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1996 के चुनाव में सातों सीटों पर खिला कमल
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अभिषेक शर्मा
प्रदेश में 1991 से शुरू हुई जातीय आधारित सियासत और ध्रुवीकरण की बयार इस चुनाव में भी बरकरार रही। इसी का परिणाम रहा कि सीटों के बंटवारे में दिखाई सूझबूझ से भाजपा ने जिले की दस में से सात सीटों पर जीत दर्ज की। हां, इस बार हाथरस सीट पर बसपा ने पहली बार अपना खाता खोला, जबकि कांग्रेस व सपा एक-एक सीट पाकर संतुष्ट हुईं। खास बात यह रही कि इस चुनाव के बाद प्रदेश की सरकार में गुणा-गणित लगातार बनते बिगड़ते रहे। शुरुआती छह माह भाजपा के सहयोग से बसपा का शासन चला। मगर जब भाजपा की बारी आई तो बसपा ने समर्थन खींच लिया। बस फिर क्या था। भाजपा ने जोड़ तोड़ कर खुद की सरकार बनाई और अलीगढ़ की अतरौली सीट से विधायक निर्वाचित होने वाले कल्याण सिंह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। उनके साथ कांग्रेस से अलग होकर लोकतांत्रिक कांग्रेस में शामिल हुए दलवीर सिंह को मंत्रालय मिला। हालांकि कल्याण सिंह को 1998 के लोकसभा चुनाव के बाद हटना पड़ा।
पहली बार चेहरे बदलकर जाटलैंड में भाजपा ने दर्ज की थी जीत
जातीय गुणा-गणित और धार्मिक ध्रुवीकरण के सहारे प्रदेश में भाजपा लगातार बढ़ रही थी। अपने जिले में भी भाजपा का ग्राफ बढ़ रहा था। मगर इस चुनाव के पहले तक जिले के जाटलैंड कहे जाने वाले इगलास व खैर से भाजपा को हार का ही सामना करना पड़ता था। यह पहला ऐसा चुनाव रहा, जब चेहरे बदलकर भाजपा ने दोनों सीटें जीतीं। इनमें से इगलास पर दिग्गज जाट नेता मलखान सिंह व खैर पर चौ.चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती को विधायकी लड़ाई, जिनके दम पर दोनों सीटें जीतीं। वहीं सिकंदराराऊ में भी संघ से सियासत की शुरुआत करने वाले यशपाल सिंह चौहान ने जीत दर्ज की। इस तरह जिले में सात सीटों पर भाजपा जीती, जबकि बरौली पर कांग्रेस से दलवीर सिंह, शहर पर सपा से अब्दुल खालिक ने भाजपा के मौजूदा विधायकों को हराकर जीत दर्ज की। हाथरस सीट पर नए चेहरे के रूप में बसपा से रामवीर उपाध्याय ने जीत दर्ज की। वे मंत्री भी बने थे।
ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 7 राष्ट्रीय दल भाजपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस, जनता दल, जनता पार्टी व तिवारी कांग्रेस मैदान में थे, जबकि छह राज्य स्तरीय दल बहुजन समाज पार्टी, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, मुसलिम लीग, शिवसेना राष्ट्रवादी, कांग्रेस सोशलिस्ट व सपा चुनाव मैदान में थे। इसके अलावा सहित 62 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 174 पर भाजपा, 33 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि बसपा 67 और सपा ने 110 सीटें जीतीं। शुरुआत में भाजपा व बसपा की सरकार बनी। बाद में भाजपा ने कांग्रेस को तोड़कर व अन्य छोटे दलों के सहयोग से सरकार बनाई।
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ये था दसों सीटों का परिणाम
- 2 लाख 34 हजार 931 मतों वाली हाथरस सीट पर बसपा के रामवीर उपाध्याय 67337 मत पाकर जीते और भाजपा के राजवीर सिंह 38482 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 21 हजार 067 मतों वाली सासनी सीट पर भाजपा के हरिशंकर माहौर 41388 मत पाकर जीते और बसपा के पंजाबी लाल 36235 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 26 हजार 081 मतों वाली सिकंदराराऊ सीट पर भाजपा के यशपाल सिंह चौहान 42476 मत पाकर जीते और बसपा के सुरेश प्रताप गांधी 38091 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 24 हजार 680 मतों वाली गंगीरी सीट पर भाजपा के डॉ.राम सिंह 45141 मत पाकर जीते और सपा के वीरेश यादव 44470 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 23 हजार 761 मतों वाली अतरौली सीट पर भाजपा के कल्याण सिंह 73329 मत पाकर जीते और कांग्रेस के डॉ. अनवार खां 42634 मत पाकर हारे।
- 3 लाख 9 हजार 685 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर सपा के अब्दुल खालिक 86570 मत पाकर जीते और भाजपा के केके नवमान 51427 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 70 हजार 233 मतों वाली कोल सीट पर भाजपा की रामसखी कठेरिया 60296 मत पाकर जीतीं और बसपा के गंगा प्रसाद 36698 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 14 हजार 729 मतों वाली इगलास सीट पर भाजपा के मलखान सिंह 54287 मत पाकर जीतीं और कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 42435 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 21 हजार 699 मतों वाली बरौली सीट पर कांग्रेस के दलवीर सिंह 44549 मत पाकर जीते और भाजपा के मुनीष गौड़ 42920 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 25 हजार 188 मतों वाली खैर सीट पर भाजपा की ज्ञानवती सिंह 51135 मत पाकर जीतीं और कांग्रेस के जगवीर सिंह 30820 मत पाकर हारे।
