोध कर रहे छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी व जैद शेरवानी आदि अलग-थलग पड़ गए हैं। एएमयू छात्र संघ कार्यकारिणी ने मुख्य अतिथि के रूप में पहुंच रहे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पद की गरिमा एवं उनके साथ जुड़े प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखते हुए स्वागत करने का निर्णय लिया है। नदीम अंसारी के समय के अध्यक्ष फैजुल हसन एवं एएमयू ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन, दिल्ली भी राष्ट्रपति के स्वागत के पक्ष में है।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी एवं कैबिनेट सदस्य जैद शेरवानी आदि ने शनिवार को रामनाथ कोविंद को काले झंडे दिखाने एवं विरोध करने का एलान किया था। उसके बाद से एएमयू की छात्र राजनीति गरमा गई है। देश भर में फैले एएमयू के पूर्व छात्र भी नदीम अंसारी से सहमत नहीं है और राष्ट्रपति के भव्य स्वागत के पक्ष में हैं। नदीम अंसारी के बयान के बाद एएमयू छात्र संघ कार्यकारिणी की बैठक रविवार को आयोजित की गई।
अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने बताया कि राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक होते हैं और उनको अपमानित करने के बारे में एएमयू छात्र कभी सोच भी नहीं सकते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कैंपस में राष्ट्रपति का स्वागत विश्वविद्यालय की शानदार परंपरा के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि प्रोटोकॉल की आड़ में किसी भी ऐसे व्यक्ति को कैंपस में प्रवेश नहीं दिया जाए, जिनकी विचारधारा देश में सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाली है। सांप्रदायिक व्यक्ति को एएमयू छात्र बर्दाश्त नहीं करेेंगे।
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छात्र संघ की मांग के बाद राष्ट्रपति आमंत्रित
एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी भले ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन का विरोध कर रहे है, लेकिन वर्तमान अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी की माने तो छात्र संघ की मांग के बाद ही राष्ट्रपति को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किया गया है। अध्यक्ष का कहना है कि वे लोग एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से मिलकर दीक्षांत समारोह आयोजित कराने तथा उसमें राष्ट्रपति एवं एएमयू विजिटर रामनाथ कोविंद को बुलाने की मांग की थी। उसके बाद ही कुलपति ने दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि सुर्खियों में बने रहने के लिए राष्ट्रपति एवं एएमयू विजिटर के नाम पर राजनीति उचित नहीं है। 2010 में रामनाथ कोविंद ने एक राजनीतिक दल के नेता के रूप में बयान दिया था। वर्तमान समय में वह राष्ट्रपति हैं, किसी दल के नेता नहीं।
देश में ऐसे हालात बन गए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को प्रेस कांफ्रेंस करके कहना पड़ता है कि देश की डेमोक्रेसी खतरे में हैं। देश के संवैधानिक पद पर बैठने के बाद हमारे विजिटर की सोच बदल गई है तो एएमयू के रुके फंड को रिलीज कराएं। सुप्रीम कोर्ट में अल्पसंख्यक स्वरूप के खिलाफ दिया गया हलफनामा वापस कराएं। हम फूल मालाओं से स्वागत करेंगे। हमारा विरोध राष्ट्रपति से नहीं है। हम पद का सम्मान करते हैं, मगर आरएसएस की विचाराधारा का पुरजोर विरोध करता हूं। - नदीम अंसारी, पूर्व उपाध्यक्ष एएमयू छात्र संघ।
32 साल बाद राष्ट्रपति का आना गौरव की बात है। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में आने की रजामंदी दी यह छात्र-छात्राओं के लिए यह खुशी का क्षण है, और राष्ट्रपति का गरिमा के साथ स्वागत होना चाहिए। - इरशाद अहमद, अध्यक्ष दिल्ली ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन।
एएमयू में राष्ट्रपति का विरोध करने वाले छात्रों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है। इससे लोग यह न समझें कि एएमयू छात्र राष्ट्रपति का विरोध कर रहे हैं। कैंपस में राष्ट्रपति का स्वागत है। - फैजुल हसन, पूर्व अध्यक्ष एएमयू छात्र संघ।
