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भाजपा विधायक को सजा : 17 नवंबर को मुकदमा और 18 नवंबर को सुनाई सजा

Fri, 19 Nov 2021 01:30 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 01:30 AM IST
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Trial on November 17 and sentencing on November 18
ये इत्तेफाक ही है कि इस मुकदमे में निर्णय आने में 22 साल लग गए। मगर गौर करें तो 17 नवंबर 1999 को यह मुकदमा बन्नादेवी में दर्ज हुआ। इसके बाद 18 नवंबर 2021 को सजा हो गई। हालांकि, मुकदमा एमपी/एमएलए कोर्ट में जुलाई 2021 में ही हाईकोर्ट से ट्रायल के लिए स्थानांतरित होकर आया है। इसके बाद चंद माह में इसका निस्तारण कर दिया गया।
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न्यायालय के आदेश में उल्लेख है कि यह मुकदमा हाईकोर्ट से जुलाई 2021 में स्थानांतरित होकर आया। इसके बाद यहां इसका ट्रायल शुरू हुआ। हालांकि, संजीव राजा 2017 में विधायक निर्वाचित हुए हैं। इससे पहले यह मुकदमा दीवानी में ही विचाराधीन था। मगर विधायक बनने के बाद उनके सभी मुकदमे हाईकोर्ट स्थित एमपी एमएलए कोर्ट में चले गए। पिछले दिनों वहां से प्रत्येक सत्र न्यायालय में एमपी एमएलए कोर्ट निर्धारित होने पर यह मुकदमा वापस यहां आ गया। इसके बाद अब इस पर निर्णय हुआ है। खास बात यह है कि 17 नंवबर 1999 के मुकदमे में 18 नवंबर 2021 को फैसला आया है।
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अभी ये चार मुकदमे और हैं लंबित
एमपी एमएलए कोर्ट में संजीव राजा पर देहली गेट के दो, बन्नादेवी का एक और सासनी गेट का एक मुकदमा अभी लंबित है। ये मुकदमे भी थानों में दर्ज आपराधिक घटनाओं से संबंधित हैं। अभियोजन अधिवक्ता के अनुसार, अभी ये मुकदमे गवाही आदि में चल रहे हैं। एक-एक कर जल्द इन सभी में निर्णय आने की उम्मीद है।
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अब अपील के बाद तय होगा सियासी भविष्य
कानून के जानकारों के अनुसार, 2013 की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार दो साल से अधिक की सजा वाले मुकदमों में सजा होने पर कम से कम तीन साल तक निर्वाचन आवेदन न करने का प्रावधान है। मगर मुकदमों के प्रकार पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। अभी इस मामले में चूंकि बचाव पक्ष की ओर से अपील करने की तैयारी है। सत्र न्यायालय के फैसले के 90 दिन के अंदर बचाव पक्ष यानी विधायक पक्ष द्वारा हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। अपील स्वीकार अगर हो जाती है तो उसके निर्णय के बाद ही तय होगा कि भविष्य में संजीव राजा का सियासी भविष्य क्या होगा। अगर अपील खारिज हो जाती है तो इस पर मुकदमे के प्रकार को लेकर निर्वाचन आयोग ही तय करेगा। इसे लेकर संयुक्त निदेशक अभियोजन सुशील कुमार सिंह इतना ही कहते हैं कि मुकदमे में हाईकोर्ट की अपील पर किसी भी राजनेता का निर्वाचन आवेदन भविष्य तय हो सकेगा। वैसे नियम 2 साल से ऊपर सजा में निर्वाचन में आवेदन का राइट नहीं होता है।

कचहरी में जमे रहे विधायक व भाजपाई
दोपहर में विधायक संजीव राजा मुकदमे में निर्णय की तारीख को लेकर दीवानी पहुंचे। इस खबर पर उनके साथी विधायक अनिल पाराशर, भाजपा नेता राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ व तमाम समर्थक अधिवक्ता भी दीवानी पहुंच गए। जैसे ही शाम के वक्त फैसला आया तो सभी में मायूसी छा गई। मगर संजीव राजा के अधिवक्ता के जमानत अनुरोध पर न्यायालय द्वारा 30-30 हजार रुपये के दो जमानतनामों पर जमानत दिए जाने पर सभी ने राहत महसूस की।
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