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प्रदेश में 1991 से शुरू हुई जातीय आधारित सियासत और ध्रुवीकरण की बयार इस चुनाव में भी बरकरार रही। इसी का परिणाम रहा कि सीटों के बंटवारे में दिखाई सूझबूझ से भाजपा ने जिले की दस में से सात सीटों पर जीत दर्ज की। हां, इस बार हाथरस सीट पर बसपा ने पहली बार अपना खाता खोला, जबकि कांग्रेस व सपा एक-एक सीट पाकर संतुष्ट हुईं। खास बात यह रही कि इस चुनाव के बाद प्रदेश की सरकार में गुणा-गणित लगातार बनते बिगड़ते रहे। शुरुआती छह माह भाजपा के सहयोग से बसपा का शासन चला। मगर जब भाजपा की बारी आई तो बसपा ने समर्थन खींच लिया। बस फिर क्या था। भाजपा ने जोड़ तोड़ कर खुद की सरकार बनाई और अलीगढ़ की अतरौली सीट से विधायक निर्वाचित होने वाले कल्याण सिंह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। उनके साथ कांग्रेस से अलग होकर लोकतांत्रिक कांग्रेस में शामिल हुए दलवीर सिंह को मंत्रालय मिला। हालांकि कल्याण सिंह को 1998 के लोकसभा चुनाव के बाद हटना पड़ा।
पहली बार चेहरे बदलकर जाटलैंड में भाजपा ने दर्ज की थी जीत
जातीय गुणा-गणित और धार्मिक ध्रुवीकरण के सहारे प्रदेश में भाजपा लगातार बढ़ रही थी। अपने जिले में भी भाजपा का ग्राफ बढ़ रहा था। मगर इस चुनाव के पहले तक जिले के जाटलैंड कहे जाने वाले इगलास व खैर से भाजपा को हार का ही सामना करना पड़ता था। यह पहला ऐसा चुनाव रहा, जब चेहरे बदलकर भाजपा ने दोनों सीटें जीतीं। इनमें से इगलास पर दिग्गज जाट नेता मलखान सिंह व खैर पर चौ.चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती को विधायकी लड़ाई, जिनके दम पर दोनों सीटें जीतीं। वहीं सिकंदराराऊ में भी संघ से सियासत की शुरुआत करने वाले यशपाल सिंह चौहान ने जीत दर्ज की। इस तरह जिले में सात सीटों पर भाजपा जीती, जबकि बरौली पर कांग्रेस से दलवीर सिंह, शहर पर सपा से अब्दुल खालिक ने भाजपा के मौजूदा विधायकों को हराकर जीत दर्ज की। हाथरस सीट पर नए चेहरे के रूप में बसपा से रामवीर उपाध्याय ने जीत दर्ज की। वे मंत्री भी बने थे।
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ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 7 राष्ट्रीय दल भाजपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस, जनता दल, जनता पार्टी व तिवारी कांग्रेस मैदान में थे, जबकि छह राज्य स्तरीय दल बहुजन समाज पार्टी, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, मुसलिम लीग, शिवसेना राष्ट्रवादी, कांग्रेस सोशलिस्ट व सपा चुनाव मैदान में थे। इसके अलावा सहित 62 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 174 पर भाजपा, 33 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि बसपा 67 और सपा ने 110 सीटें जीतीं। शुरुआत में भाजपा व बसपा की सरकार बनी। बाद में भाजपा ने कांग्रेस को तोड़कर व अन्य छोटे दलों के सहयोग से सरकार बनाई।
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ये था दसों सीटों का परिणाम
- 2 लाख 34 हजार 931 मतों वाली हाथरस सीट पर बसपा के रामवीर उपाध्याय 67337 मत पाकर जीते और भाजपा के राजवीर सिंह 38482 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 21 हजार 067 मतों वाली सासनी सीट पर भाजपा के हरिशंकर माहौर 41388 मत पाकर जीते और बसपा के पंजाबी लाल 36235 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 26 हजार 081 मतों वाली सिकंदराराऊ सीट पर भाजपा के यशपाल सिंह चौहान 42476 मत पाकर जीते और बसपा के सुरेश प्रताप गांधी 38091 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 24 हजार 680 मतों वाली गंगीरी सीट पर भाजपा के डॉ.राम सिंह 45141 मत पाकर जीते और सपा के वीरेश यादव 44470 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 23 हजार 761 मतों वाली अतरौली सीट पर भाजपा के कल्याण सिंह 73329 मत पाकर जीते और कांग्रेस के डॉ. अनवार खां 42634 मत पाकर हारे।
- 3 लाख 9 हजार 685 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर सपा के अब्दुल खालिक 86570 मत पाकर जीते और भाजपा के केके नवमान 51427 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 70 हजार 233 मतों वाली कोल सीट पर भाजपा की रामसखी कठेरिया 60296 मत पाकर जीतीं और बसपा के गंगा प्रसाद 36698 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 14 हजार 729 मतों वाली इगलास सीट पर भाजपा के मलखान सिंह 54287 मत पाकर जीतीं और कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 42435 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 21 हजार 699 मतों वाली बरौली सीट पर कांग्रेस के दलवीर सिंह 44549 मत पाकर जीते और भाजपा के मुनीष गौड़ 42920 मत पाकर हारे।
- 2 लाख 25 हजार 188 मतों वाली खैर सीट पर भाजपा की ज्ञानवती सिंह 51135 मत पाकर जीतीं और कांग्रेस के जगवीर सिंह 30820 मत पाकर हारे।