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बीमार बीवी को खर्च न देना पड़े, बनवाया फर्जी निकाहनामा
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पारिवारिक विवाद में एएमयूकर्मी पर अदालत को गुमराह कर पत्नी को दिए जाने वाले मासिक खर्च के खिलाफ फर्जी निकाहनामा दाखिल कर दिया। इस आधार पर मासिक खर्चा देना बंद कर दिया, जब सच्चाई उजागर हुई तो निकाहनामा फर्जी साबित हुआ और एएमयूकर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद उसे जेल भेजा गया है।
यह मुकदमा 21 जून को देहली थाने गेट में दर्ज कराया गया था। मुकदमा दर्ज कराते हुए सराय मियां के ताला कारोबारी हाजी अनवर की बेटी साहिबा शारिक ने बताया कि उसकी शादी नौ वर्ष पूर्व न्यू सर सैयद नगर, ग्रीन पार्क के एएमयूकर्मी मो. शारिक संग हुई। शादी के कुछ दिन बाद गर्भपात के चलते उसकी किडनी खराब हो गई। अपोलो अस्पताल में उसकी किडनी ट्रांसप्लांट हुई, उसकी मां फेमिदा अनवार ने उसे किडनी दी। इसके बाद उसे ससुरालियों ने नहीं रखा। इस पर महिला ने दहेज उत्पीड़न व तीन तलाक आदि के मुकदमे दर्ज कराए। बाद में परिवार न्यायालय से साहिबा के हक में यह आदेश हुआ कि शारिक उसे प्रतिमाह दस हजार रुपये मासिक खर्च देगा।
अदालत के आदेश पर उसने जनवरी, फरवरी व मार्च में खर्च दिया। इसके बाद खर्च देना बंद कर दिया, बल्कि हाईकोर्ट में साहिबा का एक निकाहनामा दाखिल कर दिया, जिसमें जमालपुर के एक व्यक्ति से शादी होना दर्शाया, जब साहिबा को मासिक खर्च मिलना बंद हुआ तो जानकारी की। हाईकोर्ट से पत्रावली निकलवाई गई, जिसमें निकाहनामा देख सभी दंग रह गए। जांच में उसमें उल्लेखित नाम पते फर्जी पाए गए। यह सच अदालत के सामने रखा गया। इस आधार पर अब शारिक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसके आधार पर पुलिस ने शारिक को जेल भेज दिया है।
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शारिक की बहन ब्याही है पत्नी के भाई को
साहिबा के पिता अनवार ने बताया कि शारिक पहले से रिश्तेदार है। जब उन्होंने अपनी बेटी का रिश्ता किया तो शारिक के परिवार ने अपनी बेटी हमारे घर में देना तय किया। इस तरह दोनों परिवारों में शादी हुई और नई रिश्तेदारी बनी। इसके बावजूद उसने यह धोखा किया है।
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यह मुकदमा 21 जून को देहली थाने गेट में दर्ज कराया गया था। मुकदमा दर्ज कराते हुए सराय मियां के ताला कारोबारी हाजी अनवर की बेटी साहिबा शारिक ने बताया कि उसकी शादी नौ वर्ष पूर्व न्यू सर सैयद नगर, ग्रीन पार्क के एएमयूकर्मी मो. शारिक संग हुई। शादी के कुछ दिन बाद गर्भपात के चलते उसकी किडनी खराब हो गई। अपोलो अस्पताल में उसकी किडनी ट्रांसप्लांट हुई, उसकी मां फेमिदा अनवार ने उसे किडनी दी। इसके बाद उसे ससुरालियों ने नहीं रखा। इस पर महिला ने दहेज उत्पीड़न व तीन तलाक आदि के मुकदमे दर्ज कराए। बाद में परिवार न्यायालय से साहिबा के हक में यह आदेश हुआ कि शारिक उसे प्रतिमाह दस हजार रुपये मासिक खर्च देगा।
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अदालत के आदेश पर उसने जनवरी, फरवरी व मार्च में खर्च दिया। इसके बाद खर्च देना बंद कर दिया, बल्कि हाईकोर्ट में साहिबा का एक निकाहनामा दाखिल कर दिया, जिसमें जमालपुर के एक व्यक्ति से शादी होना दर्शाया, जब साहिबा को मासिक खर्च मिलना बंद हुआ तो जानकारी की। हाईकोर्ट से पत्रावली निकलवाई गई, जिसमें निकाहनामा देख सभी दंग रह गए। जांच में उसमें उल्लेखित नाम पते फर्जी पाए गए। यह सच अदालत के सामने रखा गया। इस आधार पर अब शारिक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसके आधार पर पुलिस ने शारिक को जेल भेज दिया है।
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शारिक की बहन ब्याही है पत्नी के भाई को
साहिबा के पिता अनवार ने बताया कि शारिक पहले से रिश्तेदार है। जब उन्होंने अपनी बेटी का रिश्ता किया तो शारिक के परिवार ने अपनी बेटी हमारे घर में देना तय किया। इस तरह दोनों परिवारों में शादी हुई और नई रिश्तेदारी बनी। इसके बावजूद उसने यह धोखा किया है।