फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   VC's bluntly .. agree, otherwise AMU will stop

कुलपति की दो टूक.. मान जाओ, नहीं तो बंद कर देंगे एएमयू 

Wed, 29 Jan 2020 09:54 PM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Wed, 29 Jan 2020 09:54 PM IST
विज्ञापन
VC's bluntly .. agree, otherwise AMU will stop
छात्रों से बात करते एएमयू कुलपति प्रो तारिक मंसूर। - फोटो : neeraj
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी हटाने, जेएनयू - एएमयू हिंसा मामले के साथ कुलपति को हटाने की मांग को लेकर पिछले 52 दिनों से चल रहे धरना प्रदर्शन को लेकर बुधवार को कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने पत्र लिख छात्रों से आखिरी अपील की। उन्होंने कहा कि 30 जनवरी से अपनी परीक्षाएं दें और कक्षाओं में जाएं। अगर इसके बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आता है तो विश्वविद्यालय का सत्र शून्य करते हुए उसे बंद किया जा सकता है। 
विज्ञापन



गौरतलब हो कि एएमयू में बीती नौ दिसंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू हुआ था, जो 29 जनवरी को भी जारी रहा। लगातार धरना प्रदर्शन से विवि इंतजामिया आजिज आ गया है। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि कुछ दिग्भ्रमित तत्वों द्वारा परीक्षाओं व कक्षाओं के चलने में अवरोध पैदा किया जाएगा तो विश्वविद्यालय को खुला रखने और 23 हजार छात्रों को विश्वविद्यालय में बेकार बैठाए रखने का कोई औचित्य नहीं होगा। छात्रों के अभिभावक भी यह नहीं चाहेंगे कि बिना किसी शैक्षणिक गतिविधि के उनके बच्चे विश्वविद्यालय परिसर में रहें। इससे कानून व्यवस्था की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह मेरा आपसे अंतिम आग्रह है कि विश्वविद्यालय परिसर में अमन-चैन का वातावरण बनाए रखें तथा 30 जनवरी 2020 से अपनी परीक्षाओं में भाग लें और अपनी कक्षाओं में जाएं। पहले ही 18 दिन बिना किसी शैक्षणिक गतिविधि के गंवा चुके हैं। छात्र स्वार्थी व अवसरवादी तत्वों द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों और भ्रांतियों का शिकार न हों। विश्वविद्यालय में अशांति, अराजकता और अवांछित गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जिससे एएमयू की गरिमा को ठेस पहुंचती हो। कुलपति ने कहा कि मैं यह पत्र भ्रांतियों, अफवाहों तथा भ्रामक खबरों के संदर्भ में स्थिति को साफ  करने के लिए लिख रहा हूं ताकि छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
विज्ञापन


बाहरी तत्वों ने छात्रों को धमकाया, कॉपियां छीनीं
अलीगढ़। एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि हमने पिछले सेमेस्टर की बची हुई परीक्षाओं को 27 जनवरी से फिर से कराने का निर्णय लिया। परंतु, कुछ दिग्भ्रमित लोग, जिनमें कुछ बाहरी तत्व भी शामिल हैं, इन परीक्षाओं को आयोजित नहीं होने दे रहे हैं। उन्होंने परीक्षा केन्द्रों, विभागों पर ताला डाल दिया है और छात्रों को परीक्षा में भाग लेने से रोक रहे हैं। ये तत्व अनेक छात्रों को धमकी भी दे रहे हैं। इनमें से कुछ ने 27 जनवरी को अजमल खां तिब्बिया कॉलेज जाकर परीक्षा दे रहे छात्रों से जबरदस्ती कॉपियां छीन लीं। बहुत से बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों, जिनमें से कुछ अपने अभिभावकों के साथ परीक्षा देने आए थे, उन्हें भी अराजक भीड़ ने परीक्षा में नहीं भाग लेने दिया। उन्होंने कहा कि कुछ तत्व स्कूली छात्रों, जिनमें 10-12 साल के बच्चे भी शामिल हैं, उनकी भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। कुलपति ने कहा कि छात्रों को कानून के दायरे में रहते हुए किसी भी विषय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की पूर्ण स्वतंत्रता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सभी मामले हमारा आंतरिक सुरक्षा तंत्र निपटाएगा : वीसी
अलीगढ़। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि मैंने अपने पिछले दो पत्रों द्वारा सभी छात्रों को सुरक्षा का विश्वास दिलाया है और एक बार फिर आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम छात्रों से संबंधित मामलों की जांच या सुरक्षा के संबंध में स्वयं अपने प्रॉक्टोरियल स्टाफ  तथा प्रो. प्रॉक्टर्स के सुरक्षा तंत्र पर निर्भर रहेंगे। अनुशासनहीनता पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। किसी भी बाहरी एजेंसी की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी। उन्होंने कहा कि मई 2018 तथा फरवरी 2019 में भी कुछ घटनाएं घटित हुई थीं।


