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अलीगढ़ : ध्रुवीकरण की चोट... धड़कन बढ़ाते रहे हर राउंड के वोट
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कहने को जीत दर्ज हुई है। मगर, शहर व कोल सीट पर सबसे कांटे की टक्कर हुई है। इन दोनों सीटों पर मतों की गिनती के समय दोनों दावेदारों और समर्थकों की सांसें अटकी रहीं। हर राउंड के परिणाम ने सभी को चौंकाया। इस दौरान खुद को इतने वोट न मिलने को लेकर आश्वस्त अज्जू ने तो अपनी जीत सुनिश्चित मान ली थी, मगर अंतिम दौर की मतगणना में पासा पलटा और सीट अनिल पाराशर की झोली में चली गई। कमोबेश यही हाल शहर सीट के रहे। कुल मिलाकर इन दोनों सीटों पर परिणाम ने बता दिया कि किस कदर ध्रुवीकरण के नाम पर वोट करते हुए वोटर ने ईवीएम पर चोट मारी है।
जिले की ये दोनों सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें कोल क्षेत्र में 1.20 लाख और शहर में 1.45 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। मतदान के बाद कोल सीट पर मुस्लिम मतों के सपा व कांग्रेस खेमे में बिखराव का अनुमान लगाया जा रहा था। मगर मतगणना के दिन तस्वीर कुछ उलट ही निकली। यहां मतदान के समय शुरुआती दो राउंड में अनिल पाराशर ने अज्जू इशहाक से बढ़त बनाई। मगर तीसरे राउंड के बाद अज्जू ने बढ़त बनाना शुरू किया और 10वें राउंड तक आलम ये था कि अज्जू 67 के पार और अनिल 10 हजार पर सिमटे थे। इस अंतर को देख अज्जू जहां खुद की जीत को लेकर आश्वस्त होने लगे थे और भाजपा खेमा व खुद अनिल पाराशर चिंतित होने लगे थे। अंदेशा था कि बेशक अभी मुस्लिम इलाके में गिनती जारी है, जिसमें ध्रुवीकरण की चोट साफ दिख रही। जब हिंदू आबादी क्षेत्र के वोट खुले और कांग्रेस-बसपा की सेंधमारी उस तरफ हुई तो नुकसान भाजपा को ही होगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। 29वें राउंड तक भाजपा का वोट बढ़ता गया, मगर भाजपा को सपा ही चुनौती देती रही। मतलब सपा 100448 और भाजपा 98656 पर थी। सिर्फ दो राउंड शेष थे। बसपा-कांग्रेस कोई बहुत कमाल नहीं दिखा पाई थीं। सपा खेमा अपनी जीत को लेकर और ज्यादा आश्वस्त हो गया था। मगर 30 व 31वें राउंड में भाजपा को अचानक 9 हजार मत मिले। वही उसकी जीत के लिए काफी रहे और 55 सौ मतों से भाजपा को विजयी घोषित किया गया।
इसी तरह शहर सीट पर 15वें राउंड तक भाजपा की मुक्ता राजा सपा के जफर आलम से करीब 1600 मतों से बढ़त बनाए रहीं। मगर 16वें राउंड में सपा करीब 3 हजार वोटों से आगे निकल गई। इसके बाद सपा 25वें राउंड तक बढ़त बनाए रही। मगर 26वें राउंड में 6001 मत पाकर भाजपा आगे निकली और फिर सीधे जीत पर पहुंची। इस सीट पर भी सबसे खास बात रही कि जिस तरह बसपा व कांग्रेस से वोटों के बिखराव का अनुमान था तो ये दोनों दल भी कोई चमत्कार नहीं दिखा सके और बेहद कमजोर स्थिति में चुनाव लड़े।
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जिले की ये दोनों सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें कोल क्षेत्र में 1.20 लाख और शहर में 1.45 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। मतदान के बाद कोल सीट पर मुस्लिम मतों के सपा व कांग्रेस खेमे में बिखराव का अनुमान लगाया जा रहा था। मगर मतगणना के दिन तस्वीर कुछ उलट ही निकली। यहां मतदान के समय शुरुआती दो राउंड में अनिल पाराशर ने अज्जू इशहाक से बढ़त बनाई। मगर तीसरे राउंड के बाद अज्जू ने बढ़त बनाना शुरू किया और 10वें राउंड तक आलम ये था कि अज्जू 67 के पार और अनिल 10 हजार पर सिमटे थे। इस अंतर को देख अज्जू जहां खुद की जीत को लेकर आश्वस्त होने लगे थे और भाजपा खेमा व खुद अनिल पाराशर चिंतित होने लगे थे। अंदेशा था कि बेशक अभी मुस्लिम इलाके में गिनती जारी है, जिसमें ध्रुवीकरण की चोट साफ दिख रही। जब हिंदू आबादी क्षेत्र के वोट खुले और कांग्रेस-बसपा की सेंधमारी उस तरफ हुई तो नुकसान भाजपा को ही होगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। 29वें राउंड तक भाजपा का वोट बढ़ता गया, मगर भाजपा को सपा ही चुनौती देती रही। मतलब सपा 100448 और भाजपा 98656 पर थी। सिर्फ दो राउंड शेष थे। बसपा-कांग्रेस कोई बहुत कमाल नहीं दिखा पाई थीं। सपा खेमा अपनी जीत को लेकर और ज्यादा आश्वस्त हो गया था। मगर 30 व 31वें राउंड में भाजपा को अचानक 9 हजार मत मिले। वही उसकी जीत के लिए काफी रहे और 55 सौ मतों से भाजपा को विजयी घोषित किया गया।
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इसी तरह शहर सीट पर 15वें राउंड तक भाजपा की मुक्ता राजा सपा के जफर आलम से करीब 1600 मतों से बढ़त बनाए रहीं। मगर 16वें राउंड में सपा करीब 3 हजार वोटों से आगे निकल गई। इसके बाद सपा 25वें राउंड तक बढ़त बनाए रही। मगर 26वें राउंड में 6001 मत पाकर भाजपा आगे निकली और फिर सीधे जीत पर पहुंची। इस सीट पर भी सबसे खास बात रही कि जिस तरह बसपा व कांग्रेस से वोटों के बिखराव का अनुमान था तो ये दोनों दल भी कोई चमत्कार नहीं दिखा सके और बेहद कमजोर स्थिति में चुनाव लड़े।
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