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यूपीए सरकार का हलफनामा वापस न ले केंद्र
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Wed, 20 Apr 2016 01:50 AM IST
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हलफनामा
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उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष शकील अहमद अमुटा नेताओं से मिले और अल्पसंख्यक स्वरूप पर चर्चा की। उन्होंने अमुटा नेताओं से पूछा कि वे इस मामले में कैसी मदद कर सकते है।
अमुटा नेताओं ने दो टूक कह दिया कि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से बात कर केंद्र सरकार पर दबाव बनाए कि वह यूपीए सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिया गया हलफनामा वापस न ले। अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि एएमयू के दर्द में हमलोग शामिल है। हमलोग चाहते है कि एएमयू का अल्पसंख्यक स्वरूप रहे। इसके लिए हर संभव मदद करेंगे। इसके लिए हुकूमत से बात करेंगे। एएमयू का स्वरूप छिनना बड़े साजिश का हिस्सा है। अमुटा अध्यक्ष प्रो. मुजाहिद बेग एवं सचिव मुस्तफा जैदी ने एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप के बारे में आयोग के अध्यक्ष को विस्तार से जानकारी दी और यह भी कहा कि एएमयू कुलपति इसको लेकर गंभीर नहीं है।
उन्होंने कहा कि 4 अप्रैल को एएमयू वीसी की नियुक्ति एवं अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर अलग-अलग कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इंताजामिया की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वीसी की नियुक्ति मामले के दौरान कांग्रेस लीडर सलमान खुर्शीद एवं कपिल सिब्बल मौजूद थे। जबकि अल्पसंख्यक स्वरूप की सुनवाई में नहीं गए। इससे पूर्व आयोग के अध्यक्ष एवं उनके साथ आया प्रतिनिधि मंडल एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह से मुलाकात की।
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बातचीत के दौरान अल्पसंख्यक स्वरूप, यूनिवर्सिटी की वक्फ संपत्तियों के नाजायज कब्जों को हटवाने, यूनिवर्सिटी को कामर्शियल के बदले घरेलू दर पर बिजली उपलब्ध कराने तथा सिंचाई विभाग की कॉलोनी को एएमयू को देने आदि पर चर्चा हुई। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने सर सैयद के मजार पर श्रद्धासुमन अर्पित किया तथा मौलाना आजाद लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियों को देखा।
मायावती के बयान से सपा में बढ़ी बेचैनी
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग की टीम के अचानक एएमयू में पहुंचने एवं अल्पसंख्यक स्वरूप के मसले पर हमदर्दी जताने की घटना को लेकर शिक्षक नेता तरह-तरह के कयास लगा रहे थे। पिछले दिनों मायावती द्वारा एएमयू के पक्ष में दिए गए बयान को इसके लिए उत्तरदायी बता रहे थे। ऐसे शिक्षकों का कहना था कि अल्पसंख्यक स्वरूप के मसले पर मायावती पहले ही एएमयू के साथ खड़ी है। उनके बयान के बाद सपा की बेचैनी बढ़ गई है।
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अमुटा नेताओं ने दो टूक कह दिया कि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से बात कर केंद्र सरकार पर दबाव बनाए कि वह यूपीए सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिया गया हलफनामा वापस न ले। अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि एएमयू के दर्द में हमलोग शामिल है। हमलोग चाहते है कि एएमयू का अल्पसंख्यक स्वरूप रहे। इसके लिए हर संभव मदद करेंगे। इसके लिए हुकूमत से बात करेंगे। एएमयू का स्वरूप छिनना बड़े साजिश का हिस्सा है। अमुटा अध्यक्ष प्रो. मुजाहिद बेग एवं सचिव मुस्तफा जैदी ने एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप के बारे में आयोग के अध्यक्ष को विस्तार से जानकारी दी और यह भी कहा कि एएमयू कुलपति इसको लेकर गंभीर नहीं है।
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उन्होंने कहा कि 4 अप्रैल को एएमयू वीसी की नियुक्ति एवं अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर अलग-अलग कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इंताजामिया की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वीसी की नियुक्ति मामले के दौरान कांग्रेस लीडर सलमान खुर्शीद एवं कपिल सिब्बल मौजूद थे। जबकि अल्पसंख्यक स्वरूप की सुनवाई में नहीं गए। इससे पूर्व आयोग के अध्यक्ष एवं उनके साथ आया प्रतिनिधि मंडल एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह से मुलाकात की।
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बातचीत के दौरान अल्पसंख्यक स्वरूप, यूनिवर्सिटी की वक्फ संपत्तियों के नाजायज कब्जों को हटवाने, यूनिवर्सिटी को कामर्शियल के बदले घरेलू दर पर बिजली उपलब्ध कराने तथा सिंचाई विभाग की कॉलोनी को एएमयू को देने आदि पर चर्चा हुई। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने सर सैयद के मजार पर श्रद्धासुमन अर्पित किया तथा मौलाना आजाद लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियों को देखा।
मायावती के बयान से सपा में बढ़ी बेचैनी
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग की टीम के अचानक एएमयू में पहुंचने एवं अल्पसंख्यक स्वरूप के मसले पर हमदर्दी जताने की घटना को लेकर शिक्षक नेता तरह-तरह के कयास लगा रहे थे। पिछले दिनों मायावती द्वारा एएमयू के पक्ष में दिए गए बयान को इसके लिए उत्तरदायी बता रहे थे। ऐसे शिक्षकों का कहना था कि अल्पसंख्यक स्वरूप के मसले पर मायावती पहले ही एएमयू के साथ खड़ी है। उनके बयान के बाद सपा की बेचैनी बढ़ गई है।