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तड़पते मरीजों को लेकर प्राइवेट अस्पतालों की ओर भागे तीमारदार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Wed, 07 Nov 2018 12:59 AM IST
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जेएनएमसी की इमरजेंसी के बाहर पसरा सन्नाटा
- फोटो : Dig Vishal
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सातवें वेतनमान सहित अन्य मांगों को लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। इसकी वजह से इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर में लगातार दूसरे दिन गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। दर्द से तड़पते इमरजेंसी पहुंचे मरीजों को तीमारदार लेकर प्राइवेट अस्पतालों में लेकर चले गए। एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी के समझाने के बावजूद छात्र हड़ताल पर अडिग हैं।
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण जेएन मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है। इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। दूर-दूर से आए मरीजों को बाहर से ही लौटा दिया जा रहा है। ओपीडी तो चल रहा है और वहां से आए कुछ मरीजों का इमरजेंसी में उपचार किया गया। दोपहर में आरडीए सदस्यों की जेनरल बॉडी मीटिंग में हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया गया।
आरडीए अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लाह आजमी ने कहा कि यह हड़ताल केंद्र सरकार के खिलाफ है। दो साल पहले सातवां वेतनमान लागू है लेकिन आज तक रेजीडेंट डॉक्टरों को उसका लाभ नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति बुधवार के जीबीएम में तय किया जाएगा। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. एससी शर्मा ने कहा कि यह अनुशासनहीनता है। सातवां वेतनमान यूनिवर्सिटी प्रशासन के हाथ में नहीं है। गरीब मरीजों को सर्वाधिक परेशानी हो रही है। उल्लेखनीय है कि हड़ताल में करीब 450 जेआर वन, टू एवं थ्री शामिल है।
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एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी ने दिया त्यौहार का वास्ता
जेएन मेडिकल कॉलेज के हड़ताली डॉक्टरों के नेताओं से एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी आदि ने बातचीत की। आरडीए पदाधिकारियों को त्यौहार का वास्ता देकर हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया गया। लेकिन जीबीएम में विचार करने का हवाला देकर डॉक्टर निकल गये। जेएनएमएसी में बार-बार हड़ताल से खिन्न कुछ लोग एस्मा लगाने की भी वकालत कर रहे हैं। कुछ लोग तो हाईकोर्ट में भी जाने की बात कह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जेएन मेडिकल प्रशासन द्वारा भी हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया गया है।
सिर्फ एएमयू छात्र एवं कर्मचारियों का इलाज
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण भले ही इमरजेंसी में बाहर के मरीजों को लौटा दिया जा रहा हो। लेकिन एएमयू छात्र एवं कर्मचारियों के लिए इमरजेंसी का दरवाजा खुला हुआ है।
एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी ने बातचीत के लिए बुलाया था। उन्होंने त्यौहार की बात कहकर हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया। हमलोग जीबीएम में विचार करेंगे। हमलोग 106 दिन से हड़ताल पर है। हमारी समस्याओं की तरफ यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।
- डॉ. अब्दुल्लाह आजमी, अध्यक्ष, आरडीए
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जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण जेएन मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है। इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर में नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। दूर-दूर से आए मरीजों को बाहर से ही लौटा दिया जा रहा है। ओपीडी तो चल रहा है और वहां से आए कुछ मरीजों का इमरजेंसी में उपचार किया गया। दोपहर में आरडीए सदस्यों की जेनरल बॉडी मीटिंग में हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया गया।
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आरडीए अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लाह आजमी ने कहा कि यह हड़ताल केंद्र सरकार के खिलाफ है। दो साल पहले सातवां वेतनमान लागू है लेकिन आज तक रेजीडेंट डॉक्टरों को उसका लाभ नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति बुधवार के जीबीएम में तय किया जाएगा। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. एससी शर्मा ने कहा कि यह अनुशासनहीनता है। सातवां वेतनमान यूनिवर्सिटी प्रशासन के हाथ में नहीं है। गरीब मरीजों को सर्वाधिक परेशानी हो रही है। उल्लेखनीय है कि हड़ताल में करीब 450 जेआर वन, टू एवं थ्री शामिल है।
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एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी ने दिया त्यौहार का वास्ता
जेएन मेडिकल कॉलेज के हड़ताली डॉक्टरों के नेताओं से एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी आदि ने बातचीत की। आरडीए पदाधिकारियों को त्यौहार का वास्ता देकर हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया गया। लेकिन जीबीएम में विचार करने का हवाला देकर डॉक्टर निकल गये। जेएनएमएसी में बार-बार हड़ताल से खिन्न कुछ लोग एस्मा लगाने की भी वकालत कर रहे हैं। कुछ लोग तो हाईकोर्ट में भी जाने की बात कह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जेएन मेडिकल प्रशासन द्वारा भी हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया गया है।
सिर्फ एएमयू छात्र एवं कर्मचारियों का इलाज
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण भले ही इमरजेंसी में बाहर के मरीजों को लौटा दिया जा रहा हो। लेकिन एएमयू छात्र एवं कर्मचारियों के लिए इमरजेंसी का दरवाजा खुला हुआ है।
एडीएम सिटी एवं एसपी सिटी ने बातचीत के लिए बुलाया था। उन्होंने त्यौहार की बात कहकर हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया। हमलोग जीबीएम में विचार करेंगे। हमलोग 106 दिन से हड़ताल पर है। हमारी समस्याओं की तरफ यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।
- डॉ. अब्दुल्लाह आजमी, अध्यक्ष, आरडीए