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Aligarh News: काली नदी का जहरीला पानी छीन रहा धरती की उर्वरता

Fri, 26 Jun 2026 02:47 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:47 AM IST
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toxic water of the Kali River is stripping the land of its fertility.
हरदुआगंज से होकर बहती काली नदी। संवाद
कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली काली नदी अब आसपास के खेतों की उर्वरता को धीरे-धीरे निगल रही है। वर्षों से बिना शोधन के बहाए जा रहे घरेलू और औद्योगिक कचरे ने नदी के पानी को इतना प्रदूषित कर दिया है कि उससे सिंचित खेतों की मिट्टी में भारी धातुएं पहुंच रही हैं और जमीन की ताकत छीन रही है।
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इसका खुलासा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोध में हुआ है। इस शोध में खेतों की उर्वरता को बचाने का नया फॉर्मूला भी सुझाया है। प्रो. सैफ सईद, डॉ. शादाब अली खान, अब्दुल रज्जाक खान की अध्ययन रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंग नेचर में छपी है।
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इस शोध के दौरान जीआईएस आधारित मानचित्रों ने एक और गंभीर सच्चाई उजागर की। नदी किनारे के खेतों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता सबसे खराब पाई गई। इसका कारण वर्षों से प्रदूषित नदी जल का उपयोग और ऊपरी जिलों से लगातार आ रहा औद्योगिक व घरेलू अपशिष्ट को बताया गया है।
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एएमयू के वैज्ञानिकों ने अलीगढ़ के 70 गांवों के खेतों से मिट्टी से नमूने एकत्र किए और उनका 19 रासायनिक मानकों और भारी धातुओं के अंशों के आधार पर विश्लेषण किया। मिट्टी की सेहत को समझने के लिए सात मानक सबसे अधिक महत्वपूर्ण तत्वों पीएच, एसएआर, बाइकार्बोनेट, सल्फेट, कुल कठोरता, मैंगनीज और निकेल की मात्रा को शामिल किया गया।


इन नमूनों में सीसा, निकेल, क्रोमियम, मैंगनीज और जस्ता जैसे तत्व मिले। इन्हीं के आधार पर वैज्ञानिकों ने मिट्टी की गुणवत्ता मापने के लिए विशेष सूचकांक विकसित किए, जिसे स्टैंडर्ड वेट स्कोरिंग (एसडब्ल्यूएस) नाम दिया गया।



मिट्टी में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को दर्ज करेगी नई तकनीक
-एसडब्ल्यूएस पद्धति प्रत्येक मृदा मानक को उसकी वास्तविक पर्यावरणीय और कृषि उपयोगिता के अनुसार अलग-अलग महत्व देती है, जिससे मिट्टी की स्थिति का अधिक सटीक और भरोसेमंद आकलन किया जा सकता है। तैयार किए गए 12 मृदा गुणवत्ता सूचकांकों में एसक्यूआई-6 और एसक्यूआई-12 सबसे प्रभावी साबित हुए। इन सूचकांकों ने मौसम, सिंचाई और प्रदूषण के कारण मिट्टी में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को भी सटीकता के साथ दर्ज किया।


खेतों में रोजाना पहुंच रहा 589 एमएलडी पानी
अपशिष्ट जल अध्ययन में बताया गया है कि काली नदी में प्रतिदिन लगभग 589 मिलियन लीटर अपशिष्ट जल पहुंच रहा है, जिसमें अधिकांश बिना उपचारित सीवेज और औद्योगिक रसायन शामिल हैं। यही जहरीला पानी धीरे-धीरे खेतों में लवण, सल्फेट, बाइकार्बोनेट और भारी धातुओं का स्तर बढ़ा रहा है, जिससे मिट्टी की उत्पादकता प्रभावित हो रही है।

- एसडब्ल्यूएस आधारित मृदा गुणवत्ता सूचकांक भविष्य में किसानों, प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियों के लिए एक मजबूत निर्णय-सहायक प्रणाली बन सकते हैं। इससे न केवल भूमि उपयोग की बेहतर योजना तैयार होगी और कृषि संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी। -प्रो. सैफ सईद, सिविल इंजीनियरिंग, एएमयू
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