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Aligarh News: मठरी और बरूले के स्वाद को सूबे में मिलेगी पहचान

Sun, 19 Apr 2026 03:06 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2026 03:06 AM IST
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The taste of Mathri and Barule will be recognized in the state.
अलीगढ़ की मठरी।
शहर के मशहूर व्यंजन मठरी और बरूला के स्वाद को अब सूबे में भी पहचान मिलेगी। शासन की मांग पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के गृह विज्ञान विभाग ने मठरी और बरूला का प्रस्ताव भेजा है। मठरी का बाजार में दबदबा है, जबकि बरूला घरों में भी तैयार हो रहा है। मठरी का इतिहास करीब 125 साल पुराना बताया जाता है, जबकि बरूला खाने का चलन करीब 100 साल पुराना है। एएमयू से शासन ने अलीगढ़ के परंपरागत दो व्यंजन का प्रस्ताव मांगा था।
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बताया जाता है कि वर्ष 1890 से 1913 के बीच अलीगढ़ में मठरी का वजूद सामने आया। पेशावर के बेकर उस्ताद लतीफ खान मठरी को लोगों के सामने लेकर आए थे। नमकीन मठरी आगरा में मिलती है, जो थोड़ी मीठी भी होती है, जिसका साइज बड़ा होता है। इसमें इलायची भी मिली होती है। मठरी में बटर या मलाई लगाकर लोग खाना पसंद करते हैं। सैंडविच की तर्ज पर मठरी आमलेट का भी काफी क्रेज है। मैदा, घी और चीनी से कुरकुरी मठरी बनती है।
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यह मठरी देश-दुनिया में भी पसंद की जाती है। एएमयू में पढ़े विद्यार्थियों के जेहन में मठरी के स्वाद की यादें हमेशा ताजा रहती हैं। जब भी कोई विदेशी अलीगढ़ आता है, तो मठरी को अपने देश तक ले जाता है। इस तरह मठरी दुबई, इंग्लैंड, कनाडा, अमेरिका सहित अन्य देशों में पहुंच जाती है।
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अलीगढ़ जिले में आलू की पैदावार अधिक होती है। इसलिए छोटा आलू बहुतायत में मिल जाता है। इसी आलू से बरूला तैयार होता है। कुछ साल पहले तक सर्दी के मौसम तथा मेले-प्रदर्शनी में बरूले की डिमांड बहुत होती थी, लेकिन अब साल भर बरूले बाजार में बिकते दिखाई दे जाते हैं। इस तरह मठरी और बरूले अलीगढ़ के परंपरागत प्रसिद्ध व्यंजन हैं।



शासन ने एक जिला एक व्यंजन के तहत दाे व्यंजनों का प्रस्ताव मांगा था। विभाग के विद्यार्थियों ने जिले में सर्वे किया तो मठरी और बरूला सामने आए। विद्यार्थियों ने लोगों से मठरी और बरूला को लेकर प्रश्नोत्तरी के आधार पर जानकारी जुटाई। इन दोनों व्यंजन का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। शासन की अपेक्षाओं पर मठरी खरी उतरती दिखाई दे रही है। यदि रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आउटलेट खुलेंगे तो रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- प्रो. सबा खान, अध्यक्ष गृह विज्ञान विभाग, एएमयू
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