जिनको छात्रों, शिक्षकों तथा जिला प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया था। इसी प्रकार नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में हाल में 11 दिसंबर 2019 से 14 दिसंबर 2019 के बीच भी कई शांतिपूर्ण धरने प्रदर्शन संचालित हुए हैं। 15 दिसंबर 2019 को विश्वविद्यालय में दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई।


छात्रों को पहुंचने वाली चोटों तथा शीतकालीन छुट्टियों की अचानक घोषणा के चलते कम समय में हास्टल छोड़ने में छात्रों को जो कठिनाइयां हुईं, उसके लिए खेद व्यक्त कर चुका हूं। यह निर्णय पूरी नेकनीयती से लिया गया था तथा इसका उद्देश्य किसी भी छात्र को कोई हानि पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि हमने छात्रों के विरुद्ध होने वाली एफआईआर, चोटिल छात्रों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति सहायता, पुलिस द्वारा उठवाई गई गाड़ियों से संबंधित मामलों की जांच और सहायता के लिए पहले ही दो कमेटियां गठित की हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन निर्दोष छात्रों की हर संभव सहायता प्रदान करेगा।

मुझसे शिकायत हो तो राष्ट्रपति को प्रतिवेदन दें : वीसी
प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि यदि किसी को मुझसे कोई शिकायत है तो वह विश्वविद्यालय के विजिटर राष्ट्रपति को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि विश्वविद्यालय के किसी वर्ग को विश्वविद्यालय के किसी पदाधिकारी से कोई शिकायत है तो वह मुझे लिखित रूप में अपनी शिकायत दे सकता है। उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। प्रो. मंसूर ने कहा कि कुलपति के रूप में ढाई वर्षों के अपने कार्यकाल में मैंने एएमयू बिरादरी के सभी वर्गों द्वारा विभिन्न विषयों पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रदर्शन की अनुमति दी है। एक लोकतांत्रिक शैक्षणिक संस्थान के रूप में यहां प्रत्येक को किसी भी विषय पर विचार करने, बहस करने और विचार रखने की अनुमति है।

मानवाधिकार आयोग जांच कर रहा है, इंतजार करें
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि 15 दिसंबर 2019 की घटनाओं की उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग जांच कर रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित है। हमें इसकी प्रतीक्षा करनी चाहिए। प्रो. मंसूर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वीके गुप्ता के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की है। जिसकी पहली बैठक 20 जनवरी 2020 को हो चुकी है।


बाधा पहुंचने वाले छात्रों को तुरंत रिहा कराया
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि कुछ लोगों ने गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में बाधा पहुंचाने की कोशिश की, जो गंभीर अपराध है, क्योंकि गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व है और राजनीति से परे है। इन तत्वों को विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल स्टाफ  ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। क्योंकि वे इन लोगों की शिनाख्त के बारे में स्पष्ट नहीं थे। इन लोगों को पुलिस के हवाले किए जाने के संबंध में जानकारी नहीं थी। जैसे ही परीक्षा कंट्रोलर से इनमें से तीन के छात्र होने की सूचना मिली, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिला प्रशासन से इन छात्रों को रिहा करने का आग्रह किया। इसके बाद में तीन छात्रों को कुछ घंटों के अंदर रिहा कर दिया गया। चौथा व्यक्ति जो विश्वविद्यालय का छात्र नहीं है, उसे भी जिला प्रशासन ने अगले दिन रिहा कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed