सुरक्षाबलों के बारे में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सकारात्मक टिप्पणी उनका मनोबल बढ़ाने वाली है। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा है कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल अपनी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं और इसमें कोई संदेह नहीं कि वह इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं। कोर्ट ने मामले में दाखिल याचिका को पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया।
आमतौर पर धरना-प्रदर्शन और हिंसा को रोकने के लिए इस्तेमाल किए गए बल प्रयोग को लेकर सुरक्षाबल ज्यादातर मामलों में बैकफुट पर रहते हैं। बहुधा वे आलोचना के भी शिकार होते हैं। कोर्ट ने न सिर्फ उन्हें ऐसे हालत से निपटने के लिए सक्षम करार दिया बल्कि कार्रवाई के लिए स्वतंत्र बताकर एक तरह से उनकी हौसला अफजाई की है। इससे निश्चित तौर पर सुरक्षाबल कर्मियों का हौसला बढ़ेगा।
शैक्षिक संस्थाओं पर छात्रों से संवाद बनाए रखने का दायित्व
हाईकोर्ट ने अपनी अहम टिप्पणी में शैक्षिक संस्थाओं पर भी परिसर के भीतर बेहतर माहौल बनाने के दायित्व को रेखांकित किया है। कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाएं छात्रों से संवाद का बेहतर तंत्र विकसित करें, जिससे कि वह बाहरियों के उकसावे में न आएं और वहां शांति व्यवस्था बनी रहे। कोर्ट ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रों से संवाद का माध्यम कभी बंद नहीं, उसे हमेशा खुला रखना चाहिए।