राष्ट्रपति का विरोध निंदनीय है। चंद छात्र नेता सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसा कर रहे हैं। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर एएमयू को उन्नति की ओर ले जाना चाहते हैं। - जमाल खां, प्रदेश उपाध्यक्ष एनसीपी।
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एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी एवं कैबिनेट सदस्य जैद शेरवानी आदि ने शनिवार को रामनाथ कोविंद को काले झंडे दिखाने एवं विरोध करने का एलान किया था। उसके बाद से एएमयू की छात्र राजनीति गरमा गई है। देश भर में फैले एएमयू के पूर्व छात्र भी नदीम अंसारी से सहमत नहीं है और राष्ट्रपति के भव्य स्वागत के पक्ष में हैं। नदीम अंसारी के बयान के बाद एएमयू छात्र संघ कार्यकारिणी की बैठक रविवार को आयोजित की गई।
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अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने बताया कि राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक होते हैं और उनको अपमानित करने के बारे में एएमयू छात्र कभी सोच भी नहीं सकते। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कैंपस में राष्ट्रपति का स्वागत विश्वविद्यालय की शानदार परंपरा के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि प्रोटोकॉल की आड़ में किसी भी ऐसे व्यक्ति को कैंपस में प्रवेश नहीं दिया जाए, जिनकी विचारधारा देश में सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाली है। सांप्रदायिक व्यक्ति को एएमयू छात्र बर्दाश्त नहीं करेेंगे।
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छात्र संघ की मांग के बाद राष्ट्रपति आमंत्रित
एएमयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी भले ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन का विरोध कर रहे है, लेकिन वर्तमान अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी की माने तो छात्र संघ की मांग के बाद ही राष्ट्रपति को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किया गया है। अध्यक्ष का कहना है कि वे लोग एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से मिलकर दीक्षांत समारोह आयोजित कराने तथा उसमें राष्ट्रपति एवं एएमयू विजिटर रामनाथ कोविंद को बुलाने की मांग की थी। उसके बाद ही कुलपति ने दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि सुर्खियों में बने रहने के लिए राष्ट्रपति एवं एएमयू विजिटर के नाम पर राजनीति उचित नहीं है। 2010 में रामनाथ कोविंद ने एक राजनीतिक दल के नेता के रूप में बयान दिया था। वर्तमान समय में वह राष्ट्रपति हैं, किसी दल के नेता नहीं।
देश में ऐसे हालात बन गए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को प्रेस कांफ्रेंस करके कहना पड़ता है कि देश की डेमोक्रेसी खतरे में हैं। देश के संवैधानिक पद पर बैठने के बाद हमारे विजिटर की सोच बदल गई है तो एएमयू के रुके फंड को रिलीज कराएं। सुप्रीम कोर्ट में अल्पसंख्यक स्वरूप के खिलाफ दिया गया हलफनामा वापस कराएं। हम फूल मालाओं से स्वागत करेंगे। हमारा विरोध राष्ट्रपति से नहीं है। हम पद का सम्मान करते हैं, मगर आरएसएस की विचाराधारा का पुरजोर विरोध करता हूं। - नदीम अंसारी, पूर्व उपाध्यक्ष एएमयू छात्र संघ।
32 साल बाद राष्ट्रपति का आना गौरव की बात है। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में आने की रजामंदी दी यह छात्र-छात्राओं के लिए यह खुशी का क्षण है, और राष्ट्रपति का गरिमा के साथ स्वागत होना चाहिए। - इरशाद अहमद, अध्यक्ष दिल्ली ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन।
एएमयू में राष्ट्रपति का विरोध करने वाले छात्रों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है। इससे लोग यह न समझें कि एएमयू छात्र राष्ट्रपति का विरोध कर रहे हैं। कैंपस में राष्ट्रपति का स्वागत है। - फैजुल हसन, पूर्व अध्यक्ष एएमयू छात्र संघ।
राष्ट्रपति का विरोध निंदनीय है। चंद छात्र नेता सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसा कर रहे हैं। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर एएमयू को उन्नति की ओर ले जाना चाहते हैं। - जमाल खां, प्रदेश उपाध्यक्ष एनसीपी।