दीनदयाल संयुक्त अस्पताल: 10 वेंटिलेटर के आईसीयू में ही स्टाफ के लाले, बाकी 29 को कौन संभाले
अस्पताल में तैनात कुल 16 डॉक्टरों में से एक सीएमएस, एक फिजिशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, दो पैथॉलाजिस्ट, दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, एक नेत्र सर्जन, तीन ईएमओ, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक सोनेलॉजिस्ट हैं। जबकि इन सभी विभागों में जरूरत कुल 24 डॉक्टरों की है।
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100 बेड की क्षमता वाले अलीगढ़ के दीनदयाल संयुक्त अस्पताल को भवन-जमीन के अनुसार मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिलाने के प्रयास हो रहे हैं। ताकि जेएन मेडिकल कॉलेज को टक्कर दी जा सके। मगर समस्या स्टाफ की कमी की है। हालात ये हैं कि दस वेंटिलेटर बेड का आईसीयू संचालन जैसे तैसे किया जा रहा है। पिछले वर्ष स्टाफ की कमी की वजह से प्रबंधन ने इसके संचालन पर भी हाथ खड़े कर दिए थे। ऐसे में बाकी वेंटिलेटरों को कैसे संचालित किया जाए। ये बड़ा सवाल है। जब स्टाफ ही नहीं है तो बाकी वेंटिलेटर कैसे चल पाएंगे।
कोविड काल में देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की दिशा में कदम उठाए गए थे। उसी समय अपने जिले में सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर या ऑक्सीजन संसाधन नहीं थे। तभी सौ बेड के दीनदयाल अस्पताल को पीएम केयर फंड सहित अन्य तमाम संसाधनों से वेंटिलेटर मुहैया कराए गए। साथ में आक्सीजन प्लांट भी लगवाया गया। जब तक कोविड का दौर रहा, तब तक इस अस्पताल में 40 वेंटिलेटर बेड सहित 100 बेड का आईसीयू संचालित किया गया। उस समय जिले भर के डॉक्टर यहां लगा दिए गए।
कोविड का दौर खत्म होने के बाद सभी डॉक्टर वापस कर दिए गए। फिर इसके संचालन पर संकट शुरू हुआ। पिछले वर्ष सीएमएस ने इसके संचालन से हाथ खड़े कर दिए, मगर बाद में जैसे-तैसे व्यवस्था कर आईसीयू का संचालन शुरू किया गया। वर्तमान में यहां पर 46 वेंटिलेटर मौजूद हैं, मगर 20 बेड का आईसीयू संचालित किया जा रहा है, जिसमें 10 वेंटिलेटर आईसीयू में प्रयोग होते हैं। उसमें भी गंभीर समस्या से जुड़े डॉक्टर मौजूद नहीं हैं।
ये बिल्कुल सही है कि हमारे यहां सर्वाधिक वेंटिलेटर हैं। मगर जब तक स्टाफ व डॉक्टर नहीं होंगे, तो उनका संचालन करना मुश्किल होगा। इसे लेकर समय-समय पर प्रदेश मुख्यालय तक को लिखा जा रहा है।-डा.एमके माथुर, सीएमएस दीनदयाल अस्पताल।
ये है मानक
-2 वेंटिलेटर बेड पर एक नर्सिंग स्टाफ जरूरी
-10 वेंटिलेटर बेड पर एक निश्चेतक है जरूरी
-बाकी सहयोगी डॉक्टर व अन्य संसाधन जरूरी
ये है स्थिति
-10 वेंटिलेटर बेड सिर्फ 3 नर्सिंग स्टाफ के सहारे
-1 निश्चेतक डॉक्टर की यहां पर है शिफ्ट में तैनाती
समस्याएं ये भी
आईसीयू संचालन के दौरान हर तरह की गंभीर बीमारी-इमरजेंसी से ग्रसित मरीज अस्पताल पहुंचता है। मगर दीनदयाल संयुक्त अस्पताल में सिर्फ सीओपीडी, सामान्य हेड इंजरी, फेफड़े के ही डॉक्टर हैं, जो इमरजेंसी, ओपीडी या आईसीयू में उपचार दे सकते हैं। यहां हृदय, दिमाग, नेफ्रो, बेड डायलीसिस, गंभीर सर्जरी से संबंधित कोई डॉक्टर नहीं है। इसलिए यहां मरीज आने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
24 में केवल 16 डॉक्टर तैनात
अस्पताल में तैनात कुल 16 डॉक्टरों में से एक सीएमएस, एक फिजिशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, दो पैथॉलाजिस्ट, दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, एक नेत्र सर्जन, तीन ईएमओ, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक सोनेलॉजिस्ट हैं। जबकि इन सभी विभागों में जरूरत कुल 24 डॉक्टरों की है।
पीकू वार्ड भी नहीं हो पा रहा संचालित
सौ बेड के इतने बड़े अस्पताल की हालत ये है कि यहां एक पीकूवार्ड व उसके साथ एनआईसीयू का संचालन भी होना है। जिसके लिए कमरा आरक्षित है। मगर स्टाफ की कमी की वजह से अभी तक यहां का एनआईसीयू संचालित नहीं हो रहा। यहां आने वाले बच्चे महिला अस्पताल भेजे जाते हैं।