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खाद्य सुरक्षा के मानक तय होने तक सैंपलिंग बंद हो: व्यापार मंडल
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कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन करते व्यापार मंडल के पदाधिकारी स्रोत स्वयं
व्यापारियों के उत्पीड़न के विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की चेतावनी, 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा
अलीगढ़। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत व्यापारियों को आ रही समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। संगठन की ओर से कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन करने के बाद सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय दीपक सिंह को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नई दिल्ली के नाम 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया। संगठन ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, जांच रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराने और व्यापारियों के उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की।
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि 15 सूत्रीय मांगपत्र के माध्यम से व्यापारियों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया है। संगठन को उम्मीद है कि मांगों पर विचार कर उनका उचित निस्तारण किया जाएगा।
14 दिन में जांच रिपोर्ट जारी करने की मांग
संगठन ने मांग की कि खाद्य पदार्थों के नमूने लेते समय संबंधित निर्माता को पक्षकार बनाए जाने की स्थिति में उसे निर्धारित फॉर्म-5ए की सूचना पंजीकृत डाक से भेजी जाए। संगठन का कहना है कि खुदरा या थोक व्यापारी द्वारा खरीद का बिल प्रस्तुत किए जाने पर ही निर्माता को नमूने की कार्रवाई में पक्षकार बनाया जाना चाहिए।
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मांगपत्र में सरकारी प्रयोगशालाओं से नमूना प्राप्त होने के 14 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट जारी कराने की व्यवस्था करने की मांग भी की गई। संगठन के अनुसार, नमूना फेल होने की स्थिति में दोबारा जांच के लिए संबंधित पत्र तत्काल जारी किया जाना चाहिए, ताकि खाद्य पदार्थ की एक्सपायरी डेट निकलने से पहले पुनः जांच हो सके। संगठन ने खाद्य पदार्थों को नष्ट करने या जब्त करने की कार्रवाई केंद्रीय प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद किए जाने का भी अनुरोध किया।
पैकिंग में कमी पर निर्माता को जिम्मेदार ठहराने की मांग
व्यापार मंडल ने मांग की कि पैकिंग और लेबलिंग में कमी मिलने पर संबंधित निर्माता या पैकिंग कंपनी को जिम्मेदार माना जाए।
ज्ञापन में नमूनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप अधोमानक या असुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत करने, मामूली मामलों में शमन की व्यवस्था लागू करने और मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पूर्णकालिक न्याय निर्धारण अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गई। संगठन ने फर्जी शिकायतों के आधार पर सैंपलिंग रोकने, सर्वे सैंपलों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और निजी प्रयोगशालाओं की जांच के आधार पर निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा करने की भी मांग उठाई।
कीटनाशक और रासायनिक खाद के मानक तय करने पर जोर
संगठन ने खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और रासायनिक खाद के मानकों का मुद्दा भी उठाया। व्यापार मंडल का कहना है कि कृषि में रसायनों के इस्तेमाल और सिंचाई के पानी की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए खाद्य पदार्थों के मानकों की समीक्षा की जानी चाहिए।
ज्ञापन में कृषि विभाग से कीटनाशकों और रासायनिक खाद के इस्तेमाल के मानक तय कराने तथा नए सिरे से मानक निर्धारित होने तक व्यापारियों के खाद्य पदार्थों के नमूने भरने की कार्रवाई रोकने की मांग की गई। इसके अलावा संगठन ने केंद्रीय और प्रांतीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जांच व्यवस्था में एकरूपता लाने और औद्योगिक इकाइयों में दोहरी जांच से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने का अनुरोध किया।
धरना-प्रदर्शन में महानगर अध्यक्ष आलोक प्रताप सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री हरिकिशन अग्रवाल, प्रदेश मंत्री अरुण गोयल, सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।
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अलीगढ़। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत व्यापारियों को आ रही समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। संगठन की ओर से कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन करने के बाद सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय दीपक सिंह को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नई दिल्ली के नाम 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया। संगठन ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, जांच रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराने और व्यापारियों के उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की।
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष प्रदीप गंगा ने कहा कि 15 सूत्रीय मांगपत्र के माध्यम से व्यापारियों की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया है। संगठन को उम्मीद है कि मांगों पर विचार कर उनका उचित निस्तारण किया जाएगा।
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14 दिन में जांच रिपोर्ट जारी करने की मांग
संगठन ने मांग की कि खाद्य पदार्थों के नमूने लेते समय संबंधित निर्माता को पक्षकार बनाए जाने की स्थिति में उसे निर्धारित फॉर्म-5ए की सूचना पंजीकृत डाक से भेजी जाए। संगठन का कहना है कि खुदरा या थोक व्यापारी द्वारा खरीद का बिल प्रस्तुत किए जाने पर ही निर्माता को नमूने की कार्रवाई में पक्षकार बनाया जाना चाहिए।
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मांगपत्र में सरकारी प्रयोगशालाओं से नमूना प्राप्त होने के 14 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट जारी कराने की व्यवस्था करने की मांग भी की गई। संगठन के अनुसार, नमूना फेल होने की स्थिति में दोबारा जांच के लिए संबंधित पत्र तत्काल जारी किया जाना चाहिए, ताकि खाद्य पदार्थ की एक्सपायरी डेट निकलने से पहले पुनः जांच हो सके। संगठन ने खाद्य पदार्थों को नष्ट करने या जब्त करने की कार्रवाई केंद्रीय प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद किए जाने का भी अनुरोध किया।
पैकिंग में कमी पर निर्माता को जिम्मेदार ठहराने की मांग
व्यापार मंडल ने मांग की कि पैकिंग और लेबलिंग में कमी मिलने पर संबंधित निर्माता या पैकिंग कंपनी को जिम्मेदार माना जाए।
ज्ञापन में नमूनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप अधोमानक या असुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत करने, मामूली मामलों में शमन की व्यवस्था लागू करने और मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पूर्णकालिक न्याय निर्धारण अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गई। संगठन ने फर्जी शिकायतों के आधार पर सैंपलिंग रोकने, सर्वे सैंपलों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और निजी प्रयोगशालाओं की जांच के आधार पर निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा करने की भी मांग उठाई।
कीटनाशक और रासायनिक खाद के मानक तय करने पर जोर
संगठन ने खेती में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और रासायनिक खाद के मानकों का मुद्दा भी उठाया। व्यापार मंडल का कहना है कि कृषि में रसायनों के इस्तेमाल और सिंचाई के पानी की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए खाद्य पदार्थों के मानकों की समीक्षा की जानी चाहिए।
ज्ञापन में कृषि विभाग से कीटनाशकों और रासायनिक खाद के इस्तेमाल के मानक तय कराने तथा नए सिरे से मानक निर्धारित होने तक व्यापारियों के खाद्य पदार्थों के नमूने भरने की कार्रवाई रोकने की मांग की गई। इसके अलावा संगठन ने केंद्रीय और प्रांतीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जांच व्यवस्था में एकरूपता लाने और औद्योगिक इकाइयों में दोहरी जांच से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने का अनुरोध किया।
धरना-प्रदर्शन में महानगर अध्यक्ष आलोक प्रताप सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री हरिकिशन अग्रवाल, प्रदेश मंत्री अरुण गोयल, सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।