राहत: अलीगढ़ में ब्लैक फंगस के दो मरीजों का सफल ऑपरेशन, कुछ दिनों पहले कोरोना से हुए थे ठीक
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के दो रोगियों का सफलता पूर्वक ऑपरेशन किया गया। दोनों मरीज कुछ दिनों से वे नाक में रुकावट, चेहरे में दर्द, सूजन, सुन्नता, दृष्टि का धुंधलापन और आंखों से पानी आने की समस्या से ग्रस्त थे।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के ओटोलरींगोलाजी विभाग में रायनोसेरेब्रल म्यूकोर्मायकोसिस (ब्लैक फंगस) के दो रोगियों का सफलता पूर्वक ऑपरेशन किया गया है। महामारी के दौरान ब्लैक फंगस के किसी मामले का यह पहला ऑपरेशन है।
मेडिकल कॉलेज में भर्ती 65 वर्षीय मोहल लाल और 22 वर्षीय विवेक, यह दोनों रोगी कोविड-19 से हाल ही में उबरे थे, लेकिन गत कुछ दिनों से वे नाक में रुकावट, चेहरे में दर्द, सूजन, सुन्नता, दृष्टि का धुंधलापन और आंखों से पानी आने की समस्या से ग्रस्त थे।
ओटोलरींगोलाजी विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद आफताब, जिन्होंने अपनी टीम के साथ यह ऑपरेशन किए और नेत्र विज्ञान विभाग के डॉ. वजाहत रिजवी ने बताया कि आपरेशन के बाद इन रोगियों की समस्या संतोषजनक रूप से दूर हो रही है। डॉ. नाजिया तौहीद के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने सर्जरी में मदद की।
प्रोफेसर आफताब ने बताया कि मोहन लाल और विवेक पर बिना किसी चीरे के एंडोस्कोपिक प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, जिससे उनकी रिकवरी आसान, त्वरित और आंशिक दर्द के साथ हो रही है। उन्होंने कहा कि इन मरीजों को कड़ी निगरानी में रखा गया, क्योंकि ब्लैक फंगस एक बहुत ही आक्रामक बीमारी है।
प्रोफेसर आफताब ने कहा कि इस तरह के और भी मरीज आ रहे हैं और उनका आपातकालीन आधार पर ऑपरेशन किया जा रहा है। जेएनएमसी में ट्रॉमा सेंटर इमरजेंसी के निकट एक पोस्ट-कोविड अनुवर्ती ओपीडी भी मौजूद है।
जेएनएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने कहा कि कोविड रोगी ठीक होने के दो या तीन सप्ताह बाद ब्लैक फंगस का शिकार हो सकते हैं। इन मामलों में पूरे देश में वृद्धि हुई है। ब्लैक फंगस के लक्षण जैसे नाक बंद होना, नाक गुहा में सूखी और काली परत जमा होना, नाक और आंखों के आसपास काले धब्बे, आंखों में लाली और मिचमिचाहट, आंखों के ढेले की गति में कमी, दृष्टि में अचानक कमी, मुख गुहा में, विशेष रूप से तालू पर काले धब्बे वाले रोगियों को अपने आप उपचार से बचना चाहिए। साथ ही अपनी डायबिटीज के स्तर को नियंत्रण में रखना चाहिए। उन्हें तुरंत डॉक्टरों से भी संपर्क करना चाहिए।
एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि सफल सर्जरी के लिए ईएनटी व नेत्र रोग विशेषज्ञ बधाई के पात्र हैं। जेएनएमसी के स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपचाराधीन व ठीक होने वाले कोविड रोगियों को स्टेरॉयड की अवधि की सही खुराक सुनिश्चित करके फंगल संक्रमण की संभावना को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर नियमित परामर्श द्वारा स्वास्थ्य लाभ पा चुके कोविड रोगियों की डायबिटीज के स्तर को नियमित रखने में भी अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं।a